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छावला गैंगरेप केस: SC ने तीनों आरोपियों को किया रिहा, HC ने सुनाई थी फांसी की सजा

यह मामला उत्तराखंड के पौड़ी में रहने वाली 19 साल की युवती के अपहरण के बाद दरिंदगी और हैवानियत का है. आरोपियों लड़की के साथ रेप किया था. इसके बाद उसकी आंखों में तेजाब तक डाल दिया था. रोंगटे खड़े कर देने वाली यह घटना साल 2012 की है.

Supreme Court (फाइल फोटो) Supreme Court (फाइल फोटो)
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 07 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 1:04 PM IST

2012 में दिल्ली के छावला इलाके में 19 साल की उतराखंड की रहने वाली लड़की से गैंगरेप और हत्या के दोषियों को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बरी कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा दोषियों को दी गई फांसी की सजा को पलट दिया. इस मामले में निचली अदालत और हाईकोर्ट ने तीनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी. 

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क्या है मामला?

यह मामला उत्तराखंड के पौड़ी में रहने वाली 19 साल की युवती के अपहरण के बाद दरिंदगी और हैवानियत का है. आरोपियों लड़की के साथ रेप किया था. इसके बाद उसकी आंखों में तेजाब तक डाल दिया था. रोंगटे खड़े कर देने वाली यह घटना साल 2012 की है. 

दरअसल 14 फरवरी 2012 को उत्तराखंड की 'निर्भया' अपने काम पर जाने के लिए घर से निकली थी. उस दिन वो देर शाम तक घर नहीं लौटी तो परिजन चिंतित हुए. घबराए परिजनों ने उसकी काफी तलाश की। लेकिन कोई सुराग नहीं लगा. बहुत खोजने के बाद इतनी सूचना जरूर मिली कि कुछ लोग एक लड़की को गाड़ी में डालकर दिल्ली से बाहर ले जाते हुए दिखाई दिए हैं. 

इस मामले में दोषियों ने लड़की के साथ रेप के साथ उसे असहनीय  यातना भी दी थी. लड़की को कार में इस्तेमाल होने वाले औजारों से पीटा गया, उसके शरीर को जगह जगह सिगरेट से दागा गया था और उसके चेहरे को तेजाब से जलाया गया था. इसके बाद अभियुक्त गिरफ्तार किए गए थे.

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दिल्ली की अदालत ने 19 साल की युवती से रेप और हत्या के दोषी ठहराए जाने के बाद मौत की सजा सुनाई थी. इस फैसले को सही मनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने भी फांसी की सजा पर मुहर लगा दी थी. इसके बाद दोषियों की तरफ से सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गयी थी. 

सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को किया बरी

सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस यू यू ललित की अध्यक्षता वाली बेंच ने सोमवार को इस मामले में फैसला सुनाते हुए तीनों दोषियों रवि कुमार, राहुल और विनोद को बरी कर दिया. 


 

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