
(नोट: यह स्टोरी संशोधित की गई है. पहले न्यूज एजेंसी की खबर में किताब 'बाहुबलीज ऑफ इंडियन पॉलिटिक्स: फ्रॉम बुलेट टू बैलट' के हवाले से यह लिखा गया था कि अतीक ने तब यूपीए सरकार के पक्ष में वोट दिया. लेकिन बाद में यह दावा गलत निकला जिसके बाद खबर को संशोधित किया गया. लोकसभा रिकॉर्ड में पता चला कि अतीक ने सरकार के खिलाफ जाकर वोट दिया था.)
गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की शनिवार रात को प्रयागराज मेडिकल कॉलेज के पास गोली मार कर हत्या कर दी गई. अतीक की हत्या के बाद अब उससे जुड़े कई किस्से सामने आ रहे हैं. 2008 में जब अमेरिका के साथ परमाणु समझौते को लेकर मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, तो उस वक्त अतीक अहमद ने जेल से बाहर निकलकर वोट डाला और पार्टी व्हिप के खिलाफ जाकर मतदान किया था
जब जेल से छोड़े गए थे 6 बाहुबली
हालांकि बाहुबलियों पर लिखी गई किताब में अलग दावा किया गया है. 2008 में एक दौर ऐसा आया जब जब अतीक समेत 6 आपराधिक राजनेताओं को महज 48 घंटों के अंदर अलग-अलग जेलों से फर्लो पर रिहा किया गया था. लोकसभा रिकॉर्ड के अनुसार, अतीक अहमद ने अपनी पार्टी के व्हिप की अवहेलना की और सत्तारूढ़ संप्रग गठबंधन के विश्वास प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया था.
2004 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर लोकसभा सांसद चुने गए अतीक को पार्टी व्हिप के खिलाफ मतदान करने की कीमत चुकानी पड़ी. पार्टी ने अतीक को पांच साल के अंदर ही सपा ने पार्टी से निष्कासित कर दिया. अहमद (60) ने खुद को एक राजनेता, ठेकेदार, बिल्डर, प्रॉपर्टी डीलर और किसान के रूप के रूप में पहचान दिलाई, लेकिन उसके खिलाफ अपहरण, जबरन वसूली और हत्या सहित गंभीर आपराधिक आरोप भी लगे.
हत्यारों ने किया था सरेंडर
आपको बता दें कि अतीक अहमद और अशरफ अहमद की शनिवार रात करीब 10:37 बजे तीन बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी. हत्याकांड को अंजाम देने के बाद तीनों आरोपियों ने सरेंडर कर दिया था.अतीक और अशरफ की हत्या करने वाला लवलेश तिवारी बांदा का रहने वाला है, जबकि अरुण मौर्य कासगंज का निवासी है. वहीं तीसरा आरोपी सनी हमीरपुर जनपद से है. पूछताछ में तीनों आरोपियों ने अपना यही पता बताया है. पुलिस उनके बयानों को वेरिफाई कर रही है.
एनकाउंटर में मारा गया था बेटा
इससे दो दिन पहले झांसी में यूपी एसटीएफ ने अतीक अहमद के तीसरे नंबर के बेटे और उमेश पाल हत्याकांड के आरोपी असद के साथ शूटर गुलाम को एनकाउंटर में मार गिराया गया था. अतीक अपने बेटे के जनाजे में नहीं शामिल हो पाया था. वहीं एनकाउंटर पर सवाल उठने के बाद डीएम ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं. इस जांच के लिए सिटी मजिस्ट्रेट को जांच अधिकारी बनाया गया है. घटना के बारे में सिटी मजिस्ट्रेट के यहां बयान दर्ज कराए जा सकते हैं.