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उन 10 तारीखों की कहानी... जिनमें अतीक अहमद का 44 साल में बनाया 'माफिया साम्राज्य' मिट्टी में मिल गया!

माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की शनिवार रात को पुलिस घेरे में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई. वारदात को तीन युवकों ने अंजाम दिया, जो पत्रकार बनकर पुलिस के काफिले के नजदीक पहुंचे और ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. इस दौरान करीब 18 राउंड गोलियां चलीं, जिनमें से 8 गोली अतीक अहमद को लगीं. इससे दो दिन पहले अतीक के बेेटे असद को एसटीएफ ने एनकाउंटर में मार गिराया गया था.

अतीक अहमद की शनिवार को हुई हत्या अतीक अहमद की शनिवार को हुई हत्या
aajtak.in
  • प्रयागराज,
  • 17 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 6:02 PM IST

माफिया अतीक अहमद की शनिवार देर रात प्रयागराज में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई. इस हमले में उसका भाई अशरफ भी मारा गया. इसी के साथ अतीक के अपराध और दहशत के उस साम्राज्य का भी अंत हो गया, जो उसने 44 साल में खड़ा किया था. अतीक पर 100 से ज्यादा केस दर्ज थे. 24 फरवरी को उमेश पाल की हत्या के मामले में दर्ज हुए केस से उसका और उसकी गैंग का काउंटडाउन शुरू हो गया था. पहले अतीक के परिवार और गैंग पर शिकंजा कसा गया. फिर 13 अप्रैल को उसके तीसरे नंबर के बेटे असद और शूटर गुलाम एनकाउंटर में ढेर हो गए. असद को शनिवार को सुपुर्द-ए-खाक किया गया, इसके बाद रात होते होते अतीक और उसका भाई हमले में मारे गये. 

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अतीक पर हत्या, हत्या की साजिश, किडनैपिंग जैसे 100 मामले दर्ज थे. अतीक अहमद न सिर्फ क्राइम बल्कि राजनीति की दुनिया में भी जाना-माना नाम था. अतीक के खौफ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है, कि जब उसने 2012 में चुनाव लड़ने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी, तो हाईकोर्ट के 10 जजों ने केस की सुनवाई से ही खुद को अलग कर लिया. 11वें जज ने सुनवाई की और अतीक अहमद को जमानत मिल गई.

एक बार सांसद, 5 बार विधायक रहा

अतीक एक बार सांसद और 5 बार विधायक रहा. अतीक अहमद का नाम हाल ही में प्रयागराज में हुए उमेश पाल हत्या केस में सामने आया. अतीक ने तमाम जुर्म किए लेकिन उमेश पाल की हत्या के बाद उसका साम्राज्य ढहना शुरू हुआ तो फिर अबतक उसके गैंग को तबाही ही देखने को मिली. यही वह केस है, जिससे जुड़ीं 10 तारीखों में अतीक का 44 साल का बनाया हुआ माफिया साम्राज्य मिट्टी में मिल गया. 

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10 तारीखें, जिन्होंने अतीक के 44 साल के साम्राज्य को हिला दिया

24 फरवरी:  24 फरवरी को प्रयागराज की सड़कों पर दिनदहाड़े उमेश पाल और उसके दो गनर्स की हत्या कर दी गई थी. उमेश पाल 19 साल पहले हुए राजू पाल हत्याकांड का मुख्य गवाह थे.

25 फरवरी: उमेश पाल की पत्नी ने अतीक, अशरफ, शाइस्ता समेत 9 लोगों पर मामला दर्ज कराया. उधर, जब यूपी विधानसभा में विपक्ष ने कानून के मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधा, तो सीएम योगी ने कहा, ''इस सदन में कह रहा हूं, इस माफिया को मिट्टी में मिला देंगे... जितने माफिया हैं उनको मिट्टी में मिलाने का काम करेंगे.''

26 फरवरी: उमेश पाल हत्याकांड के सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों की पहचान हुई. पुलिस ने विजय चौधरी उर्फ ​​उस्मान, अरबाज, अतीक के बेटे असद, गुलाम, गुड्डू मुस्लिम, साबिर, अरमान की पहचान की. 

27 फरवरी: पुलिस ने 27 फरवरी को अतीक अहमद के करीबी अरबाज को ढेर कर दिया. उमेश पाल की हत्या में शूटरों ने जिस क्रेटा कार का इस्तेमाल किया गया था, उसे अरबाज ही चला रहा था. अरबाज, अतीक अहमद की गाड़ी भी चलाता था.

5 मार्च: असद समेत सभी 5 शूटरों पर पुलिस ने ढाई लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए इनाम किया.
 
6 मार्च:  प्रयागराज के लालापुर इलाके का रहने वाला विजय चौधरी बाहुबली डॉन अतीक अहमद का कुख्यात शार्प शूटर था. उसने ही उमेश पर सबसे पहले फायरिंग की थी. विजय चौधरी को यूपी पुलिस ने 6 मार्च को प्रयागराज के कौंधियारा में एनकाउंटर में मार गिराया था.

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27 मार्च-28 मार्च: अतीक को साबरमती से प्रयागराज लाया गया. कोर्ट ने अतीक को उमेश पाल अपहरण केस में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. अतीक को 11 अप्रैल को दोबारा साबरमती से प्रयागराज लाया गया. 

13 अप्रैल: अतीक के बेटे असद और गुलाम को एसटीएफ ने 13 अप्रैल को झांसी में एनकाउंटर में मार गिराया. दोनों पर उमेश पाल पर फायरिंग का आरोप था. उमेश पाल की हत्या का जो सीसीटीवी फुटेज सामने आया था, उसमें भी दोनों फायरिंग करते नजर आए थे. बेटे असद के एनकाउंटर के बाद अतीक टूट सा गया था. 

एनकाउंटर में मारे गए असद और गुलाम

14 अप्रैल: प्रयागराज में अतीक से 23 घंटे तक पूछताछ की गई. 

15 अप्रैल: अतीक के बेटे असद को 15 अप्रैल की सुबह प्रयागराज में सुपुर्द ए खाक किया गया. देर रात प्रयागराज के काल्विन हॉस्पिटल के बाहर अतीक और उसके भाई की गोली मारकर हत्या कर दी गई. तीन लोगों ने अतीक और उसके भाई पर ताबड़तोड़ फायरिंग की. दोनों का वहीं अंत हो गया.

खौफ में था अतीक

एक समय था, जब पूरे पूर्वांचल में अतीक के नाम का डंका बजता था. लेकिन उमेश पाल हत्याकांड में पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद उसके आंखों में खौफ और जुबां पर दहशत दिखाई देने लगी थी. अतीक ने जेल से निकलते ही कहा था कि कोर्ट के कंधे पर रखकर मुझे मारना चाहते हैं.

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12 अप्रैल को जब अतीक अहमद को प्रयागराज लाया जा रहा था, तब रास्ते में आजतक ने अतीक से सवाल किया, 'कल तक आप दबंगई कर रहे थे तो डर नहीं लग रहा था, आप पर 100 से ज्यादा मामले दर्ज है. अब क्यों डर रहे हो?' यह सवाल सुनकर अतीक पहले चुप हो गया और उसने कोई जवाब नहीं दिया. बाद में अतीक ने कहा, 'हमारे परिवार को मिट्टी में मिला दिया, अब रगड़े ही जा रहा है.'

उसने कहा, 'हमारा परिवार तो पूरी तरह बर्बाद हो गया, माफियागिरी तो पहले ही खत्म हो गयी थी. उमेश पाल की हत्या हम कैसे कर सकते हैं. हम तो जेल में बंद थे.'

उमेश पाल हत्याकांड: शाइस्ता समेत 4 फरार

उमेश पाल की पत्नी की शिकायत पर अतीक, भाई अशरफ, पत्नी शाइस्ता, बेटे असद, शूटर अरमान, गुलाम, गुड्डू मुस्लिम और साबिर समेत 9 लोगों पर मामला दर्ज किया गया था. उमेश पाल हत्याकांड में शामिल 6 आरोपी मारे जा चुके हैं. जहां अरबाज, असद, गुलाम और विजय चौधरी का एनकाउंटर हुआ है, तो वहीं अतीक और अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई. जबकि अतीक की पत्नी शाइस्ता, शूटर अरमान, गुड्डू मुस्लिम और साबिर फरार है. 

कैसे हुई अतीक और अशरफ की हत्या?

माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की शनिवार रात प्रयागराज में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई. पुलिस घेरे में इस दोहरे हत्याकांड को अरुण मौर्या, सनी और लवलेश तिवारी ने अंजाम दिया. तीनों पत्रकार बनकर पुलिस के काफिले के नजदीक पहुंचे और जैसे ही अतीक और उसके भाई अशरफ ने मीडिया से बात करना शुरू की, तीनों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. इस दौरान करीब 18 राउंड गोलियां चलीं, जिनमें से 8 गोली अतीक अहमद को लगीं. दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. 

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अतीक हत्याकांड में शामिल सनी हमीरपुर, अरुण उर्फ कालिया कासगंज और लवलेश तिवारी बांदा जिले का रहने वाला है. लवलेश तिवारी बांदा के क्योतरा का रहने वाला है. लवलेश के खिलाफ चार पुलिस केस हैं. वह लड़की को थप्पड़ मारने के आरोप में जेल जा चुका है. सनी सिंह हमीरपुर जिले के कुरारा कस्बे का रहने वाला है. वो कुरारा पुलिस थाने का हिस्ट्रीशीटर है, जिसकी हिस्ट्रीशीट नंबर 281A है. उसके खिलाफ करीब 15 केस दर्ज हैं. जबकि अरुण ने जीआरपी थाने में तैनात पुलिसकर्मी की हत्या कर दी थी, जिसके बाद से ही वो फरार है.

क्यों की गई हत्या ?

FIR के मुताबिक, शूटरों ने पूछताछ में बताया कि वे अपराध की दुनिया में बड़ा नाम बनाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने अतीक अहमद और उसके भाई की हत्या की. इतना ही नहीं आरोपियों ने भी कहा कि वे पुलिस के घेरे के चलते भागने में सफल नहीं हो पाए.

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