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25 हफ्ते की नाबालिग गर्भवती को बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत, जानें क्यों दी गर्भपात की इजाजत

नाबालिग लड़की का उसके बड़े भाई ने जबरन यौन उत्पीड़न किया था. इसकी जानकारी जब उसकी मां को लगी तो फिर उन्होंने बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कराया. इसके बाद लड़के को बाल सुधार केंद्र भेज दिया गया. लड़की का मेडिकल टेस्ट कराया गया तो पता चला की वह गर्भवती है और 24 हफ्ते की कानूनी सीमा गुजर जाने की वजह से नाबालिग की मां हाई कोर्ट पहुंची थी, जहां कोर्ट ने मानवीय आधार पर गर्भपात की इजाजत दे दी.

बॉम्बे हाई कोर्ट बॉम्बे हाई कोर्ट
aajtak.in
  • मुंबई,
  • 13 मई 2024,
  • अपडेटेड 11:59 PM IST

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक 12 वर्षीय नाबालिग लड़की को गर्भपात की मंजूरी दी है. वह 25 हफ्ते की गर्भवती थी लेकिन इस बात से अनजान थी. हाल ही में उसे पता चला कि वह गर्भवती है और तब गर्भपात की इजाजत के लिए उसकी मां ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. आमतौर पर गर्भपात के लिए 24 हफ्ते की कानूनी सीमा होती है लेकिन नाबालिग को गर्भावस्था की जानकारी होने तक करीब 25 हफ्ते गुजर चुके थे.

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वकील एशले कुशर की मदद से दायर याचिका में कहा गया था कि 2 मई को लड़की ने पेट दर्द की शिकायत की थी. जब उसकी जांच की गई तो एक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर को गर्भावस्था का संदेह हुआ. एक मेडिकल टेस्ट के बाद इसकी पुष्टि की गई. लड़की ने अपनी मां को बताया कि अक्टूबर से जब घर पर कोई नहीं होता था तो उसका बड़ा भाई उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाता था.

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मां को पता चला तो कराई एफआईआर

नाबालिग की मां ने याचिका में कहा था कि बेटे ने उसे यौन उत्पीड़न की बात घर में साझा करने को लेकर (नाबालिग को) गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी. मां की शिकायत पर उसी दिन बेटे के खिलाफ आईपीसी और पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई और उसे बाल सुधार केंद्र भेज दिया गया.

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मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया

3 मई को नाबालिग लड़की को पालघर स्थित बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया था. 4 मई को जेजे अस्पताल में पता चला कि वह "24 सप्ताह और 5 दिन" की गर्भवती है. पिछली सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने नाबालिग की मेडिकल जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन करने का निर्देश दिया था.

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माननीय आधार पर गर्भपात की इजाजत

रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से गर्भावस्था के मेडिकल टर्मिनिशेन की सिफारिश की गई थी और कोर्ट ने भी माना कि नाबालिग यौन उत्पीड़ित से पीड़ित रही है. रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि नाबालिग अब भी इस हालत में थी की उसका गर्भपात किया जा सकता था, जिसे कोर्ट ने भी मानवीय आधार पर स्वीकार किया. रिपोर्ट देखने के बाद जस्टिस संदीप मार्ने और डॉक्टर नीला गोखले की बेंच ने नाबालिग के गर्भपात की इजाजत दे दी.

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