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Two Wheel Throwable Robot: भारत का रोबोटिक जासूस... जो दुश्मन के घर में घुसकर हर साजिश की खोल देता है पोल

ऋचीक मिश्रा
  • गुरुग्राम/नोएडा,
  • 22 जून 2022,
  • अपडेटेड 12:00 PM IST
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सेना और उसके कमांडो जब किसी मिशन पर जाते हैं, उससे पहले ये जानना जरूरी होता है कि वहां कितने आतंकी हैं. कहां छिपे हैं. कितने हथियार हैं. अब आतंकियों की निगरानी, जासूसी या रेकी करने के लिए दूर से ड्रोन या सैटेलाइट के जरिए थर्मल इमेजिंग की जाती है. लेकिन उससे कई बार सटीक विजुअल नहीं मिलता. ऐसे यंत्र की जरूरत होती है जो आतंकियों के घर में घुसकर उनकी सारी डिटेल्स पता करके लाइव दिखा दे. जरूरत पड़ने पर वह यंत्र छिप भी सके.

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देश में ऐसा ही एक रोबोट बनाया गया है. जो दो पहियों पर चलता है. दिन-रात दोनों में देख सकता है और लाइव दिखा भी सकता है. खतरा महसूस होने पर इसे छिपाया भी जा सकता है. यानी रिमोट से चलाकर इसे दुश्मन की नजरों से बचाया भी जा सकता है. साथ ही आतंकियों पर हमले की स्थिति में इसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है, ताकि इसे नुकसान न हो. 

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इस रोबोट का नाम है MOLE: Two Wheel Throwable Robot यानी दो पहियों पर चलने वाला रोबोट, जिसे फेंका जा सकता है. इसे रग्ड बनाया गया है. किसी भी मौसम में काम कर सकता है. बारिश हो या धूप, ऊबड़-खाबड़ जमीन हो या किसी भी तरह की चिकनी फर्श ये अपने पहियों पर दौड़ सकता है. इसमें दो पहिए लगे हैं, जो खास प्रकार के पदार्थ से बने हैं. इसे कितनी भी दूर, ऊंचाई या गहराई में फेंक कर चला सकते हैं. 

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फिलहाल Mole रोबोट का उपयोग नेशनल सिक्योरिटी गार्ड कर रहे हैं. उनके पास ऐसे 30 रोबोट है, जो उनके छह अलग-अलग सेंटर्स में रखे गए हैं. इसके अलावा भारतीय वायुसेना के गरुड़ (Garuda) कमांडो भी इस रोबोट का उपयोग करते हैं. राष्ट्रीय राइफल्स (RR) ने भी इस रोबोट के लिए अपनी रुचि दिखाई है. जल्द ही वो भी इस रोबोट के को खरीद सकते हैं. कंपनी के पास अलग-अलग सैन्य बलों और स्पेशल फोर्सेस के लिए मोल रोबोट्स तैयार है. जरुरत पड़ने पर और तैयार किए जाएंगे. अब जानते हैं इस रोबोट की स्पेसिफिकेशन के बारे में...

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Mole रोबोट का वजन मात्र 750 ग्राम है. इतना ही वजह उसके पोर्टेबल ऑपरेटर कंट्रोल यूनिट (POCU) का भी है. यानी भारी-भरकम कॉम्बैट गियर के साथ जवान को अलग से इसका बैग लेकर चलने की जरूरत नहीं है. बस रोबोट और POCU को अपने गियर में कहीं टांग ले. इसका व्यास 110 मिलिमीटर है. इसलिए यह कॉम्बैट गियर और यूनिफॉर्म में किसी अन्य चीजों के साथ फंसता नहीं है.  यह किसी भी दिशा में गिरे लेकिन इसका कैमरा अपने पास फ्रंट फेसिंग हो जाता है. 

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Mole Robot की रेंज 90 मीटर यानी इसे चलाने वाला इतनी दूरी पर कहीं छिपकर इसे ऑपरेट कर सकता है. ऑपरेट करने के लिए POCU की मदद लेनी होती है. जिसमें लगी 7 इंच की टीएफटी स्क्रीन पर सबकुछ दिखता रहता है. रोबोट और POCU लगातार दो-दो घंटे तक काम कर सकते हैं. 

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Mole रोबोट को 8 मीटर की ऊंचाई से गिराने पर भी कुछ नहीं होता. अगर सामने से बिना फेंके रेकी करनी हो तो इसमें सेल्फीस्टिक जैसी स्टिक लगाकर इसे झाड़ियों, पेड़ों, दीवारों या खिड़कियों के ऊपर ले जाकर अंदर का नजारा देखा जा सकता है. यह रोबोट माइनस 20 डिग्री से लेकर 55 डिग्री सेल्सियस की गर्मी तक काम कर सकता है. 

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घुप अंधेरे में भी देख लेता है. क्योंकि इसमें इंफ्रारेड कैमरे लगे है. रोबोट और POCU दोनों की बैटरी चार्ज की जा सकती है. इस रोबोट की खास बात ये है कि अंधेरे में अगर इंसान दिख न रहा हो तो ये उसकी बातचीत भी सुन लेता है. इसमें रीयल टाइम ऑडियो ट्रांसमिट करने की क्षमता है. इसे गुरुग्राम स्थित द हाइटेक रोबोटिक्स सिस्टम्स कंपनी (The Hitech Robotics Systemz Ltd) ने भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के साथ मिलकर बनाया है. 

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इसका उपयोग आतंकरोधी अभियान, छोटे संघर्ष, मिलिट्री निगरानी, सर्विलांस, विजन स्काउट मिशन, सर्च एंड रेस्क्यू, रीयल टाइम इंटेलिजेंस, वीआईपी प्रोटेक्शन, स्पेशल ऑपरेशंस, दुश्मन की रेकी और हथियारों की जानकारी हासिल करना और गाड़ियों के नीचे की जांच करने में की जा सकती है. (सभी फोटोः ऋचीक मिश्रा/द हाइटेक रोबोटिक्स सिस्टम्स लिमिटेड)

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