चुनाव आयोग शुक्रवार को जम्मू कश्मीर और हरियाणा विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है.जम्मू कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. आखिरी बार जम्मू कश्मीर में 2014 में चुनाव हुए थे.
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर 2024 तक जम्मू कश्मीर में चुनाव कराने का आदेश दिया था. जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद ये पहला विधानसभा चुनाव होगा. जम्मू कश्मीर से पांच अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 हटा दिया गया था. चुनाव तारीख से जुड़े ऐलान के लिए यहां जुड़े रहें.
उपचुनाव को लेकर चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीईसी ने कहा कि, 47 उपचुनाव होने हैं. कुछ राज्यों में मॉनसून सक्रिय है. 46 विधान सभा और एक लोकसभा सीट है. वायनाड में प्राकृतिक आपदा आई है. मौसम और परिस्थितियां अनुकूल होते ही समयानुसार उपचुनाव करा देंगे. उन्होंने कहा कि छह महीनों की अवधि में ही चुनाव करा दिए जाएंगे.
चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र में चुनाव के ऐलान न कराने को लेकर जवाब दिया है. मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रेस वार्ता में कहा कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव का ऐलान हुआ है, इसलिए महाराष्ट्र को लेकर अभी चुनाव कराने का फैसला नहीं लिया गया है. इसके अलावा कई त्योहार भी इसी दौरान आने वाले हैं. पितृ पक्ष, नवरात्रि, दशहरा-दीपावली पड़ेंगे, इसलिए अभी इनका ऐलान नहीं हुआ है.
हरियाणा विधानसभा की 90 सीटों के लिए चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया है. हरियाणा की सभी 90 सीटों के लिए एक ही चरण में मतदान होगा. सभी 90 सीटों पर 1 अक्टूबर को मतदान होगा और चुनाव नतीजे 4 अक्टूबर को मतगणना के बाद आएंगे. मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने चुनाव कार्यक्रम का ऐलान किया.
चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार का कहना है कि हरियाणा में दो करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं. 90 में से 73 सीटें सामान्य हैं. हरियाणा में 27 अगस्त को वोटर लिस्ट जारी होगी. हरियाणा में 20 हजार 269 पोलिंग स्टेशन हैं. 150 से ज्यादा मॉडल पोलिंग बूथ होंगे.
चुनाव आयोग आज मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि जम्मू कश्मीर की अवाम तस्वीर बदलना चाहती है. चुनाव के लिए हर किसी में उत्सुकता है. टीम ने जम्मू कश्मीर और हरियाणा का दौरा भी किया था. हम मौसम ठीक होने के इंतजार में थे. अमरनाथ यात्रा खत्म होने का इंतजार था. जम्मू कश्मीर में इस समय 87.09 लाख मतदाता हैं. यहां 20 लाख से ज्यादा युवा हैं. 20 अगस्त को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी.
जम्मू-कश्मीर में अब विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 90 हो गई है. जम्मू में अब 43 तो कश्मीर में 47 सीटें होंगी. पीओके के लिए 24 सीटें ही रिजर्व हैं. यहां चुनाव नहीं कराए जा सकते. जबकि लद्दाख में विधानसभा ही नहीं है. इस तरह से कुल 114 सीटें हैं, जिनमें से 90 पर चुनाव कराए जाएंगे. जम्मू रीजन में सांबा, कठुआ, राजौरी, किश्तवाड़, डोडा और उधमपुर में एक-एक सीट बढ़ाई गई है. वहीं, कश्मीर रीजन में कुपवाड़ा जिले में एक सीट बढ़ाई गई है.
बिहार की चार विधानसभा सीटों तरारी, रामगढ़, बेलागंज और इमामगंज में भी उपचुनाव होने हैं. माना जा रहा है कि इनकी तारीखों का ऐलान भी आज हो सकता है. इन चारों सीटों के विधायक अब लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंच गए हैं.तरारी सीट से विधायक चुने गए भाकपा माले के सुदामा प्रसाद अब आरा लोकसभा सीट से सांसद हैं. रामगढ़ विधानसभा सीट से आरजेडी के विधायक और पूर्व मंत्री सुधाकर सिंह बक्सर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए हैं. बेलागंज से आरजेडी विधायक सुरेंद्र यादव अब जहानाबाद से सांसद हैं. वहीं, इमामगंज से पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी विधायक थे, जो अब गया से सांसद हैं.
चुनाव आयोग उत्तर प्रदेश में 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का भी ऐलान कर सकता है. ये उपचुनाव गाजियाबाद, मझवां, मीरापुर, मिल्कीपुर, करहल, कटेहरी, कुंदरकी, फूलपुर, खैर और सीसामऊ सीटों पर होंगे. 10 सीटों का यह उपचुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथा की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार के लिए अहम माना जा रहा है.
90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा का कार्यकाल 3 नवंबर को खत्म हो रहा है. पिछले चुनाव में बीजेपी बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी. बाद में बीजेपी ने दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (JJP) के साथ गठबंधन कर सरकार बनाई थी. हालांकि, इसी साल मार्च में बीजेपी और जेजेपी का गठबंधन टूट गया था. फिलहाल हरियाणा में एनडीए के पास 43 और इंडिया ब्लॉक के पास 42 सीटें हैं.
चुनाव आयोग ने पिछले साल आर्टिकल-370 को हटाने के फैसले को बरकरार रखते हुए केंद्र सरकार को जम्मू कश्मीर में 30 सितंबर तक विधानसभा चुनाव कराने के आदेश दिया था.
जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. आखिरी बार यहां 2014 में चुनाव हुए थे. यहां की 87 सीटों में से पीडीपी ने 28, बीजेपी ने 25, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 15 और कांग्रेस ने 12 सीटें जीती थीं. बीजेपी और पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाई और मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री बने थे. जनवरी 2016 में मुफ्ती मोहम्मद सईद का निधन हो गया था. करीब चार महीने तक राज्यपाल शासन लागू रहा. बाद में उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री बनीं. लेकिन ये गठबंधन ज्यादा नहीं चला. 19 जून 2018 को बीजेपी ने पीडीपी से गठबंधन तोड़ लिया. राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया. अभी वहां उपराज्यपाल मनोज सिन्हा हैं.