Advertisement

'इनके एक नेता सोनीपत के खेत में गए, कैमरामैनों से पूछ रहे थे कि...', शिवराज का राहुल गांधी पर तंज

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को संसद में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा का जवाब देते हुए नाम लिए बिना राहुल गांधी को भी निशाने पर रखा.

कृषि मंत्री श‍िवराज स‍िंह चौहान कृषि मंत्री श‍िवराज स‍िंह चौहान
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 05 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 4:11 PM IST

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को राज्यसभा में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के कामकाज पर हुई चर्चा का जवाब जारी रखा. शुक्रवार को शिवराज का जवाब प्राइवेट मेंबर्स बिजनेस की वजह से बीच में ही रोकना पड़ा था. शिवराज ने अपने संबोधन की शुरुआत से ही कांग्रेस और उसके नेताओं को निशाने पर रखा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने किसानों के लिए प्रत्यक्ष सहायता की बात तो की, लेकिन ऐसी योजना नहीं बनाई. पीएम मोदी ने समझा. ये राशि भले ही छह हजार रुपये हो, सीमांत और छोटे किसानों के लिए बड़े काम की  है. इस छोटी राशि के कारण किसान का सम्मान बढ़ा है, वो स्वावलंबी हुआ है, विकास को गति मिली है. ये किसान का सम्मान देख नहीं सकते.

Advertisement

उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देकर कहा कि सम्मान निधि ने किसान की जोखिम लेने की क्षमता को भी बढ़ाया है. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस की सरकार में ये सामने दिग्विजय सिंह जी बैठे हैं, इनके हाथ 24 किसानों के खून से सने हैं. उन्होंने 1986 के बिहार, 1988 के दिल्ली और मेरठ, मुल्ताई, नंदीग्राम में किसानों पर गोली चलाए जाने की घटनाओं और इन गोलीकांड में मारे गए किसानों के आंकड़े भी गिनाए. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान जब ये आंकड़े गिना रहे थे, विपक्षी कांग्रेस के सदस्यों ने राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया.

कृषि मंत्री शिवराज ने पंडित नेहरू से लेकर कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकारों के प्रधानमंत्रियों के 15 अगस्त के भाषण में किसानों के जिक्र का डेटा पेश किया और ये भी बताया कि नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अपने किस संबोधन में कितनी बार किसान कहा. उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कहा कि इनके एक नेता एक यात्रा पर निकले थे. वे सोनीपत गए, खेत में कैमरे लगे थे. कहां फोकस करना है, ये पहले से तय था. जब खेत में गए तब कैमरामैनों से पूछ रहे हैं कि कहां खड़ा होना है, कैसे क्या करना है. शिवराज ने कहा कि किसान कल्याण ड्रामे से नहीं होगा. हमारे पास वीडियो है. ये किसान की बात करते हैं. मैं किसान का बेटा हूं और खुद खेती करता हूं.

Advertisement

यह भी पढ़ें: कागज लेकर आइए, सहारा का पैसा देने को तैयार, लोकसभा में बोलीं निर्मला सीतारमण

इस पर सभापति धनखड़ ने उनसे इसे ऑथेंटिकेट करने के लिए कहा. शिवराज ने ऑथेंटिकेट करने के लिए एक पेन ड्राइव सदन पटल पर रखी. उन्होंने आगे कहा कि इनके एक नेता थे, जब सुना कि लाल मिर्च की कीमत हरी मिर्च से ज्यादा है तो वे कहने लगे कि लाल मिर्च की खेती क्यों नहीं करते. शिवराज ने कहा कि मुझसे किसानों ने शिकायत की थी कि जिसने गन्ना बोया था, उसको गेहूं का मुआवजा दे दिया. इस व्यवस्था को ठीक करने की जरूरत है. इसके लिए सरकार डिजिटल कृषि मिशन शुरू करने जा रही है. इसमें नेविगेशन का उपयोग किया जाएगा.

यह भी पढ़ें: 'भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में...', हेमा मालिनी ने संसद में राष्ट्रीय पक्षी मोर की घटती संख्या को लेकर पूछा सवाल

उन्होंने कहा कि हम ये प्रयत्न कर रहे हैं कि छोटा किसान छोटे जोत आकार में कैसे लाभ कमाए. एक मॉडल फॉर्म बना रहे हैं कि एक हेक्टेयर में भी कैसे फायदे की खेती हो. शिवराज ने कहा कि फर्टिलाइजर का उपयोग हमारे अन्न के भंडार भरने के लिए वरदान साबित हुआ. इसका उपयोग अंधाधुंध हुआ जिसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा. उन्होंने कहा कि फर्टिलाइजर का उपयोग जरूरी है लेकिन एक सीमा से अधिक उपयोग फसल और भूमि का स्वास्थ्य भी खराब कर रहा है. जमीन की उर्वरा शक्ति कम हो रही है, मित्र कीट मारे जा रहे हैं.

Advertisement

कृषि में हमें बढ़ाना है निर्यात

कृषि मंत्री ने कहा कि केंचुए सबसे बड़े मित्र हुआ करते थे. ये समाप्त हो गए. उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि उत्पादन बनाए रखते हुए प्राकृतिक खेती के बारे में सोचना पड़ेगा. सरकार प्राकृति खेती मिशन प्रारंभ कर रही है. उन्होंने कहा कि एक करोड़ किसानों को जागरूक करेंगे. साढ़े सात लाख हेक्टेयर जमीन में प्राकृतिक खेती शुरू करेंगे. हम पूरे में नहीं, कम में शुरू करेंगे देखें. वैज्ञानिक भी इसकी तारीफ कर रहे हैं. शिवराज ने कहा कि कृषि में हमें निर्यात को बढ़ाना है. उन्होंने निर्यात के आंकड़े भी गिनाए और कहा कि चावल, मसाले, मूंगफली,  चीनी का निर्यात बढ़ा है. अपार संभावनाएं हैं निर्यात की, सरकार उनका दोहन करेगी. 

यह भी पढ़ें: 'ये सामने दिग्विजय सिंहजी बैठे हैं, किसानों के खून से इनके हाथ रंगे हैं', संसद में बोले शिवराज

उन्होंने '... सिर्फ हंगामा खड़ा करना हमारा मकसद नहीं' पंक्तियों के साथ कहा कि अगले पांच साल में हमारा लक्ष्य क्लाइमेट चेंज के इस दौर में फसलों की किस्में तैयार करनी पड़ेंगी. कृषि मंत्री ने कहा कि 109 नई किस्मों को पीएम किसानों को समर्पित करने वाले हैं. जल, जमीन, जलवायु, जंगल, जानवर, जनता... सबको एकसूत्र में बांधना पड़ेगा. इस भाव को किसी ने जाना तो बीजेपी और नरेंद्र मोदी की सरकार ने जाना. उन्होंने कहा कि पांच साल में 18 हजार करोड़ की लागत से बागवानी क्लस्टर बनाएंगे, किसानों की मंडी तक पहुंच सुगम बनाने के लिए 1500 मंडियों को एकीकृत किया जाएगा. तिलहन मिशन शुरू करने जा रहे हैं, कीटनाशक संशोधन अधिनियम के तहत संशोधन करने जा रहे हैं, 50 हजार गांवों को जलवायु अनुकूल बनाने जा रहे हैं.

Advertisement

किसान संगठनों से भी करेंगे बात

शिवराज ने शायराना अंदाज में कहा- 'जानता हूं कि समय की सीमा होती है, मगर मैं क्या करूं, मेरी तो हर सांस किसानों के लिए चलती है.' उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दे पर राजनीति न करें. हमने अलग-अलग राज्यों के कृषि मंत्रियों को बुलाया और समस्याओं पर चर्चा कर समाधान का प्रयास किया. कृषि में समस्याएं हैं, उनका समाधान भी है. हम किसानों के साथ ही किसान संगठनों से भी बात करेंगे और संवाद से समाधान की तरफ बढ़ेंगे. कृषि और किसान के कल्याण में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. इस पर सभापति ने कहा कि मंत्रीजी, किसान के दिल में घुस जाइए और हर समस्या का समाधान हो. इससे बड़ी कोई प्राथमिकता हो नहीं सकती. देश के विकास में भी सहायता मिलेगी.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement