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China-पाक की हालत होने वाली है खराब, IAC विक्रांत जल्द होगा तैनात... देखिए शानदार तस्वीरें

ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 12 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 7:56 PM IST
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भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत (First Indigenous Aircraft Carrier) आईएसी विक्रांत (IAC Vikrant) का चौथा समुद्री ट्रायल हाल ही में पूरा हुआ है. इस ट्रायल के दौरान इसके नेविगेशन सिस्टम, तैनात हथियारों की क्षमता और हेलिकॉप्टर की लैंडिंग और टेकऑफ आदि की जांच की गई. इस मौके पर भारतीय नौसेना ने इसकी तस्वीरें जारी करके देशवासियों को बताया कि ये कितना ताकतवर है. आइए जानते हैं इसकी ताकत और क्षमता के बारे में... (फोटोः Indian Navy)

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आईएसी विक्रांत (IAC Vikrant) पहली बार 21 अगस्त 2021 को समुद्र की ट्रायल यात्रा पर निकला था. बराक मिसाइलों जैसे घातक हथियारों से लैस इस युद्धपोत के तैनात होते ही भारत के समुद्री तट अपने दुश्मनों से सुरक्षित हो जाएंगे. साथ ही भारतीय नौसेना की ताकत में कई गुना बढ़ोतरी हो जाएगी. भविष्य में इसमें दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos Missile) को भी तैनात किया जा सकता है. (फोटोः Indian Navy)

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चौथा ट्रायल 10 जुलाई 2022 को पूरा हुआ था. पहले यह जानते हैं कि भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत (India's First Indigenous Aircraft Carrier - IAC) क्या है. इसकी ताकत कितनी है. इस पोत का नाम आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant/IAC Vikrant) है. यह 45 हजार टन का करियर है.  IAC विक्रांत (IAC Vikrant) में जनरल इलेक्ट्रिक के ताकतवर टरबाइन लगे हैं. जो इसे 1.10 लाख हॉर्सपावर की ताकत देते हैं. इस पर MiG-29K लड़ाकू विमान और 10 Kmaov Ka-31 हेलिकॉप्टर के दो स्क्वॉड्रन होंगे. इस विमानवाहक पोत की स्ट्राइक फोर्स की रेंज 1500 किलोमीटर है. इसपर 64 बराक मिसाइलें लगी होंगी. जो जमीन से हवा में मार करने में सक्षम हैं. (फोटोः Indian Navy)
 

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INS विक्रांत की लंबाई 860 फीट, बीम 203 फीट, गहराई 84 फीट और चौड़ाई 203 फीट है. इसका कुल क्षेत्रफल 2.5 एकड़ का है. यह 52 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से समुद्र की लहरों की चीरकर आगे बढ़ सकता है. यह एक बार में 15 हजार किलोमीटर की यात्रा कर सकता है. इसमें एक बार में 196 नौसेना अधिकारी और 1149 सेलर्स और एयरक्रू रह सकते हैं. इसमें 4 ओटोब्रेडा (Otobreda) 76 mm की ड्यूल पर्पज कैनन लगे हैं. इसके अलावा 4 AK 630 प्वाइंट डिफेंस सिस्टम गन लगी होगी. (फोटोः Indian Navy)

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INS विक्रांत पर एक बार में कुल 36 से 40 लड़ाकू विमान तैनात हो सकते हैं. 26 मिग-29 के और 10 कामोव Ka-31, वेस्टलैंड सी किंग या ध्रुव हेलिकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं. इसकी फ्लाइट डेक 1.10 लाख वर्ग फीट की है, जिस पर से फाइटर जेट आराम से टेकऑफ या लैंडिंग कर सकते हैं. इसे बनाने की प्रक्रिया की साल 2013 में शुरु हुई थी. इसमें अब तक 22 हजार करोड़ रुपये की लागत लग चुकी है. इस विमान पर ट्विन इंजन बेस्ड फाइटर तैनात किया जाएगा. जिसे HAL बनाएगा. तब तक के लिए मिग-29K फाइटर जेट इस पर तैनात रहेंगे. (फोटोः PTI)

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ऐसा माना जा रहा है कि नेवी ने इस पोत पर लंबी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को इंटीग्रेट करने का काम भी शुरु किया है. ऐसा माना जा रहा है कि इस युद्धपोत पर ब्रह्मोस मिसाइल (BraHmos Missile) से भी लैस किया जाएगा. ब्रह्मोस और बराक मिसाइलों को लगाने के बाद यह युद्धपोत दुनिया के खतरनाक विमानवाहक पोतों में शामिल हो जाएगा. इसी नाम से 1971 के युद्ध में युद्धपोत का उपयोग किया गया था. यह भारत का बड़ा और जटिल युद्धपोत है. इसका डिजाइन और निर्माण दोनों भारत में ही हुआ है. (फोटोः PTI)

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इसे बनाने में कोचीन शिपयार्ड के साथ-साथ 550 भारतीय कंपनियों ने मदद की है. इसके अलावा 100 MSME कंपनियां भी शामिल थी. इस युद्धपोत के अलग-अलग हिस्सों को अलग-अलग कंपनियों ने बनाया है. हिंद महासागर, प्रशांत महासागर और दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए भारतीय नौसेना लगातार अपनी क्षमताओं को बढ़ा रही है. (फोटोः PTI)

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अभी इस युद्धपोत पर तैनाती के लिए भारतीय नौसेना लड़ाकू विमान भी खोज रही है. इस युद्धपोत पर तैनाती के लिए दुनिया के चार सर्वश्रेष्ठ फाइटर जेट्स का ट्रायल लेने की तैयारी है. इसके लिए नौसेना की नजर में चार लड़ाकू विमान हैं- पहला राफेल (Rafale) का नेवी वर्जन, दूसरा अमेरिकी कंपनी बोइंग का F-18 सुपर हॉर्नेट (F-18 Super Hornet), तीसरा रूस और भारत का भरोसेमंद मिग-29के (Mig-29K) और चौथा स्वीडेन की कंपनी साब का ग्रिपेन (Gripen). (फोटोः PTI)
 

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राफेल (Rafale) रॉफेल का कॉम्बैट रेडियस 3700 KM है, जबकि चीन के स्वदेशी फाइटर जेट J-20 का 3400 किलोमीटर है. यानी हमारा लड़ाकू विमान 300 किलोमीटर ज्यादा उड़ सकता है. यानी अपने बेस स्टेशन से जितनी दूर विमान जाकर सफलतापूर्वक हमला कर लौट सकता है, उसे कॉम्बैट रेडियस कहते हैं. राफेल में तीन तरह की मिसाइलें लगेंगी. हवा से हवा में मार करने वाली मीटियोर मिसाइल. हवा से जमीन में मार करने वाल स्कैल्प मिसाइल. तीसरी है हैमर मिसाइल. इन मिसाइलों से लैस होने के बाद राफेल काल बनकर दुश्मनों पर टूट पड़ेगा. (फोटोः PTI)

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राफेल में लगी मीटियोर मिसाइल 150 किलोमीटर, स्कैल्प मिसाइल 300 किलोमीटर तक मार कर सकती है. जबकि, हैमर का उपयोग कम दूरी के लिए किया जाता है. ये मिसाइल आसमान से जमीन पर वार करने के लिए कारगर साबित होती है. जबकि, चीन के J-20 जेट में सिर्फ दो प्रकार की मिसाइलें लग सकती है. पीएल-15 जो 300 किलोमीटर हमला करती है. दूसरी पीएल-21 जिसकी रेंज 400 किलोमीटर है. राफेल 300 मीटर प्रति सेकेंड की गति से हवा में सीधी उड़ान भर सकता है, जबकि चीन का जे-20 जेट 304 मीटर प्रति सेकेंड से. (फोटोः PTI)

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चीन के जे-20 फाइटर जेट की स्पीड 2100 किलोमीटर प्रति घंटा है. जबकि, भारतीय राफेल की गति 2450 किलोमीटर प्रतिघंटा है. यानी ध्वनि की गति से दोगुनी स्पीड.  राफेल ओमनी रोल लड़ाकू विमान है. यह पहाड़ों पर कम जगह में उतर सकता है. इसे समुद्र में चलते हुए युद्धपोत पर उतार सकते हैं. राफेल चारों तरफ निगरानी रखने में सक्षम है. इसका टारगेट अचूक होगा. जबकि, चीन का जे-20 इन सुविधाओं से विहीन है. असल में चीन के पास हिमालय के पहाड़ों में तेजी से हमला करने और उड़ने वाले फाइटर जेट कम हैं. (फोटोः PTI)

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F-18 Super Hornet को अमेरिकी कंपनी बोइंग बनाती है. इसके दो वैरिएंट हैं- पहला सिंगल सीटर और दूसरा दो पायलटों वाला. इसकी लंबाई 60.1 फीट है. विंगस्पैन 44.8 फीट है. ऊंचाई 16 फीट है. इसके अंदर 6667 किलोग्राम ईंधन भरा जा सकता है. यह जनरल इलेक्ट्रिक F414-GR-400-turbofans के दो इंजनों से उड़ता है. अब इसकी ताकत के बारे में आपको बताते हैं. (फोटोः PTI)

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F-18 Super Hornet की अधिकतम गति 1915 किलोमीटर प्रति घंटा है. यह गति वह 40 हजार फीट की ऊंचाई पर होती है. इसकी रेंज 2346 किलोमीटर है. लेकिन कॉम्बैट रेंज 722 किलोमीटर है. इसमें 450 किलोग्राम के चार बम और दो AIM-9S मिसाइलें लगा सकते हैं. यह अधिकतम 50 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है. यह एक सेकेंड में 228 मीटर की गति से आसमान में जाता हैं. (फोटोः PTI)

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F-18 Super Hornet 20 मिलीमीटर के एक M61A2 गन लगी होती है, जो एक मिनट में 412 राउंड फायर करती है. इसके अलावा इसमें 11 हार्ड प्वाइंट हैं. यानी इतने बम या मिसाइलें तैनाती की जा सकती है. इसमें 4 AIR-9 Sidewinder, 12 मीडियम रेंज एयर टू एयर मिसाइल, 4 स्पैरो मिसाइल, 6 मैवरिक, 4 स्लैम, 2 हार्पून जैसी कई मिसाइलें लगाई जा सकती हैं, लेकिन इनका मिश्रण किया जा सकता है. (फोटोः PTI)

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रूस और भारत का भरोसेमंद लड़ाकू विमान मिग-29के (MiG-29K) पहले से ही भारतीय सेना उपयोग कर रही है. लेकिन इसके नौसैनिक वर्जन यानी विमानवाहक पोत के लिए जरूरी फाइटर जेट की जरूरत पड़ेगी. इसलिए इसके नेवल वर्जन का भी परीक्षण होगा. आपको बता दें कि यह 56.9 फीट लंबा और 14.5 फीट ऊंचा विमान है. विंगस्पैन 39.4 फीट है. इसमें 2 किमोवट आरडी-33 एमके आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन लगे हैं. इसकी अधिकतम गति 2200 किलोमीटर प्रतिघंटा है. इसकी रेंज 1500 किलोमीटर है, जबकि कॉम्बैट रेंज 850 किलोमीटर है. (फोटोः PTI)

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