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BMP-2 टैंक और AI हथियार से प्रहार... अखनूर में सेना ने यूं किया तीन आतंकियों का काम तमाम

सुरक्षाबलों ने जम्मू के अखनूर में दहशतगर्दों को घेरने के लिए बीएमपी कॉम्बैट व्हीकल्स उतार डाले. बीएमपी कॉम्बैट व्हीकल्स आमतौर पर जंग के मैदान में देखे जाते हैं. यह लड़ाकू वाहन ऊंचे-नीचे पहाड़ी रास्तों और कच्चे रास्तों पर भी आसानी से दौड़ सकता है, इसलिए भी अखनूर में इसका इस्तेमाल किया गया.

अखनूर में आतंकवादियों के खिलाफ भारतीय सेना ने उतारे BMP-2 बख्तरबंद वाहन. (PTI Photo) अखनूर में आतंकवादियों के खिलाफ भारतीय सेना ने उतारे BMP-2 बख्तरबंद वाहन. (PTI Photo)
आजतक ब्यूरो
  • नई दिल्ली,
  • 29 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 11:54 PM IST

देश दिवाली की रोशनी में नहाया हुआ है. लेकिन भारत के दुश्मन हर पल उसे दहलाने की नई-नई साजिशों में जुटे हैं. इसका खुलासा जम्मू के अखनूर में हुए एनकाउंटर से हुआ, जिसमें मारे गए 3 आतंकियों के पास से सुरक्षाबलों ने ड्राई फ्रूट्स, दवाइयां और हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद किया है. उन्होंने सीमा पार से भारत में घुसपैठ से पहले इन चीजों की शॉपिंग की थी ताकि भारत की खुशियों के रंग में भंग डाल सकें.

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आतंकवादियों के पास से बरामद सामान देखकर पता चलता है कि उनकी योजना लंबे वक्त तक जम्मू-कश्मीर में रहने और दशहत फैलाने की थी. लेकिन हमारे मुस्तैद सुरक्षाबलों ने इन आतंकियों ने नापाक मंसूबों को ध्वस्त कर दिया. आतंकियों के पास से एम4, एके-47 जैसे खतरनाक हथियार और बड़े पैमाने पर बम-बारूद और गोलियां बरामद हुई हैं. इसके अलावा सोलर पैनल, चाकू, यूएसबी केबल के साथ पावर बैंक, बिनो, डिजिटल कैसियो वॉच, नोट पैड, जूते, कम्बल, कपड़े, वायर कटर, स्क्रू ड्राइवर, पेंसिल सेल, शहद और पानी की बातलें, बैक पैक/रूकसैक, जरूरी दवाएं, ड्राई फ्रूट्स के पैकेट इत्यादि चीजें उनके पार से बरामद हुई हैं. 

जम्मू-कश्मीर में सेना ने दशकों बाद उतारे BMP-2 व्हीकल्स

सुरक्षाबलों ने जम्मू के अखनूर में दहशतगर्दों को घेरने के लिए बीएमपी कॉम्बैट व्हीकल्स उतार डाले. बीएमपी कॉम्बैट व्हीकल्स आमतौर पर जंग के मैदान में देखे जाते हैं. एलओसी के पास जम्मू के भट्टल इलाके में सोमवार सुबह करीब 7 बजकर 26 मिनट पर आतंकियों ने सेना की एंबुलेंस पर हमला किया था, इसमें जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ. हमले के बाद आतंकी जंगल की ओर भाग गए थे, जिनकी तलाश में सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन चलाया और 27 घंटे की मुठभेड़ के बाद तीन आतंकवादियों को जहन्नुम पहुंचाने में सफल रहे. 

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आसमान से सेना के हेलिकॉप्टर जंगल में छिपे आतंकवादियों की टोह ले रहे थे. नदी के दोनों ओर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने मोर्चा ले रखा था. खेतों-खलिहानों से होकर सेना के बख्तरबंद वाहन दहशतगर्दों के करीब पहुंचने की कोशिश कर रहे थे. जंगलों और झाड़ियों के बीच पूरी तैनाती के बाद जब ऑपरेशन चालू हुआ तो पूरा इलाका धमाकों से गूंज उठा. इस बड़े ऑपरेशन में भारतीय सेना के 32 फील्ड रेजिमेंट के जवानों से लेकर 9 पैरा एसएफ, एनसजी कमांडो, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान शामिल रहे.

आतंकियों ने अखनूर में शिव मंदिर के पास ले रखी थी पनाह

एनकाउंटर 27 घंटे बाद मंगलवार सुबह 10 बजे खत्म हुआ. सोमवार को एक आतंकवादी का शव बरामद हुआ था, मंगलवार को दो और आतंकवादियों के शव बरामद हुए. सेना का कहना है कि आतंकवादी किसी बड़े हमले की फिराक में थे. इस बात की तस्दीक उनके पास से मिले सामानों से होती है. आतंकियों ने अखनूर में एक शिव मंदिर के पास पनाह ले रखी थी. सेना ने एनकाउंटर के बाद ड्रोन से तलाशी ली तो 3 आतंकवादी ढेर पाए गए. सुरक्षाबलों ने बताया कि आतंकवादी भट्टल इलाके में जंगल से सटे शिव आसन मंदिर में मोबाइल ढूंढ रहे थे. उन्हें किसी को कॉल करनी थी.

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इसी दौरान वहां से आर्मी की एंबुलेंस गुजरी, जिसे देखकर आतंकवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी. इन आतंकवादियों की खबर सुरक्षाबलों को स्कूली बच्चों ने दी. जम्मू-कश्मीर में 16 अक्टूबर से अब तक यह 5वां आतंकी हमला है, जिसमें सुरक्षाबलों के 3 जवान शहीद हुए हैं, वहीं 8 गैर स्थानीय लोगों की मौत हुई है. अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में टारगेट किलिंग की वारदातें बढ़ी हैं, जिसमें खास तौर पर आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों, प्रवासी कामगारों, सरकार या पुलिस विभाग में काम करने वाले स्थानीय लोगों को निशाना बनाया है. इस बात की पूरी संभावना है कि अखूनर में मारे गए तीनों आतंकवादी भी ऐसी ही किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे.

क्या है बख्तरबंद वाहन BMP-2 की खासियत?

अखनूर में आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना ने अपने बख्तरबंद वाहन BMP-2 का इस्तेमाल किया. इसे सोवियत रूस ने बनाया था. रूसी भाषा में इंफैन्ट्री कॉम्बैट व्हीकल के लिए, ​BMP शॉर्ट फॉर्म का इस्तेमाल होता है. यह पैदल सेना का लड़ाकू वाहन है, जो सैनिकों को लाने और ले जाने के अलावा रणभूमि में भी काम आता है. इसमें 30 मिमी की ऑटोमैटिक तोप लगी होती है. इसके अलावा एक मशीन गन और जरूरत पड़ने पर इसमें एंटी-टैंक मिसाइलें भी लगाई जा सकती हैं. फायर पावर के अलावा इसकी एक खूबी ये भी है कि यह जमीन के अलावा पानी में भी चल सकता है. अखनूर के पास से बहने वाली चिनाब नदी के किनारे मौजूद आतंकियों का सफाया करने के लिए BMP-2 ने नदी को पार किया और फिर कार्रवाई की.

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यह लड़ाकू वाहन ऊंचे-नीचे पहाड़ी रास्तों और कच्चे रास्तों पर भी आसानी से दौड़ सकता है, इसलिए भी अखनूर में इसका इस्तेमाल किया गया. युद्ध के अलावा आतंक रोधी अभियान में इसका इस्तेमाल कवच जैसी इसकी सुरक्षा के लिए भी किया जाता है. यह बख्तरबंद वाहन कुल 10 सैनिकों को युद्ध और आतंक प्रभावित इलाके में सुरक्षित ले जा सकता है. इन 10 सैनिकों में तीन चालक दल के सदस्य होते हैं- एक कमांडर, दूसरा गनर और तीसरा ड्राइवर. इनके अलावा 7 सशस्त्र जवान सवार हो सकते हैं. जम्मू-कश्मीर में इन लड़ाकू वाहनों का इस्तेमाल कई दशकों के बाद किया जा रहा है.

अखनूर में आर्मी डॉग फैंटम ने भी दी शहादत

इससे पहले 1990 में भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ 'ऑपरेशन त्रिशूल' में BMP-2 बख्तरबंद वाहनों का इस्तेमाल किया था. इस ऑपरेशन में BMP-2 का उपयोग करके सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के ठिकानों पर हमले किए और उन्हें तबाह किया था. इसके अलावा 'ऑपरेशन रक्षक' जैसे अन्य अभियानों में भी BMP-2 का इस्तेमाल हुआ, जहां सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की. अखनूर में हुए एनकाउंटर में AI और ड्रोन के अलावा आर्मी ने अपने डॉग फैंटम का भी इस्तेमाल किया गया, जो आतंकवादियों पर टूट पड़ा. फैंटम को कई गोलियां लगीं और इस मुठभेड़ में वह शहीद हो गया. व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने X पर एक पोस्ट में लिखा, 'जैसे ही हमारे सैनिक आतंकवादियों के करीब पहुंच रहे थे, फैंटम ने दुश्मन की गोलियों को अपने ऊपर ले लिया और गंभीर रूप से घायल हो गया. उसकी बहादुरी, वफादारी और समर्पण को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा.'

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