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'अधिकारी सुनते नहीं, हमारे हाथ-पैर बांधकर...', कोचिंग में मौतों पर राज्यसभा में बोले AAP सांसद संजय सिंह

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी कर रहे तीन छात्रों की मौत को लेकर राज्यसभा में चर्चा के दौरान केंद्र पर जमकर हमला बोला. संजय सिंह ने कहा कि अधिकारी नहीं सुनते हैं. उनसे मीटिंग कर नालों की सफाई कराने के लिए कहा गया था.

संजय सिंह (फाइल फोटो) संजय सिंह (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 5:40 PM IST

दिल्ली के ओल्ड राजेंद्रनगर इलाके के राव आईएएस कोचिंग सेंटर की बेसमेंट में पानी भरने से यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों की मौत का मुद्दा संसद में उठा. राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सांसद डॉक्टर सुधांशु त्रिवेदी, आम आदमी पार्टी की सांसद स्वाति मालीवाल ने इसे लेकर नियम 267 के तहत चर्चा का नोटिस दिया था. उच्च सदन में नियम 267 के तहत चर्चा की अनुमति सभापति जगदीप धनखड़ ने नहीं दी. उन्होंने सदन में नियम 176 के तहत चर्चा की अनुमति दी. बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने चर्चा की शुरुआत करते हुए आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार को घेरा और कहा कि ये आपराधिक लापरवाही है.

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आम आमदी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सुधांशु त्रिवेदी के एक-एक आरोप के जवाब में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली सरकार की उपलब्धियां गिनाईं. उन्होंने ओल्ड राजेंद्रनगर के हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि सौरभ भारद्वाज और आतिशी ने अधिकारियों के साथ मीटिंग कर नाले की सफाई कराने के लिए कहा था. इस मीटिंग की वीडियो भी मैं सदन में रखूंगा, आप इसकी जांच कराइए. संजय सिंह ने कहा कि उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए जिन्होंने मंत्रियों के कहने पर भी कार्रवाई नहीं की.

उन्होंने दिल्ली में ट्रांसफर-पोस्टिंग विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार दिल्ली की चुनी हुई सरकार को मिलना चाहिए. संजय सिंह ने कहा कि इस आदेश को इसी सदन में विधेयक लाकर पलट दिया गया. उन्होंने कहा कि आपने हमारे हाथ-पैर बांध दिए और स्विमिंग पूल में तैरने के लिए फेंक दिया. अब डंडे से मार-मारकर कह रहे हैं कि नंबर बढ़ाओ, नंबर बढ़ाओ. दिल्ली की सरकार को काम नहीं करने दिया जा रहा है.

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आम आदमी पार्टी के सांसद ने कहा कि ये कोचिंग सेंटर और इनके बेसमेंट में लाइब्रेरी आज नहीं चल रही है. ये पिछले 15 से 20 साल से चल रहे हैं और तब एमसीडी में बीजेपी थी. इन्होंने (बीजेपी ने) पिछले 10-15, 15-20 साल में जो पाप किए हैं, उनी देन है. उन्होंने आरोप लगाया कि एलजी और अधिकारी ये प्रयास करते हैं कि दिल्ली की जनता का जीवन कैसे नर्क बनाया जाए. हर काम में रोड़े अटकाए जा रहे हैं. संजय सिंह ने कहा कि दिल्ली के लोगों का अपराध क्या है, यही कि उन्होंने अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री बना दिया.

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उन्होंने अरविंद केजरीवाल की बीमारी का मजाक बनाने के लिए बीजेपी सांसदों की आलोचना की और कहा कि ये मौत पर ताली बजाते हैं. गौरतलब है कि सुधांशु त्रिवेदी ने अरविंद केजरीवाल के जेल में कम होते वजन को लेकर दिल्ली सरकार के मंत्रियों के बयान का उल्लेख किया और कहा कि आपका वजन नहीं, किरदार गिर रहा है. उन्होंने दिल्ली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सैकड़ो करोड़ से शीश महल बन सकता है लेकिन सीवर की सफाई नहीं हुई. सुधांशु त्रिवेदी ने  वक्फ के बजट से लेकर प्रचार तक, कांग्रेस की सरकार के मुकाबले आम आदमी पार्टी की सरकार में हुए इजाफे गिनाए और केजरीवाल सरकार को कठघरे में खड़ा किया.

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यूपीएससी छात्रों की मौत नहीं, ये हत्या है- स्वाति मालीवाल

आम आदमी पार्टी की सांसद स्वाति मालिवाल ने यूपीएससी छात्रों की मौत को हत्या बताते हुए कहा कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है. क्या किसी की कोई जवाबदेही नहीं है. उन्होंने कहा कि राजेंद्रनगर के हर दूसरे घर में इस तरह के सेंटर खुले हुए हैं. किसी का घर बन रहा होता है और थोड़ा सा ज्यादा हो जाता है तो तुरंत एमसीडी वाले आ जाते हैं, हल्ला करने लगते हैं और इतने अवैध सेंटर्स खुलते जा रहे हैं और किसी को पता तक नहीं. स्वाति मालीवाल ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि कोचिंग सेंटर के तीन लोगों को पकड़ा गया है लेकिन जो चुने हुए प्रतिनिधि हैं और अधिकारी हैं, इनका क्या. उन्होंने मृतक छात्रों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने को दिल्ली सरकार की जिम्मेदारी बताया.

खट्टर बोले- तय करनी होगी घटना की जिम्मेवारी

राज्यसभा में इस मुद्दे पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए आवासन और शहरी विकास मंत्री मनोहरलाल खट्टर ने कहा कि इस घटना की जिम्मेवारी तय करनी होगी. उन्होंने कहा कि कई घटनाएं सरकार की कमियों का कारण होती हैं. ये ऐसी ही घटना है. खट्टर ने कहा कि फायर डिपार्टमेंट ने NOC दिया था लेकिन वो स्टोरेज के लिए था, कोचिंग सेंटर के तौर पर नहीं.

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