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'सिर्फ शरीयत और कुरान को ही मानेंगे मुसलमान', असम सरकार के फैसले पर भड़के मुस्लिम नेता

हिमंत बिस्व सरमा सरकार ने असम में मुस्लिम मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट को निरस्त करने का फैसला किया है. इसके ऐलान के बाद मुस्लिम समुदाय के नेता विरोध कर रहे हैं और कह रहे हैं कि "मुस्लिम सिर्फ अपने शरीयत और कुरान को ही फॉलो करेंगे."

एसटी हसन, बदरुद्दीन अजमल एसटी हसन, बदरुद्दीन अजमल
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 24 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 11:36 PM IST

असम सरकार के 'Assam Muslim Marriages and Divorces Registration Act' को निरस्त करने के ऐलान का मुस्लिम समुदाय के नेता विरोध कर रहे हैं. राज्य के बड़े नेता बदरुद्दीन अजमल का कहना है कि ऐसा करके वे मुसलमानों को भड़काना चाहते हैं. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने कहा कि "मुस्लिम सिर्फ शरीयत और कुर'आन को ही मानेंगे." एक नेता ने कहा कि इस कानून को निरस्त करने के साथ 'हिंदू मतदाताओं के ध्रुविकरण की कोशिश' की जा रही है.

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सपा सांसद एसटी हसन ने कहा कि इन चीजों को ज्यादा हाईलाइट करने की जरूरत नहीं है. मुस्लिम सिर्फ शरीयत और कुरान को ही फॉलो करेंगे. वे (सरकार) चाहे जितना कानून भी चाहे बना सकती है... तमाम धर्मों के पास अपनी मान्यताएं हैं. लोग उन्हें हजारों सालों से फॉलो करते आ रहे हैं और आगे भी फॉलो किया जाता रहेगा."

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'मुसलमानों को भड़काने की कोशिश'

असम में ऑल इंडिया यूनाइटडेट डेमोक्रेटिक फ्रंट या एआईयूडीएफ के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि वे (सरकार) मैरिज एंड डिवोर्स रजिस्ट्रेशन एक्ट को निरस्त करके मुसलमानों को भड़काना चाहती है. मुसलमान भड़केगा नहीं. इसके जरिए राज्य सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड लाना चाहती है. 

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कानून को निरस्त करना सरकार का पहला कदम है और ऐसा करने से बीजेपी का "खात्मा" हो जाएगा. बदरुद्दीन अजमल ने कहा, "हम इस मामले पर चुनाव के बाद विरोध करेंगे. इस मुद्दे पर बात की जाएगी लेकिन अभी नहीं चुनाव के बाद. अभी चुप रहेंगे. काजी लोग भिखारी नहीं हैं और कोई सरकार से एक रूपया भी नहीं ले रहे हैं.

"हिंदू वोटों का ध्रुविकरण करना चाहती है बीजेपी"

असम में मुस्लिम मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट को निरस्त किए जाने के फैसले पर कांग्रेस नेता अब्दुर राशिद मंडल ने इसे "भेदभाव करने वाला फैसला" बताया. उन्होंने कहा कि असम सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड लाने और बहु-विवाह को रोक पाने में विफल रही है. अब चुनाव से ठीक पहले मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव पैदा करके बीजेपी हिंदू वोट्स का ध्रुविकरण करना चाहती है. वे (सरकार) कह रही है कि ये ब्रिटिश राज का कानून है और चाइल्ड मैरिज की बात कर रही है, जो की सच नहीं है.

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"असम में यूसीसी लाने की सरकार की हिम्मत नहीं"

बदरुद्दीन अजमल की ही पार्टी एआईयूडीएफ के विधायक हाफिज रफीकुल इस्लाम ने कहा कि हिमंता बिस्व सरमा सरकार को यूसीसी लाने की हिम्मत नहीं है. उन्होंने कहा, "इस सरकार में यूसीसी लाने का साहस नहीं है. वे ऐसा नहीं कर सकते. वे असम में भी यूसीसी लाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मुझे लगता है कि वे ऐसा नहीं कर सकते. अगर हिम्मत है तो सरकार यूसीसी असम में लागू करे जहां कई जातियां और समुदाय रहती हैं... बीजेपी के लोग खुद उन प्रथाओं का पालन करते हैं."

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क्या है मुस्लिम मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट?

इस कानून को ब्रिटिश राज में 1935 में बनाया गया था. हाल ही में, असम सरकार ने इसको निरस्त करने के लिए अध्यादेश लाने का फैसला किया है. इसके जरिए असम सरकार का कहना है कि वे राज्य में मुसलमानों के बीच बाल विवाह जैसे मुद्दे को खत्म करना चाहती है. अधिनियम में ऐसे प्रावधान थे जो दूल्हा और दुल्हन के नाबालिग होने पर भी शादी के रजिस्ट्रेशन की इजाजत देते थे, और निरस्त करने के इस कदम से बहस छिड़ गई है.

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