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'भारतीय दिल' ने पाकिस्तानी लड़की को दी नई जिंदगी, मां बोली- भारत और उसके डॉक्टर बहुत शानदार

उम्मीद और जिंदगी से भरपूर आयशा एक फैशन डिजाइनर बनना चाहती हैं. उन्होंने अपने सफल हार्ट ट्रांसप्लांटेशन के बाद कहा- मैं दिल पाकर बहुत खुश हूं. मैं समर्थन के लिए भारत सरकार को धन्यवाद देती हूं और डॉक्टरों को भी धन्यवाद देती हूं.

 अपनी माँ सनोबर रशन के साथ आयशा. ( फोटो: आजतक) अपनी माँ सनोबर रशन के साथ आयशा. ( फोटो: आजतक)
प्रमोद माधव
  • चुन्नई,
  • 24 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 12:02 AM IST

वैसे तो सीमाएं दो देशों को विभाजित करती हैं, लेकिन एक धड़कते दिल ने इस दूरी को खत्म कर दिया. पाकिस्तान की आयशा रशन (19) पिछले 10 साल से दिल की बीमारी से पीड़ित थीं. वह 2014 में इलाज के लिए भारत आई थीं. डॉक्टरों ने पेस मेकर लगाकर उन्हें कुछ समय के लिए राहत दी, लेकिन उन्हें फिर दिक्कतों का सामना करना पड़ा. नहीं डॉक्टरों ने आयशा की जान बचाने के लिए हार्ट ट्रांसप्लांट की सिफारिश की. 

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आयशा राशन के परिवार को चेन्नई स्थित एमजीएम हेल्थकेयर हॉस्पिटल में इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांट के डायरेक्टर डॉ. केआर बालाकृष्णन और को-डायरेक्टर डॉ. सुरेश राव ने कंसल्टेशन दिया. डॉक्टरों ने फैमिली को बताया कि हार्ट ट्रांसप्लांट आवश्यक है, क्योंकि आयशा के हार्ट पंप में लीकेज हो गया था और उसे एक्स्ट्रा कार्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन सिस्टम पर रखा गया था. 

'मुफ्त में हुई आयशा की हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी'

परिवार ने बताया किया कि हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए लगभग 35 लाख रुपये की आवश्यकता थी और उनके पास इतने पैसे नहीं थे. इसके बाद डॉक्टरों ने आयशा के परिवार का संपर्क ऐश्वर्यम ट्रस्ट से कराया, जिसने उनकी आर्थिक मदद की. आयशा रशन 18 महीने तक भारत में रहीं. छह महीने पहले ट्रांसप्लांट करने के लिए एक हार्ट मिला, जिसका डोनर कोई भारतीय था. हार्ट को दिल्ली से लाया गया था. एमजीएम हेल्थकेयर ने आयशा की हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी मुफ्त में की. 

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'पाकिस्तान में अच्छी चिकित्सा सुविधाएं नहीं'

उम्मीद और जिंदगी से भरपूर आयशा एक फैशन डिजाइनर बनना चाहती हैं. उन्होंने अपने सफल हार्ट ट्रांसप्लांटेशन के बाद कहा, 'मैं दिल पाकर बहुत खुश हूं. मैं समर्थन के लिए भारत सरकार को धन्यवाद देती हूं और डॉक्टरों को भी धन्यवाद देती हूं.' उनकी मां सनोबर ने कहा, 'जब आयशा को भारत लाया गया तो उसके जीवित बचने की मात्र 10% उम्मीद थी. सच कहूं तो, भारत की तुलना में पाकिस्तान में कोई अच्छी चिकित्सा सुविधाएं नहीं हैं.

'भारत और यहां के डॉक्टर दोनों बहुत शानदार'

उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि भारत बहुत फ्रेंडली है. जब पाकिस्तान में डॉक्टरों ने कहा कि वहां ट्रांसप्लांट की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो हमने डॉ. केआर बालाकृष्णन से संपर्क किया. मैं इलाज के लिए भारत सरकार और डॉक्टरों को धन्यवाद देती हूं. भारत और यहां के डॉक्टर बहुत शानदार हैं.' डॉ. केआर बालाकृष्णन ने कहा, 'वह मेरी बेटी की तरह है… हमारे लिए हर जिंदगी मायने रखती है.'

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