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परिवार ने कहा भारत में रहना, अफगानिस्तान में हमारा कोई ठिकाना नहीं: ओडिशा में अफगानी छात्र का दर्द

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद यहां के नागरिकों का भविष्य अधर में जाता नजर आ रहा है. दुनिया के दूसरे देशों में पढ़ाई, नौकरी कर रहे लोगों के सामने सबसे बड़ा संकट वतन वापसी का है. उन्हें अपने मुल्क में भविष्य नजर नहीं आ रहा है. ओडिशा में पढ़ रहे अफगानी छात्र का दर्द भी कुछ ऐसा ही है.

ओडिशा में मौजूद अफगानी छात्र. ओडिशा में मौजूद अफगानी छात्र.
मोहम्मद सूफ़ियान
  • भुवनेश्वर,
  • 18 अगस्त 2021,
  • अपडेटेड 7:45 AM IST
  • ओडिशा में पढ़ रहे अफगानी छात्रों का छलका दर्द
  • संयुक्त राष्ट्र से मदद की अपील की
  • कहा- हम चाहते हैं भारत सरकार हमारा वीजा बढ़ा दे

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद यहां के नागरिकों का भविष्य अधर में जाता नजर आ रहा है. दुनिया के दूसरे देशों में पढ़ाई, नौकरी कर रहे लोगों के सामने सबसे बड़ा संकट वतन वापसी का है. उन्हें अपने मुल्क में भविष्य नजर नहीं आ रहा है. ओडिशा में पढ़ रहे अफगानी छात्र का दर्द भी कुछ ऐसा ही है.

उसका कहना है कि, ''मैं अंदर से टूट गया हूं, मेरी जमीन पर अंधेरे शासन ने कब्जा कर लिया है, परिवार ने कहा भारत में रहना, अफगानिस्तान में हमारा रहने का कोई ठिकाना नहीं है.'' अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के एक छात्र ने कहा कि, मैं अपने परिवार के सदस्यों से प्रतिदिन बात करता हूं. मेरे पिता ने बताया कि तालिबानी आतंक के कारण अफगान की स्थित बहुत ही गंभीर हो चुकी है. यहां लोग पूरी तरह से डरे हुए हैं और अपनी जान की बचाने के लिए ठिकाना ढूंढ रहे हैं. तुम भारत में सुरक्षित हो और भारत में ही रहना, अब अफगान में हमारा कोई निश्चित ठिकाना नहीं है.

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ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित किट (KIIT) विश्वविद्यालय में अफगानिस्तान के दर्जनों छात्र उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. हालांकि कोरोना महामारी की वजह से संस्थान द्वारा संचालित छात्रावास में रहकर वे ऑनलाइन क्लास करते हैं. आजतक संवाददाता मोहम्मद सूफियान से बातचीत में काबुल निवासी किट विश्वविद्यालय में बीटेक के छात्र अर्श ताहेरी ने बताया है कि तालिबान के आंतक के कारण अफगानिस्तान की राजधानी काबुल समेत पूरे प्रदेश में अफरातफरी का माहौल बना हुआ है.

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उनका कहना है कि तालिबानी आतंकियों ने कई शहरों में लोगों का खून बहाना शुरू कर दिया है. स्थानीय निवासियों को गोलियों की बौछार के बीच दूसरे देशों में पलायन कर पड़ रहा है. वहां सभी लोग डर के साये में जिंदगी बिता रहे हैं. इन सभी घटनाओं को देखने के बाद मेरे दिल घर वापस जाने को करता है लेकिन मेरे पिता मुझे वापस अफगानिस्तान आने से मना करते हैं. वो कहते हैं तुम भारत में सुरक्षित हो और भारत में ही रहना, अब अगफान में हमारा कोई सुनिश्चित ठिकाना नहीं है. हम सब जान को हथेली पर लेकर एक स्थान से दूसरे पर आना-जाना कर रहे हैं.

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उसने कहा कि तालिबान का कानून अफगान वासियों के लिए जेल के बराबर होता है. इस कानून के तहत पुरुषों के साथ महिलाओं पर भी कठोर नियम लागू होता है. जिसका अफगान निवासी हमेशा विरोध करते रहे हैं. मैं पढ़ाई पूरा कर अपने देश के लिए कुछ करना चाहता था लेकिन अब लगता है कि मेरा कोई वजूद नहीं है. मेरा देश मेरा परिवार अब दूसरों के अधीन हो चुका है.

वहीं, एक अन्य छात्र मोहमद शरीफ ने कहा कि, मैं अपने परिवार से लगातार फोन पर बात करता हूं. मौजूदा समय में वहां फोन और इंटरनेट की सेवा उपलब्ध है लेकिन दुर्भाग्य से पता नहीं है कि कब तक हम अपने परिवार के सदस्यों से बात कर सकेंगे. खबरों के मुताबिक अफगानिस्तान के कई नेता जनता को परेशानियों में छोड़ कर देश से फरार हो चुके हैं. 

शरीफ ने आगे कहा कि,  तालिबान के सामने हमारे सैनिकों ने हथियार डाल दिया है. मुझे कहते हुए दुख होता है कि हमारा राष्ट्रीय झंडा किसी के कब्जे में है. हमारी धरती पर आतंकी राज कर रहे हैं. हमारा परिवार दर-दर की ठोकरे खा रहा है. अब अफगान वासियों का कोई भविष्य नहीं दिखता है. हम भारत सरकार से अनुरोध करेंगे कि हमारी पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद हमारे वीजा को बढ़ाने की स्वीकृति प्रदान करें. साथ ही यूएन संगठन से अनुरोध है कि अफगानिस्तान के आतंकी तालिबान से मुक्त करायें.

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कीट विश्वविद्यालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक वर्तमान में समय में अफगानिस्तान से 518 छात्र विश्वविद्यालय परिसर में हैं जिसमें विश्वविद्यालय में 290 छात्र उच्च शिक्षा ग्रहण कर पास कर चुके हैं.

 

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