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1947 युद्ध से एयरस्ट्राइक तक... जब जब पाकिस्तान ने की गलती, हर बार मिला मुंह तोड़ जवाब

चाहें 1947 हो, 1965 हो या 1971 और 1999 में, पाकिस्तान ने हर बार भारत के पीठ में छुरा घोंपने की कोशिश की, हर बार उसे मुंह की खानी पड़ी. इसी तरह 2016 में भारत ने उरी हमले के बदले सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को घुटनों के बल ला दिया था. अब अनंतनाग में हुए आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान को सबक सिखाने की मांग होने लगी है.

भारतीय सेना (फाइल फोटो- पीटीआई) भारतीय सेना (फाइल फोटो- पीटीआई)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 15 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 10:07 AM IST

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में तीन अफसरों और एक जवान की शहादत से देशभर में गम का माहौल है. लोग नम आंखों से देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इन जांबाज जवानों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं. इन अफसरों पर हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है. TRF पाकिस्तान की जमीन से चलने वाले आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा का ही धड़ा है. घाटी में घुसपैठ और इस हमले के पीछे भी पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी ISI का हाथ बताया जा रहा है.  ऐसे में एक बार फिर पाकिस्तान को सबक सिखाने की मांग उठने लगी है. ऐसा पहली बार नहीं है, जब पाकिस्तान ने इस तरह की गलती की हो, इससे पहले भी पाकिस्तान घाटी में आतंकी वारदातों को अंजाम देने की कोशिश करता रहा है, लेकिन हर बार उसे मुंह तोड़ जवाब मिला है. 

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1947 युद्ध 

भारत और पाकिस्तान साल 1947 में आजाद हुए थे. लेकिन आजादी के कुछ दिन बाद ही भारत और पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ गई. इस युद्ध की वजह कश्मीर ही थी. पाकिस्तानी सेना के समर्थन से कबायली सेनाओं ने कश्मीर में घुसकर कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद भारतीय सेना और कबायलियों के बीच जंग हुई.  22 अप्रैल, 1948 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पास हुआ, इसके बाद दोनों देशों की तत्कालीन स्थिति को ही स्थाई बना दिया गया. इसे नियंत्रण रेखा LoC कहा जाता है.

ट्रकों में भरकर आए थे पाकिस्तानी कबायली. (फाइल फोटो)

 

1965 का युद्ध

1947 में मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान बाज नहीं आया. अगस्त 1965 में पाकिस्तानी सेना ने जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया. इस बार भी कश्मीर को अपने में मिलाना ही मकसद था. इसके जवाब में भारत ने पश्चिमी पाकिस्तान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमले किए. यह जंग 17 दिन तक चली. तत्कालीन सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका के हस्तक्षेप के बाद युद्धविराम घोषित किया गया. 

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इस जंग में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के हाजी पीर और ठिथवाल समेत कई इलाकों पर कब्जा कर लिया था. लेकिन 1966 में रूस के ताशकंद में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल अयूब खां के बीच समझौता हुआ. समझौते के तहत भारत ने पाकिस्तान के कब्जाए इलाकों को लौटा दिया. इसे लेकर लाल बहादुर शास्त्री की भारत में बहुत आलोचना भी हुई. ताशकंद में ही 11 जनवरी 1966 को रहस्यमयी परिस्थितियों में लाल बहादुर शास्त्री का निधन हो गया था.

1971 : जब दो टुकड़ों में बंटा पाकिस्तान

1965 की जंग के बाद कुछ साल तक तो पाकिस्तान शांत रहा. लेकिन 1970 के दशक में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हालात तेजी से बदलने लगे थे. वहां के लोग पाकिस्तान से खुद को अलग करने की मांग करने लगे. पूर्वी पाकिस्तान में हालात इतने बिगड़ गए कि पाकिस्तान ने अपनी सेना वहां उतार दी. पाकिस्तानी सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में लोगों पर जमकर अत्याचार किए. भारत अब तक इस पूरी स्थिति पर चुप ही था. लेकिन तीन दिसंबर 1971 को पाकिस्तान की सेना ने भारत पर हवाई हमला कर दिया.

 

भारत ने इस हमले का ऐसा जवाब दिया कि 13 दिन में ही ये जंग खत्म हो गई. इतना ही नहीं, पाकिस्तान के भी दो टुकड़े कर डाले. और इससे नया देश बना- बांग्लादेश. पाकिस्तानी सेना की कमान संभाल रहे जनरल नियाजी ने घुटने टेक दिए. जनरल नियाजी ने 93 हजार से ज्यादा सैनिकों के साथ सरेंडर कर दिया.

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1999 : करगिल युद्ध

तीन बार जंग के मैदान में हारने के बाद 1999 में पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर पर कब्जे की फिर कोशिश की. पाकिस्तान की सेना और आतंकियों ने नियंत्रण रेखा को पार कर भारतीय इलाकों पर कब्ज़ा करने की कोशिश की. मई 1999 तक भारत को पाकिस्तानी सेना की इस हरकत का पता ही नहीं चला. फिर जब एक दिन कुछ चरवाहे वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि कुछ हथियारबंद लोग भारतीय चौकियों पर कब्जा कर बैठे हैं. 

 

8 मई 1999 को ये जंग शुरू हुई और भारत ने ऑपरेशन विजय लॉन्च किया. भारतीय थलसेना और वायुसेना ने पाकिस्तानी कब्जे वाले ठिकानों पर हमला कर दिया. भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ दिया और 26 जुलाई 1999 को करगिल में तिरंगा लहरा दिया.

सर्जिकल स्ट्राइक

करगिल युद्ध में हार का सामना करने वाली पाकिस्तानी सेना ने रणनीति में बदलाव किया. वह आतंकियों की मदद कर उन्हें घुसपैठ कराने लगी. ये आतंकी घाटी में आतंकवादी वारदातों को अंजाम देने लगे. 

इसी तरह 18 सितंबर 2016 को पाकिस्तान से आए आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में इंडियन आर्मी के कैंप पर हमला किया था, जिसमें 18 जवान शहीद हो गए थे. इससे देशभर में गुस्से की लहर दौड़ रही थी. पाकिस्तान मानने को तैयार नहीं था. बस फिर क्या था. भारत ने कड़ा रुख अख्तियार किया और ऐसा कदम उठाया कि न सिर्फ पाकिस्तान बल्कि पूरी दुनिया देखती रह गई. भारत ने 28-29 सितंबर की रात पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी लॉन्च पैड्स पर सर्जिकल स्ट्राइक की और उन्हें तबाह कर दिया. 
 

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ये पहला मौका था जब आतंकियों के खिलाफ लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पार कर सेना ने ऑपरेशन को अंजाम दिया. भारतीय सेना के जवान पूरी प्लानिंग के साथ 28-29 सितंबर की आधी रात पीओके में 3 किलोमीटर अंदर घुसे और आतंकियों के ठिकानों को तहस-नहस कर डाला.

एयरस्ट्राइक

14 फरवरी 2019 को पाकिस्तानी आतंकियों ने सीआरपीएफ के काफिले को निशाना बनाया. जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकवादी ने विस्फोटकों से लदे वाहन को सीआरपीएफ जवानों की बस से टक्कर मार दी थी. इस टक्कर के बाद एक जोरदार धमाका हुआ और बस से जा रहे सीआरपीएफ के जवानों के क्षत विक्षत शरीर जमीन पर बिखर गए थे. इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए. पुलवामा हमले के बाद दोनों देशों के बीच जंग जैसे हालात बन गए थे.  

12 दिन बाद ही भारत ने इस हमले का बदला लिया. 26 फरवरी 2019 को रात के करीब 3.00 बजे थे. जब IAF के 12 मिराज 2000 फाइटर जेट लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पार कर पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हुए और बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया. इसे बालाकोट एयर स्ट्राइक के नाम से जाना गया.  

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