आत्मनिर्भर भारत मुहिम के तहत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स 11 सितंबर को भारतीय नौसेना के नीलगिरी क्लास के तीसरे स्टेल्थ फ्रिगेट INS Taragiri की लॉन्चिंग करने जा रहा है. इस युद्धपोत का निर्माण इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन मेथेडेलॉजी से किया गया है. यानी शिप के हिस्सों का अलग-अलग जगहों पर निर्माण हुआ है फिर उसे लाकर एक साथ इंटीग्रेट यानी जोड़ दिया गया है. (फोटोः ट्विटर/MDSL)
आईएनएस तारागिरी (INS Taragiri) को बनाने की प्रक्रिया 10 सितंबर 2020 को शुरू हुई थी. भारतीय नौसेना को यह अगस्त 2025 तक सौंपी जाएगी. इसका डिजाइन ब्यूरो ऑफ नेवल डिजाइन ने बनाया है. यह 488.10 फीट लंबा और 58.5 फीट चौड़ा है. इसमें चार इंजन होंगे दो गैस टरबाइन और दो डीजल. जो इसे पानी में चलने की ताकत देंगे. (फोटोः ट्विटर/MDSL)
आईएनएस तारागिरी (INS Taragiri) का डिस्प्लेसमेंट 6670 टन है. यह अधिकतम 59 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से समुद्र की लहरों का सीना चीरते हुए जा सकता है. अगर यह 52 किमी प्रतिघंटा की गति से चलता है तो इसकी रेंज 4600 किलोमीटर है. अगर गति कम करके 33 किमी प्रतिघंटा रखता है तो यह 10,200 किमी तक जा सकता है. इस पर दो रिजिडि इन्फ्लेटेबल बोट्स तैनात हो सकती है. इस युद्धपोत पर 35 ऑफिसर्स को मिलाकर 150 लोग तैनात हो सकते हैं. (फोटोः ट्विटर/MDSL)
आईएनएस तारागिरी (INS Taragiri) के हथियार
इस युद्धपोत पर एंटी एयर वॉरफेयर के लिए भविष्य में सतह से हवा में मार करने वाली 32 बराक 8 ईआर (Barak 8 ER) या फिर भारत का सीक्रेट हथियार VLSRSAM मिसाइल लगाई जा सकती है. एंटी सरफेस वॉरफेयर के लिए इसपर 8 BrahMos एंटी शिप मिसाइल लगाई जा सकती हैं. इनकी लॉन्चिंग वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) से होगी. युद्धपोत में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए 2 ट्रिपल टॉरपीडो ट्यूब्स हैं. इसके अलावा 2 RBU-6000 एंटी सबमरीन रॉकेट लॉन्चर्स लगे हुए हैं. (फोटोः पीटीआई)
इसके अलावा आईएनएस तारागिरी (INS Taragiri) पर एक 76 मिमी की OTO मेलारा नेवल गन लगी है. इसके अलावा 2 एके-630M CIWS गन लगी है. रूस द्वारा विकसित क्लोज-इन वेपन सिस्टम रोटरी कैनन (CIWS). यानी घूमने वाली तोप. इसके अलग-अलग वैरिएंट्स हैं जो 1000 KG से लेकर 2500 KG तक वजनी है. इसमें 2000 राउंड की बेल्ट लगती है. इसके अलग-अलग वैरिएंट्स एक मिनट 4000 से लेकर 10 हजार राउंड्स गोलियां दागते हैं. गोलियां 900 मीटर/ सेकेंड से दुश्मन की ओर जाती हैं. रेंज 4-5 किमी है. इसकी गोलियां सिर्फ लगकर छेद नहीं करती बल्कि टकराने के बाद विस्फोट करती हैं. राडार और टीवी ऑप्टिकल सिस्टम के आधार पर टारगेट को पहचानता है. (फोटोः विकिपीडिया)
इस युद्धपोत पर कौन-कौन से विमान उतर सकते हैं
आईएनएस तारागिरी (INS Taragiri) पर 2 HAL ध्रुव या सी किंग एमके 42बी तैनात किए जा सकते हैं. हेलिकॉप्टर के लिए एनक्लोज्ड हैंगर हैं. जिसमें दो मल्टी रोल हेलिकॉप्टर छिपाए जा सकते हैं. भारतीय नौसेना के पास 25 वेस्टलैंड सी किंग हेलिकॉप्टर्स हैं. 6 और नए वैरिएंट मंगाए जा रहे हैं. इसे 2 से 4 लोग मिलकर उड़ाते हैं. 55.10 फीट लंबे हेलिकॉप्टर की ऊंचाई 16.10 फीट है. यह 207 किमी प्रतिघंटा की गति से उड़ता है. इसकी रेंज 1230 किमी है. इसमें चार टॉरपीडोस या चार डेप्थ चार्जेज लगाए जा सकते हैं. या फिर मशीन गन लगाए जा सकते हैं.
इंडियन एयरफोर्स के पास 107, इंडियन आर्मी के पास 191 और नेवी के पास 14 HAL Dhruv हेलिकॉप्टर्स हैं. नेवी ने 11 और आर्मी ने 73 हेलिकॉप्टर और ऑर्डर कर रखे हैं. इन ऑर्डर से ही पता चलता है कि ये कितने काम का हेलिकॉप्टर है. इसे दो पायलट उड़ाते हैं. इसमें 12 जवान बैठ सकते हैं. 52.1 फीट लंबे इस हेलिकॉप्टर की ऊंचाई 16.4 फीट है. इसकी अधिकतम गति 291 किमी प्रतिघंटा है. यह एक बार में 630 किमी तक उड़ान भर सकता है. अधिकतम 20 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. (फोटोः विकिपीडिया)
क्या होते हैं स्टेल्थ फ्रिगेट?
भारत के पास शिवालिक क्लास, तलवार क्लास और ब्रह्मपुत्र क्लास में कुल मिलाकर 12 फ्रिगेट्स हैं. सबसे भारी और अत्याधुनिक 6200 टन वाले शिवालिक क्लास फ्रिगेट हैं. ये ऐसे जंगी जहाज होते हैं जिनका मुख्य काम हमला करना ही है. आजकल स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स होते हैं. जिनमें मिसाइलों को तैनात किया जाता है. अगर हम आईएनएस सतपुड़ा (INS Satpura) की बात करें तो इसमें 32 बराक-1 मिसाइलें, 24 मीडियम रेंज मिसाइल, 8 एंटी-शिप क्रूज मिसाइल या 8 ब्रह्मोस एंटी-शिप और लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल तैनात है. 2 टॉरपीडो लॉन्चर्स हैं. दो रॉकेट लॉन्चर्स हैं.इनपर एक ओटोब्रेडा नेवल गन और 2 एके-630 गन तैनात होती है. (फोटोः ट्विटर/कमोडोर जी प्रकाश)