
केंद्रीय गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के सीनियर लीडर अमित शाह (Amit Shah) ने कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के बयान की निंदा की है, जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है, तो नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को वापस लिया जाएगा. इस बयान पर अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा है कि तुष्टिकरण की राजनीति में अंधी हो चुकी कांग्रेस पहले चरण में अपना सूपड़ा साफ होते देख बौखला गई है. अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए प्रताड़ित हिंदू, बौद्ध, जैन, ईसाई, सिख और पारसी समुदाय के लोगों का अहित करने पर आमदा है.
'दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय व्यवस्था...'
अमित शाह ने आगे कहा कि नरेंद्र मोदी की गारंटी है कि धर्मिक प्रताड़ना झेल कर भारत आए हिंदू, बौद्ध, जैन, ईसाई, सिख और पारसी समुदाय के एक-एक व्यक्ति को CAA से नागरिकता मिलेगी, इसको कोई नहीं रोक सकता. नरेंद्र मोदी ने अंग्रेजों की गुलामी के कालखंड के अपराधिक कानूनों को बदल कर भारत को दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय व्यवस्था दी और कांग्रेस उसको बदलने की बात कर रही है.
उन्होंने आगे कहा कि हिंदू, बौद्ध, जैन, ईसाई, सिख और पारसी भाइयों को नागरिकता मिलने से कांग्रेस को समस्या है. कांग्रेस को नए कानूनों से 3 साल के अंदर न्याय मिलने से समस्या है. देश की जनता 2014 और 2019 की ही तरह पहले से भी ज्यादा ताकत के साथ 2024 चुनाव में कांग्रेस को सबक सिखाने वाली है. कांग्रेस का तो मुख्य विपक्ष तक बन पाना भी मुमकिन नहीं है. भारत की मूल संस्कृति और विचार को दबाने वाले कांग्रेस के पंजे से देश ने अपने आप को मुक्त कर लिया है.
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क्या है CAA?
नागरिकता संशोधन बिल पहली बार 2016 में लोकसभा में पेश किया गया था. यहां से तो ये पास हो गया था, लेकिन राज्यसभा में अटक गया. बाद में इसे संसदीय समिति के पास भेजा गया. और फिर चुनाव आ गए.
दोबारा चुनाव के बाद नई सरकार बनी, इसलिए दिसंबर 2019 में इसे लोकसभा में फिर पेश किया गया. इस बार ये बिल लोकसभा और राज्यसभा, दोनों जगह से पास हो गया. राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद 10 जनवरी 2020 से ये कानून बन गया था.
नागरिकता संशोधन कानून के जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी धर्म से जुड़े शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगा. कानून के मुताबिक, जो लोग 31 दिसंबर 2014 से पहले आकर भारत में बस गए थे, उन्हें ही नागरिकता दी जाएगी.