
भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की डिजाइन को अंतिम रूप दे दिया गया है. इस विमान का नाम है एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (Advanced Medium Combat Aircraft - AMCA). देश में अभी फ्रांस से मंगाए गए 4.5 पीढ़ी के राफेल फाइटर जेट ही मौजूद हैं. सिर्फ दो साल की बात है उसके बाद भारत के आसमान की तरफ दुश्मन देश नजर उठा कर भी नहीं देख पाएगा. यह विमान बेहद खतरनाक और अत्याधुनिक बनाा जा रहा है.
बताया जा रहा है कि यह विमान अमेरिका के सबसे खतरनाक फाइटर जेट F-35 को स्पीड के मामले में पिछाड़ देगा. क्योंकि AMCA की अधिकतम गति 2633 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी. जबकि अमेरिकी फाइटर जेट की अधिकतम गति 2000 किलोमीटर प्रतिघंटा ही है. AMCA रेंज में भी अमेरिकी F-35 से ज्यादा होगा. भारतीय लड़ाकू विमान की रेंज 3240 किलोमीटर होगी, जबकि अमेरिकी फाइटर की है 2800 किलोमीटर है.
AMCA की कॉम्बैट रेंज 1620 किलोमीटर होगी, जबकि F-35 की कॉम्बैट रेंज 1239 किलोमीटर है. भारतीय लड़ाकू विमान 57.9 फीट लंबा होगा, जबकि एफ-35 छोटा है. यह सिर्फ 51.4 फीट लंबा है. AMCA का विंगस्पैन 36.6 फीट का होगा, जबकि एफ-35 का 35 फिट ही है. AMCA की ऊंचाई 14.9 फीट होगी, जबकि F-35 की 14.4 फीट है.
AMCA सिर्फ एक मामले में F-35 से पीछे दिख रहा है, वो है ईंधन की क्षमता. भारतीय विमान में 6500 किलोग्राम ईंधन की क्षमता होगी, जबकि अमेरिकी फाइटर में 8275 किलोग्राम की क्षमता अभी है. अगर हथियारों की बात करें तो AMCA में 14 हार्डप्वाइंट्स होंगे. इसमें 23 या 30 मिलीमीटर की एक कैनन लगी होगी. इसके अलावा S8 रॉकेट पॉड्स, अस्त्र मार्क-1, 2, 3, हवा से हवा में मार करने वाली NG-CCM मिसाइल, ब्रह्मोस एनजी (BrahMos-NG), संत और हवा से जमीन पर मार करने वाली रुद्रम मिसाइल (Rudram Missile) भी लगाई जाएगी.
F-35 फाइटर जेट में एक 25 मिलीमीटर का कैनन है. चार हार्डप्वाइट्ंस हैं. छह एक्सटर्नल हार्ड प्वाइंट्स हैं. यह AIM 120, 9X, 132 और हवा से हवा में मार करने वाली MBDA मीटियोर मिसाइल से लैस है. इसके अलावा इस पर हवा से सतह पर मार करने वाली AGM 88G, AGM 158, Spear 3 हवा से सतह और हवा से शिप पर मार करने वाली मिसाइलें तैनात हो सकती है.
एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) ने ही AMCA की डिजाइन बनाई है. इसलिए उसे ही पांचवीं पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट की जिम्मेदारी भी दी गई. एडीए के साथ एयरक्राफ्ट रिसर्च एंड डिजाइन सेंटर (ARDC) ने भी काम किया है. हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) इस डिजाइन के आधार पर विमान बनाएगा.