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आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर कई बड़े आरोप लगाए हैं. उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड और इसके जरिए भारतीय जनता पार्टी को मिले चंदे पर सवाल खड़ा किया है. संजय ने कहा कि सुनियोजित तरीके से मोदी सरकार ने कई सालों में इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए पर्दे के पीछे से घोटाला किया. सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद है, जिनके आदेश से इस घोटाले का सारा डेटा सामने आ गया. अब इस घोटाले का खुलासा एक चेन में होगा. 33 कंपनियां हैं, जिन्हें पिछले 7 सालों में एक लाख करोड़ का घाटा हुआ है और उन्होंने बीजेपी को 450 करोड़ का चंदा दिया है.
उन्होंने कहा कि17 कंपनियां ऐसी हैं, जिन्होंने जीरो टैक्स दिया है या उनको टैक्स में राहत मिल गई है. 6 कंपनियां ऐसी हैं, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी को 600 करोड रुपए का चंदा दिया है. एक कंपनी ऐसी है, जिसने अपने मुनाफे से तीन गुना ज्यादा चंदा दिया है. तीन कंपनियां ऐसी हैं, जिन्होंने 28 करोड़ रुपए का चंदा दिया है और जीरो टैक्स भुगतान किया है. एक कंपनी ऐसी भी है, जिसने अपने मुनाफे का 93 गुना चंदा दिया है.
'भारती एयरटेल को मिली छूट एक रहस्य...'
संजय सिंह ने कहा कि भारती एयरटेल ने 200 करोड़ का चंदा बीजेपी को दिया है. 2017 से 2023 तक इस कंपनी को 77 हजार करोड़ रुपए का घाटा हुआ. इस कंपनी को 8200 करोड़ रुपए के टैक्स की छूट मिली है. कुछ छूट इसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिली है लेकिन बाकी छूट कैसे मिली यह एक रहस्य है.
संजय सिंह ने कई कंपनियों के नाम लेकर उठाए सवाल
'बीजेपी को मुनाफे से ज्यादा चंदा...'
संजय सिंह ने कहा कि कितनी दरिया दिली दिखाई गई है, यह कंपनियां किसकी हैं, इनके बारे में ईडी जानकारी निकाले. आज ही सबके घर छापे पड़ जाएंगे. 6 कंपनियां ऐसी हैं, जिन्होंने अपने मुनाफे से ज्यादा चंदा बीजेपी को दे दिया है. क्विक सप्लाई चेन लिमिटेड ने 410 करोड़ का इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदा और 375 करोड़ रुपए बीजेपी को दिए. इस कंपनी को 144 करोड़ रुपए का फायदा हुआ है.
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'इलेक्टोरल बॉन्ड का बड़ा कांड...'
AAP सांसद ने कहा कि अब कहां है ईडी और सीबीआई? फर्जी कंपनियां बनाकर हजारों करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है. 2017 के पहले इस देश के अंदर चुनाव आयोग का एक कानून था, जिसमें ये प्रावधान था कि 3 सालों में किसी कंपनी को हुए मुनाफे का सिर्फ 7.5 प्रतिशत ही चंदा दे सकते हैं. नियम के मुताबिक घाटे की कंपनी चंदा नहीं दे सकती थी. मतलब साफ है कि शेल कंपनियां बनाकर आप किसी पार्टी को चंदा नहीं दे सकते थे. अब यहां मोदी का खेल 'इलेक्टोरल बॉन्ड का बड़ा कांड' शुरू हुआ.
संजय सिंह ने बताया कि साल 2017 में मोदी सरकार ने इस नियम को बदल दिया. चुनाव आयोग ने इसका विरोध भी किया था. आयोग ने कहा था कि इससे शेल कंपनियां बनाकर राजनीतिक दलों को चंदा दिए जाने का रास्ता खुल जाएगा. उन्होंने कहा कि नियमों में बदलाव करके बड़ा घोटाला किया गया है. 2017 के पहले यह नहीं हो सकता था लेकिन इलेक्टोरल बॉन्ड का कांड करने के लिए नियमों में बदलाव किया. बीजेपी देश की महाभ्रष्ट पार्टी है. आजादी के बाद इस धरती पर सबसे भ्रष्ट पार्टी है भारतीय जनता पार्टी है.
संजय सिंह ने मांग की है कि चंदा देने वाली इन कंपनियों से पूछताछ हो और बीजेपी नेताओं को गिरफ्तार किया जाए. नरेंद्र मोदी ने कहा था कि तीन लाख शेल कंपनियों को बंद कर दिया गया, तो बताइए कि आखिर यह कंपनियां कौन सी हैं, जो कागजों पर बनी हैं और आपको चंदा दे दिया है. इन फर्जी कंपनियों से आपको चंदा कैसे मिला मोदी जी.
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'बीजेपी के मामलों में ED, CBI चुप क्यों?'
इलेक्टोरल बॉन्ड डाटा के हवाले से संजय सिंह ने आरोप लगाया कि जिन कंपनियों को घाटा हुआ है, उन्होंने बीजेपी को चंदा दिया और उन्हें टैक्स में माफी मिली. शेल कंपनी बनाकर बीजेपी को चंदा दिया गया. इलेक्टोरल बॉन्ड से चंदा देने के लिए 2017 में उस नीति में बदलाव किया गया, जिसमें घाटे वाली कंपनियों से चंदा लेने पर रोक थी. चुनाव आयोग की आपत्ति के बाद भी मोदी सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड का कांड किया.
संजय सिंह एक और सवाल उठाते हुए कहा कि जिस कंपनी को जीरो प्रॉफिट हुआ है, जीरो टैक्स दे रहा है या घाटे में चल रही है, उस कंपनी में क्या यह मनी ट्रेल नहीं है? ईडी और सीबीआई अब कार्यवाही क्यों नहीं कर रही हैं. विपक्षी दलों के मामले में ईडी और सीबीआई गामा पहलवान बन जाती है लेकिन बीजेपी के मामलों में चुप क्यों हैं. क्या यह एजेंसियां तमाशा देखने के लिए बैठी हैं? बीजेपी के इशारे पर ये एजेंसियां गजनी मोड में चली जाती हैं.