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AK-203 in DefExpo2022: जानिए भारत में बनने वाली इस असॉल्ट राइफल की खासियतें, युद्ध में सेना के कितने काम की

एशिया की सबसे बड़ी रक्षा प्रदर्शनी डिफेंस एक्सपो 2022 में भारतीय असॉल्ट राइफल AK-203 की धमक गूंज रही है. पहली बार इस राइफल को प्रदर्शित किया गया है. आइए जानते हैं कि इस राइफल को लेकर इतनी चर्चा क्यों है? यह राइफल युद्ध में सेना के कितने काम आएगी? इसकी क्या खासियत, ताकत और रेंज है?

DefExpo2022 में रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने लगाई है AK-203 असॉल्ट राइफल की प्रदर्शनी. DefExpo2022 में रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने लगाई है AK-203 असॉल्ट राइफल की प्रदर्शनी.
ऋचीक मिश्रा
  • गांधीनगर,
  • 18 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 11:18 AM IST

रूस की कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट (Rosoboronexport) डिफेंस एक्सपो 2022 में भारतीय सरकार और संबंधित अधिकारियों से बात करेगी. ताकि इस असॉल्ट राइफल का उत्पादन उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में स्थित कोर्वा ऑर्डेनेंस फैक्टरी में शुरू हो सके. रोसोबोरोनएक्सपोर्ट रूस की रक्षा कंपनी रोज़टेक स्टेट कॉर्पोरेशन की सब्सिडियरी है. भारत और रूस मिलकर इस असॉल्ट राइफल का प्रोडक्शन अमेठी की आयुध फैक्टरी में करने जा रहे हैं. 

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एके-203 असॉल्ट राइफल (AK-203 Assault Rifle) के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश के अमेठी में अगले दस सालों तक 6.01 लाख राइफलों का उत्पादन होगा. इसके पहले रूस से 70 हजार से 1 लाख राइफल्स, उसके हिस्से और टेक्नोलॉजी भारत लाई जाएगी. फैक्ट्री में काम शुरू होने के बाद करी 32 महीने बाद सेना को यह राइफल मिलेगी. 

एके-203 असॉल्ट राइफल एके सीरीज की अत्याधुनिक घातक राइफल है. जो कंपनी इसे बनाने जा रही है उसका नाम है इंडो-रसिया राइफल्स प्रा. लिमि. (IRRPL). इस राइफल के आने से इंडियन आर्मी और अन्य अर्द्धसैनिक बल इंसास (INSAS) राइफलों का उपयोग बंद कर देंगे. भारतीय सेना को 7.50 लाख AK-203 राइफल्स चाहिए. इस राइफल का पहला प्रोटोटाइप साल 2007 में AK-200 के नाम से आया था.  

साल 2013 में रैटनिक प्रोग्राम के तहत एके-203 में कुछ बदलाव करके उसे नाम दिया गया एके-103-3. फिर साल 2019 में एके-300 और एके-100एम राइफल्स आईं, जो इसी परिवार की थीं. लेकिन साल 2019 में इसे अंतिम तौर पर AK-203 नाम दिया गया. एके-203 कैसे इंसास से ज्यादा घातक और चलाने में आसान है. 

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एके-203 राइफल इंसास से छोटी, हल्की और घातक है. इंसास बिना मैगजीन और बेयोनेट के भी 4.15 KG वजनी है. AK-203 का वजन 3.8 KG है. इंसास की लंबाई 960 मिमी है. एके-203 705 मिमी की है. वजन और लंबाई कम होने पर राइफल को लंबे समय तक ढोया जा सकता है. इससे जवान थकते कम हैं. हैंडलिंग आसान होती है. 

एके-203 में 7.62x39mm की बुलेट्स लगती हैं, जो ज्यादा घातक होती हैं. इंसास में 5.56x45mm की गोलियां लगती हैं. इंसास की रेंज 400 मीटर है, जबकि AK-203 की रेंज 800 मीटर है. यानी काफी दूर से दुश्मन को ढेर कर सकते हैं. उसे मारने के लिए नजदीक जाकर जान जोखिम में डालने का खतरा मोल नहीं लेना पड़ेगा. 

INSAS सिंगल शॉट और तीन-राउंड का बर्स्ट फायर कर सकता है. AK-203 सेमी-ऑटोमैटिक या ऑटोमैटिक मोड में चलती है. एक मामले में इंसास बेहतर है. इंसास एक मिनट में 650 गोलियां फायर करती है. एके-203 एक मिनट में 600 गोलियां ही दागती है. लेकिन एके-203 ज्यादा सटीक है.  

INSAS में 20 से 30 राउंड की मैगजीन लगती है. AK-203 में 30 राउंड की बॉक्स मैगजीन लगती है. इंसास की मजल वेलोसिटी 915 मीटर प्रति सेकेंड है. AK-203 की मजल वेलोसिटी 715 मीटर प्रति सेकेंड है. यानी इंसास की गोलियां ज्यादा तेज गति से जाती है. दोनों ही राइफलें गैस ऑपरेटेड, रोटेटिंग बोल्ट तकनीक पर काम करती हैं. 

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इंसास राइफल पर इन-बिल्ट आयरन साइट, माउंट प्वाइंट लगाया जा सकता है, ताकि दूरबीन से दुश्मन को देखा जा सके. इस मामले में AK-203 ज्यादा बेहतर है क्योंकि इसपर एडजस्टबल आयरन साइट तो है ही, इसके अलावा पिकैटिनी रेल लगी है, यानी आप दुनिया के किसी भी तरह के दूरबीन को इस बंदूक पर लगा सकते हैं. यानी जितनी ताकतवर दूरबीन उतना घातक हमला. 

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