जहां स्वामी विवेकानंद ने साधना की, वहीं प्रधानमंत्री मोदी साधनारत हैं. भारत के सुदूर दक्षिण तट कन्याकुमारी के विवेकानंद रॉक मेमोरियल रॉक पर प्रधानमंत्री का ध्यानमग्न हैं. प्रधानमंत्री कल फाइनल वोटिंग के दिन तक ध्यान में रहेंगे.
कन्याकुमारी में मौजूद इसी शिला पर बैठकर कभी जगत गुरु स्वामी विवेकानंद ने भी ध्यान लगाया था और अब यही शिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आकर्षण का केंद्र बन गई है.
माना जाता है कि स्वामी विवेकानंद के जीवन में समंदर के बीच उभरी इस शिला का महत्व वही था जो गौतम बुद्ध के लिए सारनाथ का था.
विवेकानंद रॉक मेमोरियल भारत के सबसे दक्षिणी सिरे कन्याकुमारी में एक स्मारक है, जो समंदर के तट से लगभग 500 मीटर दूर स्थित दो चट्टानों में से एक पर स्थित है. सुकून देने वाली समंदर की हवाएं और नाचती लहरों के बीच ये चट्टान बेहद खूबसूरत और रहस्यमय है.
प्रधानमंत्री की साधना कल शाम से शुरू हुई. पीएम ने 30 मई की शाम कन्याकुमारी भगवती अम्मन मंदिर में पूजा की और मां का आशीर्वाद लिया.
इस मंदिर का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है. माना जाता है कि देवी कन्याकुमारी की मूर्ति की स्थापना 3000 साल पहले भगवान परुशराम ने की थी.
45 घंटे की साधना के बाद प्रधानमंत्री रॉक मेमोरियल के पास बनी तिरुवल्लुवर प्रतिमा माल्यार्पण करेंगे.
ये तमिल कवि और दार्शनिक वल्लुवर की 41 मीटर ऊंची पत्थर की मूर्ति है, जिन्हें तिरुक्कुरल के लेखक तिरुवल्लुवर के नाम से जाना जाता है.
ये प्रतिमा 38 फीट की चौकी पर खड़ी है, जो पुण्य के 38 अध्यायों का प्रतिनिधित्व करती है.
बता दें कि चुनाव के बीच पीएम की साधना का कनेक्शन 2019 से शुरू हुआ. 2019 में भी फाइनल दौर की वोटिंग से पहले प्रधानमंत्री केदारनाथ में साधना की थी. रूद्र गुफा में पीएम ने 17 घंटे साधना का थी.