
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू मंगलवार को अमरावती ड्रोन शिखर सम्मेलन 2024 में पहुंचे. यहां उन्होंने आंध्र प्रदेश में ड्रोन प्रौद्योगिकी के भविष्य के लिए अपना दूरदर्शी रोडमैप साझा किया. सीएम ने नवोन्मेषकों, ड्रोन निर्माताओं और विशेषज्ञों आदि को संबोधित करते हुए बताया कि कैसे ये इनोवेशन राज्य के विकास को गति देंगे और आंध्र प्रदेश को प्रौद्योगिकी-संचालित विकास में सबसे आगे रखेंगे.
1990 के दशक में अपने नेतृत्व पर विचार करते हुए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भारत की आईटी क्रांति के शुरुआती दिनों के बारे में बात की. उन्होंने 1995 में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से देश की पहली आईटी प्रोजेक्ट, हाईटेक सिटी को लॉन्च करने को याद किया, जिसने हैदराबाद को एक तकनीकी केंद्र में बदल दिया. उन्होंने अंग्रेजी और गणित में देश की ताकत का लाभ उठाते हुए माइक्रोसॉफ्ट जैसी वैश्विक तकनीकी दिग्गजों को भारत लाने के अपने प्रयासों को याद किया. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कैसे प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने आखिरकार दूरसंचार क्षेत्र को विनियमित करने के उनके प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, जिससे भारत में मोबाइल प्रौद्योगिकी के लिए द्वार खुल गए.
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री नायडू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा नेतृत्व की भी प्रशंसा की. उन्होंने कहा, "हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें नरेंद्र मोदीजी के रूप में एक गतिशील प्रधानमंत्री मिला है, जिन्होंने दुनिया भर में ब्रांड इंडिया को बढ़ावा दिया है. उनके नेतृत्व में, भारत 2047 तक वैश्विक स्तर पर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है."
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अगर सभी मिलकर काम करें, तो देश दुनिया की नंबर एक अर्थव्यवस्था बन सकता है. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली JAM (जन धन, आधार, मोबाइल) और आयुष्मान भारत जैसी पहलों की भी प्रशंसा की, जिन्होंने भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद की है.
मौजूदा घटनाक्रमों पर बात करते हुए चंद्रबाबू नायडू ने इस बात पर प्रकाश डाला कि किस तरह आंध्र प्रदेश ने हमेशा तकनीक को अपनाया है. उन्होंने कहा, "आंध्र प्रदेश हमेशा से ही चुनौतियों का समाधान करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने में सबसे आगे रहा है." उन्होंने विजयवाड़ा बाढ़ के दौरान ड्रोन के हालिया इस्तेमाल का हवाला दिया, जहां उन्हें प्रभावित क्षेत्रों में भोजन और पानी पहुंचाने के लिए तैनात किया गया था. उन्होंने कहा, "ड्रोन शहरों में यातायात की समस्याओं को हल कर सकते हैं, कृषि प्रक्रियाओं में सुधार कर सकते हैं और स्वास्थ्य सेवा में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं."
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आंध्र प्रदेश के भविष्य के लिए अपने दृष्टिकोण के बारे में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं. उन्होंने आंध्र प्रदेश को ड्रोन तकनीक का वैश्विक केंद्र बनाने की योजना का खुलासा किया. उन्होंने ड्रोन हब के विकास के लिए कुरनूल जिले के ओरवाकल्लू में 300 एकड़ भूमि आवंटित करने की घोषणा की और कह, "अमरावती भारत की ड्रोन राजधानी बन जाएगी और आंध्र प्रदेश ड्रोन तकनीक में अग्रणी होगा. इस पहल का उद्देश्य राज्य में ड्रोन निर्माण, इनवोशन और अनुसंधान को बढ़ावा देना है."
उन्होंने आंध्र प्रदेश में 35,000 ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षित करने की योजना की भी घोषणा की, जिससे राज्य ड्रोन प्रौद्योगिकी के लिए मानव संसाधन केंद्र के रूप में स्थापित हो जाएगा. उन्होंने बताया कि इससे विभिन्न उद्योगों में ड्रोन की बढ़ती मांग को पूरा करने में सक्षम कुशल कार्यबल तैयार होगा. उन्होंने यह भी वादा किया कि 15 दिनों के भीतर, राज्य सरकार ड्रोन निर्माताओं और इनोवेटर्स के लिए व्यवसाय-अनुकूल वातावरण स्थापित करने के लिए एक व्यापक ड्रोन नीति जारी करेगी.
इसके अलावा, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू गरु ने सभी हितधारकों को अपने ड्रोन प्रोजेक्ट्स के लिए आंध्र प्रदेश को पायलट परीक्षण क्षेत्र के रूप में उपयोग करने के लिए आमंत्रित किया. उन्होंने कहा कि ये पायलट प्रोजेक्ट ड्रोन की प्रभावशीलता का परीक्षण करने में मदद करेंगे और सफल होने पर, पूरे राज्य में इसका विस्तार किया जाएगा और पूरे देश में दोहराया जाएगा.