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आज का दिनः पंजाब में कलह के बीच कैप्टन अमरिंदर और मोदी की मुलाक़ात के मायने क्या हैं?

आजतक रेडियो' के मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट 'आज का दिन' में आज हम बात करेंगे पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात के क्या मायने हैं? चर्चा कोरोना की बढ़ती R-वैल्यू को लेकर भी होगी. साथ ही इस पर भी बात होगी कि तालिबान भारत से क्या चाहता है?

बुधवार को हुई कैप्टन अमरिंदर और पीएम मोदी की मुलाकात (फोटो-PTI) बुधवार को हुई कैप्टन अमरिंदर और पीएम मोदी की मुलाकात (फोटो-PTI)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 12 अगस्त 2021,
  • अपडेटेड 10:17 AM IST

आजतक रेडियो' के मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट 'आज का दिन' में आज हम बात करेंगे पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात के क्या मायने हैं? साथ ही बात इस पर भी होगी कि सांसदों-विधायकों के खिलाफ केस खुलने से किन नेताओं की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं? चर्चा कोरोना की बढ़ती R-वैल्यू को लेकर भी होगी, क्योंकि कुछ राज्यों में R-वैल्यू बढ़ रही है और ये कितना बड़ा खतरा है?

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आजतक रेडियो पर हम रोज़ लाते हैं देश का पहला मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट ‘आज का दिन’, जहां आप हर सुबह अपने काम की शुरुआत करते हुए सुन सकते हैं आपके काम की ख़बरें और उन पर क्विक एनालिसिस. साथ ही, सुबह के अख़बारों की सुर्ख़ियां और आज की तारीख में जो घटा, उसका हिसाब किताब. आगे लिंक भी देंगे लेकिन पहले जान लीजिए कि आज के एपिसोड में हमारे पॉडकास्टर अमन गुप्ता किन ख़बरों पर बात कर रहे हैं.

1. भारत को लेकर क्या सोचता है तालिबान?

तालिबान का दायरा, अफगानिस्तान में लगातार बढ़ता ही जा रहा है, कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक तालिबान ने अब अफगानिस्तान के बदख्शां प्रान्त पर भी कब्जा कर लिया है. बदख्शां अफगानिस्तान का नौवां प्रांत है जिस पर अफगानिस्तान ने एक हफ्ते के भीतर कब्जा कर लेने का दावा किया है. इसके साथ ही एक दावा है कि अफगानिस्तान के पैंसठ फीसदी इलाकों पर तालिबान का कब्जा हो चुका है. दरअसल, पहले ग्रामीण इलाकों पर कब्‍जा करने के बाद  अब वे शहरों पर कब्‍जा करने लगे हैं. 

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अफगानिस्‍तान के राष्‍ट्रपति ने कहा था कि वह अपनी सेना को शहरों में बुला रहे हैं ताकि उन्‍हें तालिबान से बचाया जा सके लेकिन वही सैनिक अब तालिबान के सामने आत्‍मसमर्पण कर रहे हैं, अफगानिस्‍तान के बिगड़ते हालात के बाद भारत को अफगानिस्‍तान में सक्रिय एकमात्र कॉन्सुलेट यानी मजार-ए-शरीफ दूतावास से भी अपने स्‍टाफ को निकालना पड़ा है.

ऐसे में सवाल ये है कि तालिबान का ये उभार कितना हमारे लिए चिंता का सबब है, तालिबानी नेता क्या सोचते हैं, भारत से सम्बन्धों के लिहाज़ से, और भारत सरकार से उनके बातचीत की शर्त क्या है, ये जानने के लिए हमने बात किया इंडिया टुडे टीवी की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन से जिन्होंने कल ही तालिबान के ओर से शांति बहाली के वार्ताकारों में शामिल और स्पोक्सपर्सन मोहम्मद सुहैल शाहीन से बात की है. गीता क्या कहना था उनका भारत से बातचीत को लेकर, एक पेज पर क्यों नहीं आ पा रहे वे भारत के साथ?

2. कैप्टन-मोदी की मुलाकात के मायने क्या हैं?

पंजाब की रार थमने का नाम नहीं ले रही. कहा गया कि उसी के आलोक में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली कल सोनिया गांधी से मुलाकात की और मुलाकत में एक तरफ जहां विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर चर्चा करी,वहीं कैप्टन ने सिद्धू की भी शिकायत लगाई. सिद्धू के बयान और ट्वीट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धू अपनी ही सरकार पर उंगली उठा कर विपक्ष को मौका दे रहे हैं. सबूत के तौर पर कैप्टन, सिद्धू के बयानों के ट्वीट और प्रिंटआउट भी लेकर आए थे. उन्होंने सोनिया गांधी को सबकुछ दिखाया और कहा कि विरोधियों पर फोकस करने के बजाय सिद्धू का ज़्यादा फोकस अपनी सरकार की आलोचना करने में है.

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कहा जा रहा है कि इस पर सोनिया गाँधी ने चिंता जताया और पंजाब इंचार्ज हरीश रावत को हस्तक्षेप करने के लिए कहा है.अमरिंदर सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया से भी मुलाकात कर राज्य में वैक्सीन आपूर्ति बढ़ाने की अपील की.जिसके बाद अब पंजाब की वैक्सीन सप्लाई को 25 प्रतिशत तक बढ़ाने का ऐलान किया गया है.

इसी के साथ आज अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी से भी मुलाकात की और कृषि कानूनों रद्द करने की मांग भी की अब देखना दिलचस्प होगा कि सिद्धू और कैप्टन के बीच अब कहानी में कौन सा मोड़ आता है? सिद्धू को अब तो पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया, फिर कहाँ दिक्कत आ रही है? क्या सिद्धू के लेवल पर तालमेल नहीं बैठ पा रहा या फिर इसमें कैप्टन की भी भूमिका है, मामले को यथास्थिति बहाल रखने में?

3. कोरोना की बढ़ती R-वैल्यू कितना बड़ा खतरा?

कोरोना को लेकर ये तो साफ ही हो गया है कि जब भी लगे सिचुएशन कंट्रोल में आ रही है तभी कुछ ऐसा होता है जब पूरे उम्मीदों पर पानी फिर जाता है. अब देखिए दूसरी लहर कंट्रोल में दिखाई दे रहा है, केसेस कम आ रहे हैं लेकिन साथ ही एक फैक्टर है जो पहले तो सिर्फ कुछ एक राज्यों के लिए चिंता का सबब था अब इसकी लिस्ट में और भी कई राज्य जुड़ते जा रहे हैं. वो फैक्टर है R वैल्यू. कोरोना की आर-वैल्यू से यह पता चलता है कि एस संक्रमित व्यक्ति कितनों को संक्रमित कर रहा है. ये वैल्यू जितनी कम हो उतना अच्छा रहता है. लेकिन अभी इस वैल्यू में कहीं भी पॉजिटिव साइन नहीं दिख रहा है. 

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दरअसल स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 5 राज्य हिमाचल प्रदेश, पंजाब, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर  प्रदेश जहां आर-वैल्यू 1 से ज्यादा हो गई है. जो चिंता की बात है. इतना ही नहीं, देश के 37 जिलों में कोरोना के मामलों में लगातार बढ़ोतरी ही देखी जा रही है. नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने बताया कि देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में डेल्टा प्लस वैरिएंट के वजह से नए मामले बढ़ रहे हैं. 

तीसरी लहर की आशंका के बीच इस वैल्यू का बढ़ना  हर एक एक्सपर्ट्स की चिंता है. तो हमने सोचा क्यों न ये जाना जाए की इन 5 राज्यों के अलावा और कौन से राज्यों में आर वैल्यू की वजह से हालात बुरी और इसके पीछे की क्या वजहें है. इसके लिए  इंडिया टुडे के डेटा इंटेलिजेंस यूनिट के मेंबर दीपू राय से बात की है और उनसे सबसे पहले यही सवाल पूछा की 5 राज्यों के साथ साथ और कौन से राज्य हैं जहां आर वैल्यू बढ़ रहा है और ये कितनी चिंता की बात है?

4. केस खुलने से किन नेताओं की बढ़ सकतीं हैं मुश्किलें?

अक्सर आपने दागी सांसद और विधायक के बारे में चर्चा सुनी होगी और इसमें अक्सर इसमें बातें होती है इनके क्रिमिनल रिकॉर्ड्स की. तो अब इनके बारे में नई जानकारी ये है की अब इनके सारे रिकॉर्ड्स और क्राइम की पूरी कुंडली नए सिरे से खंगाली जाएगी. और ये आदेश दिया है सुप्रीम कोर्ट ने. आपराधिक मामलों में सजा पाने वाले सांसदों और विधायकों को हमेशा के लिए चुनाव लड़ने से रोकने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बात कही. 

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कोर्ट ने सितंबर 2020 के बाद सांसदों-विधायकों के वापस लिए गए केस दोबारा खोलने को भी कहा है. सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने यह पिटीशन दाखिल की थी इसमें चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विनीत सरन शामिल थे. वहीं न्यायमित्र विजय हंसारिया की रिपोर्ट में बताया गया कि राज्य सरकारें जैसे उत्तराखंड कर्नाटक महाराष्ट्र आपराधिक रिकॉर्ड वाले विधायकों पर चले मामलों को वापस लेना चाहती हैं.

लेकिन ये पिक्चर तो क्लियर है की सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस सिलसिले में राज्य सरकारों और विधायकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. लल्लनटॉप के साथी डेविड जॉन ने इस स्टोरी की गहराई तक छानबीन की है और पता लगाया है की किन नेताओं के खिलाफ बंद मुकदमे फिर से खुल सकते हैं और कौन से वो सबसे चर्चित केसेस है जिसके खुलने से इनकी मुसीबतें बढ़ सकती हैं?

12 अगस्त 2021 का 'आज का दिन' सुनने के लिए यहां क्लिक करें.

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