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'पति-भाई को मार डाला, मैंने झेला है अतीक का आतंक...', पीड़िता की जुबानी माफिया की क्रूरता की कहानी

अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की प्रयागराज में उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब दोनों को मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था. तीन हमलावरों ने पुलिस की मौजूदगी में मीडिया के कैमरों के सामने दोनों को गोली मारी थी.

सूरजकली उर्फ जयश्री सूरजकली उर्फ जयश्री
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 17 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 9:04 PM IST

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की रहने वालीं सूरजकली कुशवाहा ने माफिया डॉन अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के आतंक की कहानी बयां की है. सूरजकली ने कहा कि उन्हें न तो अतीक अहमद की मौत की खुशी है और न ही उसके जिंदा रहने का गम था. 

सूरजकली उर्फ जयश्री ने आजतक से बातचीत में अतीक और अशरफ के आतंक की आपबीती सुनाते हुए कहा कि 1989 में मेरे पति अचानक गायब हो गए थे. अतीक ने मेरी साढ़े 12 बीघा जमीन हड़प ली थी. फर्जी लिखा-पढ़ी के जरिए हमारी जमीन हड़पी गई थी. अतीक अहमद ने हमारी जमीन बेचकर 200 लोगों को उस पर बसा दिया. मैं अनपढ़ थी, तो अतीक की चाल समझ नहीं पाई. विरोध करने पर पता चला कि यह सब अतीक का खेल था. 

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अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की प्रयागराज में उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब दोनों को मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल लाया जा गया था. तीन हमलावरों ने पुलिस की मौजूदगी में मीडिया के कैमरों के सामने दोनों को गोली मारी थी.

'2016 में मुझ पर हमला हुआ'

जयश्री ने बताया कि मुझ पर और मेरे बेटे पर हमला किया गया. 2016 में मुझ पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गईं. मुझे दो गोली लगी. एक गोली गर्दन में भी लगी. अस्पताल में भी लगातार धमकियां मिलती रही. 

वह बताती हैं कि अतीक कई बार विधायक और सांसद रह चुका था. उसका सिक्का चलता था. पुलिस वाले भी उसके खिलाफ कार्रवाई करने को तैयार नही रहते थे. जब  भी मैं पुलिस के पास शिकायत लेकर जाती थी, तो मुझे सुलह करने या फिर चुप रहने को कह दिया जाता था. मुझे कहा जाता था कि ये लोग तुम्हें मार देंगे. मैं बहुत गरीब परिवार से हूं. 

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'भाई को करंट लगाकर मार दिया'

जयश्री बताती हैं कि मेरे भाई को भी अतीक के लोगों ने करंट लगाकर मार दिया. पुलिस के पास गई तो मुझे डराया-धमकाया गया. मुझसे कहा गया कि पुलिस में जाओगी तो मारी जाओगे, तुम्हारे बच्चों को मार देंगे. मैंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और हर आला अधिकारी से मदद की गुहार लगाती रही.  अतीक के लोगों ने मेरे पति को भी मार डाला.  35 साल से हक की लड़ाई लड़ रही हूं.

'मेरी सुरक्षा बढ़ाई जाए'

अतीक और अशरफ की मौत के बाद भी जयश्री डर के साए में जी रही हैं. वह कहती हैं कि वे बहुत ताकतवार लोग थे. डर तो हमेशा रहेगा. मैं चाहती हूं कि मेरी सुरक्षा बढ़ाई जाए. मेरे पास अब कुछ नहीं रह गया है. मुझे न्याय चाहिए. मेरी जमीन मुझे वापस मिलनी चाहिए. साथ में मेरी सुरक्षा भी बढ़ाई जानी चाहिए. 

बता दें कि उमेश पाल हत्याकांड में शामिल 6 आरोपी मारे जा चुके हैं. जहां अरबाज और विजय चौधरी को पुलिस ने प्रयागराज में एनकाउंटर में मार गिराया था. वहीं, अतीक के बेटे और गुलाम को 13 अप्रैल को झांसी में एनकाउंटर में मार गिराया गया था. इसके बाद शनिवार को अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस मामले में अभी अतीक की पत्नी शाइस्ता, अरमान, गुड्डू मुस्लिम और साबिर फरार हैं.

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अतीक और उसके भाई अशरफ पर हाल ही में प्रयागराज में हुए उमेश पाल हत्याकांड की साजिश का आरोप लगा था. इसी केस में पूछताछ के लिए यूपी पुलिस ने अतीक और उसके भाई की कस्टडी मांगी थी. अतीक को साबरमती तो उसके भाई को बरेली जेल से प्रयागराज लाया गया था, जहां उनसे पूछताछ चल रही थी. 

उमेश पाल की 24 फरवरी को प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. फायरिंग में उसके साथ दो गनर आरक्षी संदीप निषाद और राघवेंद्र सिंह की मौत हो गई थी. उमेश 2005 में प्रयागराज में हुए राजूपाल हत्याकांड का गवाह था. राजूपाल हत्याकांड में भी अतीक और उसका भाई अशरफ मुख्य आरोपी थे. 

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