
विभिन्न कोर्ट में केंद्र सरकार की तरफ से केस लड़ने वाले अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से जुड़ी बड़ी जानकारी सामने आई है. पता चला है कि सरकार के टॉप लॉ ऑफिसर्स को रिटेनर फीस के तौर पर पिछले कुछ सालों में एक करोड़ से ज्यादा रुपये दिए गए हैं.
यह जानकारी कानून और न्याय मंत्रालय में दायर की गई एक RTI के जरिए मिली है. इससे पता चला है कि बीजेपी की केंद्र सरकार ने Attorney General और Solicitor General को रिटेनर फीस के तौर पर 1 करोड़ से ज्यादा रुपये दिए.
क्या होती है Retainer fee?
रिटेनर फीस (Retainer fee) वह पैसा होता है जो कि वकील की सेवाओं को बुक करने के लिए दिया जाता है. मतलब यह पैसा सर्विस लेने के लिए एक तरह से दिया गया एडवांस है. यह वकील की फीस से अलग होता है. फिर जब वह वकील किसी केस को दायर करेगा या फिर उसमें जिरह करेगा उसके लिए अलग चार्ज होगा.
बीजेपी सरकार ने बढ़ाई थी रिटेनर फीस
कानून और न्याय मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक, Attorney General of India को साल 2012 से सितंबर 2015 तक रिटेनर फीस के तौर पर 54 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते थे. इसे एक अक्टूबर 2015 को बढ़ाकर 79 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया.
इसी तरह Solicitor General को 2015 से पहले तक केंद्र सरकार की तरफ से 40 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते थे. इसे 2015 में बढ़ाकर 60 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया.
इस तरह अटॉर्नी जनरल को 1 अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2022 तक रिटेनर फीस के तौर पर 83 लाख से ज्यादा रुपये (83,41,000) मिले. वहीं सॉलिसिटर जनरल को इसी वक्त में 56 लाख से ज्यादा (56,08,351) रुपये मिले.
मुकुल रोहतगी फिर बनेंगे देश के अटॉर्नी जनरल
बता दें कि साल 2014 में बीजेपी सत्ता में आई थी. तब से अबतक दो वकीलों ने अटॉर्नी जनरल के रूप में सरकार को कानूनी सलाह दी है. सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी देश के 14वें अटॉर्नी जनरल थे. इनका कार्यकाल 2014 से 2017 तक रहा. इसके बाद सीनियर वकील केके वेणुगोपाल को अटॉर्नी जनरल बनाया गया. अब 30 सितंबर को उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है. अब दोबारा मुकुल रोहतगी देश के अटॉर्नी जनरल बनेंगे, यह तय हो गया है.
दूसरी तरफ सॉलिसिटर जनरल की कुर्सी बीजेपी सरकार के पहले कार्यकाल के वक्त ज्यादा टाइम खाली ही रही. फिर अक्टूबर 2018 में तुषार मेहता को सॉलिसिटर जनरल बनाया गया. इससे पहले चार साल तक वह एडिशनल सॉलिसिटर जनरल रहे.