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असम पुलिस ने शुक्रवार को भारत-बांग्लादेश सीमा से अवैध रूप से घुसे 5 लोगों को वापस भेज दिया. इनमें चार रोहिंग्या और एक बांग्लादेशी नागरिक शामिल थे. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस कार्रवाई की जानकारी दी.
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पोस्ट करते हुए कहा, हमारी सरकार अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है. श्रीभूमि पुलिस ने 4 रोहिंग्या और 1 बांग्लादेशी नागरिक को पकड़कर सीमा से वापस भेज दिया है.
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किन्हें भेजा गया वापस?
पुलिस के मुताबिक, जिन घुसपैठियों को पकड़ा गया और वापस भेजा गया, उनकी पहचान अब्दुल रज्जाक, सद्दाम हुसैन, मोक्तुल हुसैन, नुरुल अमीन और हफसा बीबी के रूप में हुई है. इसके अलावा एक अन्य बांग्लादेशी महिला रूपा सती को गुरुवार रात को पुलिस ने सीमा पार वापस भेज दिया था.
असम में अवैध घुसपैठ पर सख्त नजर
मुख्यमंत्री सरमा ने दावा किया कि पिछले सात महीनों में कुल 305 घुसपैठियों को वापस भेजा जा चुका है. उन्होंने कहा, हम असम को घुसपैठ-मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
सीमा सुरक्षा कड़ी
बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) ने उत्तर-पूर्वी भारत में भारत-बांग्लादेश सीमा पर 1 हजार 885 किमी के दायरे में गश्त बढ़ा दी है. खासकर, पिछले साल अगस्त से बांग्लादेश में उपजे अस्थिर हालात को देखते हुए निगरानी और सख्त कर दी गई है. असम पुलिस भी हाई अलर्ट पर है, ताकि किसी भी अवैध व्यक्ति को राज्य में घुसने से रोका जा सके.
क्यों बढ़ी घुसपैठ की घटनाएं?
बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और अन्य सामाजिक कारणों के चलते बड़ी संख्या में लोग अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं. असम सरकार ने इस खतरे को भांपते हुए पुलिस और बीएसएफ को अलर्ट पर रखा है. सरकार और सुरक्षाबलों की सतर्कता के कारण असम में अवैध घुसपैठ पर प्रभावी रोक लगाई जा रही है. सीमावर्ती इलाकों में लगातार गश्त और निगरानी से घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया जारी है.