
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश कर दिया है, जिससे देश की सियासत गरमा गई है. मुस्लिम समाज इस विधेयक को लेकर दो धड़ों में बंटा हुआ है—एक पक्ष इसे सुधारात्मक कदम मान रहा है, जबकि दूसरा इसे समुदाय के अधिकारों पर चोट बताकर विरोध कर रहा है. एनडीए और उसकी सहयोगी पार्टियां विधेयक को पारित कराने के लिए एकजुट हैं, जबकि विपक्षी INDIA गठबंधन इसके खिलाफ मोर्चा खोले हुए है. इस मुद्दे पर सदन में गृहमंत्री अमित शाह ने विस्तार से चर्चा की और विपक्ष को घेरा.
अमित शाह ने चर्चा के दौरान दक्षिण भारत के सांसदों पर चर्च को नाराज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कई ईसाई संस्थाओं की जमीनों पर वक्फ बोर्ड ने कब्जा किया है. उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड में जो संपत्तियां बेच खाने वाले, सौ-सौ साल के लिए औने-पौने दाम पर किराए पर देने वाले लोग हैं, वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद उन्हें पकड़ने का काम करेगा. ये चाहते हैं कि इनके राज में जो मिलीभगत चली, वह चलती रहे. नहीं चलेगा. 2013 का जो संशोधन आया, वो नहीं आया होता तो आज ये संशोधन लाने की नौबत नहीं आती. कांग्रेस सरकार ने दिल्ली लुटियंस की 125 संपत्तियां वक्फ को दे दीं. उत्तर रेलवे की जमीन वक्फ को दे दी. हिमाचल में वक्फ की जमीन बताकर मस्जिद बनाने का काम हुआ. उन्होंने तमिलनाडु से कर्नाटक तक के उदाहरण दिए जिस पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया और सदन को भ्रमित करने का आरोप लगाया.
अमित शाह ने मणिपट्टी समिति की रिपोर्ट पढ़ते हुए कहा कि 29 हजार एकड़ जमीन वक्फ की किराए पर दे दी. 2001 से 2012 के बीच दो लाख करोड़ की वक्फ की संपत्ति निजी संस्थानों को हस्तांतरित कर दी 100 साल की लीज पर. बेंगलुरु में हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा और 602 एकड़ भूमि को जब्त करने से रोका गया. विजयपुर की 1500 एकड़ भूमि पर दावा करके विवाद में डाला गया और 500 करोड़ की जमीन 12 हजार रुपये महीने के हिसाब से फाइव स्टार होटल को दे दी गई. ये कहते हैं कि इसका हिसाब कितान न करो. इसकी देखरेख न करो. ये पैसा देश के गरीब मुसलमान का है. ये धन्नासेठों की चोरी के लिए नहीं है. इनके ठेकेदार गरजकर बोलते हैं. उनको लगता है कि इससे हम जीत जाएंगे.
गृह मंत्री ने कहा कि कर्नाटक में एक मंदिर पर क्लेम किया, 600 एकड़ जमीन पर दावा किया और ईसाई समुदाय की ढेर सारी जमीनों पर भी दावा कर दिया. आज देश के गणमान्य चर्च और चर्च के समूह वक्फ बिल का समर्थन कर रहे हैं. उनको (विपक्ष) लगता है कि वक्फ बिल का विरोध करके हम मुस्लिम भाइयों की साहनभूति जीतकर अपना वोट बैंक पक्का करेंगे लेकिन इससे कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि चार साल में मुस्लिम भाइयों को मालूम पड़ जाएगा कि ये कानून उनके फायदा का है.
उन्होंने आगे कहा कि ये दक्षिण के जो सांसद बोल रहे हैं, वो अपने क्षेत्र के सारे चर्च को नाराज कर रहे हैं. उनको पता नहीं है. तेलंगाना में 66 हजार करोड़ की 1700 एकड़ जमीन पर दावा कर दिया. असम में मोरेगांव जिले की 134 एकड़ जमीन पर दावा हुआ. हरियाणा की गुरुद्वारे से संबंधित भूमि वक्फ को सौंप दिया. प्रयागराज में चंद्रशेखर आजाद पार्क को भी वक्फ घोषित कर दिया. महाराष्ट्र के गांव के महादेव मंदिर पर दावा किया. बीड़ में मंदिर की 12 एकड़ जमीन वक्फ बोर्ड ने जबरन ले ली. ये सब जब जो चल रहा है, वक्फ मुस्लिम भाइयों के दान से बनाया ट्रस्ट है, उसमें सरकार कोई दखल नहीं करना चाहती है.