Advertisement

हाथरस से पहले प्रयागराज, वाराणसी और प्रतापगढ़ में भी हुई थी भगदड़ में मौतें, जानिए जांच क्या कोई एक्शन हुआ?

हाथरस में एक सत्संग में मची भगदड़ से 121 लोगों की मौत हो गई है. इस हादसे के बाद से ही लगातार सवाल उठ रहे हैं कि ऐसे हादसों के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है. वर्ष 2013 में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन में प्रकाशित “धार्मिक उत्सवों के दौरान लोगों की भगदड़” नामक एक स्टडी के अनुसार, भारत में होने वाली 79% भगदड़ धार्मिक सभाओं और तीर्थयात्राओं के कारण होती हैं.

हाथरस में मची भगदड़ के बाद की एक तस्वीर हाथरस में मची भगदड़ के बाद की एक तस्वीर
डॉली चिंगखम
  • नई दिल्ली,
  • 04 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 4:22 PM IST

उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक सत्संग में भगदड़ मचने से 121 लोगों की मौत हो गई, जिनमें से ज़्यादातर महिलाएं और बच्चे थे. यह हाल के वर्षों में हुई सबसे भयानक घटनाओं में से एक है. इस सत्संग का आयोजन नारायण साकार हरि ने किया था जो साकार विश्व हरि या भोले बाबा के नाम से भी जाना जाता है. इस दर्दनाक हादसे के बाद उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय आयोग का गठन किया. इस मामले में एफ़आईआर भी दर्ज की गई है लेकिन इसमें नारायण साकार का नाम शामिल नहीं है.

Advertisement

हाथरस कोई अकेली घटना नहीं है और भारत में पिछले कई सालों से धार्मिक सभाओं/सत्संगों में होने वाली जानलेवा भगदड़ का लंबा इतिहास रहा है. यहां हम उत्तर प्रदेश में हुई भगदड़ की तीन प्रमुख घटनाओं के बारे में बता रहे हैं. यह भी बता रहे हैं कि भगदड़ के बाद क्या होता है और कैसे जांच को अंजाम दिया जाता है.

2013 कुंभ भगदड़:

घटना: 10 फरवरी, 2013 को प्रयागराज में रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मच गई थी, जिसमें 40 से ज़्यादा लोग मारे गए. उस समय की रिपोर्ट में प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया गया है कि जब रेलवे अधिकारियों ने आखिरी समय में प्लेटफ़ॉर्म को बदलने की घोषणा की, तो लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी.

ये भी पढ़ें: 'मैंने अवतार लिया है, प्रलय भी ला सकता हूं...', सत्संग के नाम पर कैसे अनुयायियों को बेवकूफ बनाता था हाथरस वाला 'भोले बाबा'

Advertisement

सरकारी तंत्र की उदासीनता: भगदड़ के दो दिन बाद 12 फरवरी, 2013 को सीएम अखिलेश यादव ने इलाहाबाद का दौरा किया. तत्कालीन शहरी विकास मंत्री आज़म खान, जो इलाहाबाद में महाकुंभ उत्सव के प्रभारी थे, ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया, लेकिन सीएम ने पवित्र शहर में "शानदार इंतजामों" के उत्सव के प्रभारी के रूप में खान के काम की तारीफ करते हुए उनका इस्तीफा अस्वीकार कर दिया. इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर भगदड़ के 24 घंटे के भीतर, राज्य सरकार और रेलवे के बीच आरोप-प्रत्यारोप का खेल शुरू हो गया.

जांच का आदेश: 17 फरवरी को, यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश ओंकारेश्वर भट्ट द्वारा भगदड़ की न्यायिक जांच का आदेश दिया. तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इससे पहले उत्तर प्रदेश राजस्व बोर्ड के अध्यक्ष जगन मैथ्यूज को जांच का आदेश दिया था.

क्या निकला जांच का नतीजा?: 14 अगस्त 2014 को न्यायिक आयोग की रिपोर्ट तत्कालीन यूपी के राज्यपाल राम नाइक को सौंपी गई. रिपोर्ट में रेलवे, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम, इलाहाबाद प्रशासन और पुलिस को भगदड़ के लिए दोषी ठहराया गया था.  जुलाई 2014 में, CAG ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें भगदड़ से संबंधित कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया. रिपोर्ट में बताया गया कि मेला शुरू होने के बाद भी 59 प्रतिशत निर्माण कार्य और 19 प्रतिशत आपूर्ति पूरी नहीं हुई थी. इसके अलावा स्वीकृत 111 निर्माण कार्यों में से 81 तकनीकी जांच के बिना किए गए थे. CAG की रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि महाकुंभ के लिए काम करने वाले विभिन्न विभागों और संस्थानों के बीच योजना बनाने या तालमेल में कोई वैज्ञानिक मापदंड नहीं अपनाए गए और कोई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार नहीं की गई.

Advertisement

स्टेटस रिपोर्ट: जनवरी 2019 में, रिपोर्ट सामने आईं कि योगी सरकार ने राज्य विधानसभा में भगदड़ पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पेश करने की मंजूरी दे दी थी. हालांकि, 2019 के बाद की रिपोर्ट से संबंधित कोई ताजा जानकारी पब्लिक डोमेन में नहीं है.

ये भी पढ़ें: फैक्ट चेक: हाथरस में भगदड़ मचने से ठीक पहले का नहीं, ये राजस्थान में हुए सत्संग का पुराना वीडियो है

2016 वाराणसी भगदड़:

घटना: 15 अक्टूबर 2016 को वाराणसी में भीड़भाड़ वाले राजघाट गंगा पुल पर मची भगदड़ में 25 लोगों की मौत हो गई थी. जय गुरुदेव पंथ के अनुयायी बड़ी संख्या में गंगा के किनारे डोमरी गांव में आयोजित दो दिवसीय सत्संग में जा रहे थे.

सरकारी उदासीनता: दिवंगत जय गुरुदेव बाबा के शिष्य पंकज महाराज ने इस घटना पर दुख जताया था, लेकिन संगठन की ओर से किसी भी तरह की कुव्यवस्था से पल्ला झाड़ लिया. उन्होंने कहा था कि भविष्य में वे इससे भी बड़े आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित करेंगे.

जांच के आदेश: 18 अक्टूबर 2016 को तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजमणि चौहान की अध्यक्षता में घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए थे, जिन्हें दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया था. वाराणसी भगदड़ को लेकर जय गुरुदेव पंथ के नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. पंकज महाराज पर धार्मिक समागम में शामिल होने वाली भीड़ के आकार के बारे में जिला अधिकारियों को गलत जानकारी देने के लिए मामला दर्ज किया गया था.

Advertisement

जांच में क्या निकला?: 23 जुलाई 2019 को, राज्य सरकार ने विधानसभा में ‘शोभा यात्रा’ के दौरान वाराणसी के राजघाट पर हुई भगदड़ की कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) पेश की. रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस ने जय गुरुदेव संस्था के मुख्य आरोपी पंकज महाराज के खिलाफ कार्रवाई नहीं की. आयोग ने पाया कि पंकज महाराज ने भारी भीड़ के बारे में पुलिस और जिला प्रशासन को अंधेरे में रखा था जबकि 3,000 लोगों को शोभा यात्रा में शामिल होने की अनुमति मांगी थी. 

आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने पंकज महाराज के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. इसने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे. आयोग ने भविष्य में ऐसे किसी भी कार्यक्रम के आयोजन के लिए जय गुरुदेव संस्था के किसी भी दावे की पुष्टि करने और उसके बाद ही अनुमति देने की सिफारिश की थी.

क्या हुआ एक्शन: सीएम योगी आदित्यनाथ ने 2019 में एटीआर पर हस्ताक्षर किए और सदन को सूचित किया कि आयोग की सिफारिशों को लागू कर दिया गया है.

ये भी पढ़ें: हाथरस भगदड़ के बाद 'भोले बाबा' के फरार होने की पूरी कहानी, इन 4 लोगों से की थी बात, कॉल डिटेल से हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Advertisement

प्रतापगढ़ भगदड़ 2010
घटना:
4 मार्च 2010 को प्रतापगढ़ के राम जानकी मंदिर में भगदड़ मचने से 63 लोगों की मौत हो गई और 100 से ज़्यादा लोग घायल हो गए. माना जाता है कि यह घटना मंदिर के अधूरे बने गेट के गिरने से हुई, जिससे कृपालु महाराज की पत्नी की पुण्यतिथि पर मुफ़्त भोजन और कपड़े लेने के लिए इकट्ठा हुए भक्तों में अफरा-तफरी मच गई. 5 मार्च को प्रबंधन के खिलाफ़ लापरवाही के कारण कथित तौर पर मौत का मामला दर्ज किया गया.

सरकारी तंत्र की उदासीनता: भगदड़ के बाद वहां मारे गए लोगों के दाह संस्कार की कोई व्यवस्था नहीं की गई. स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन दाह संस्कार के लिए पर्याप्त जलाऊ लकड़ी भी मुहैया नहीं करा सका. ज़ी न्यूज़ की एक रिपोर्ट में कृपालुजी महाराज के हवाले से लोगों को इस त्रासदी के लिए दोषी ठहराया गया है.  रिपोर्ट में कृपालुजी महाराज के हवाले से कहा गया, "हमने मुफ़्त भोजन के लिए किसी को आमंत्रित नहीं किया था. बड़ी संख्या में भक्त अपने आप ही मेरे आश्रम में आ गए, इसलिए जो कुछ हुआ उसके लिए वे खुद ही ज़िम्मेदार हैं." 

जांच के आदेश: तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने भगदड़ की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए. कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा करते हुए बताया था कि जांच इलाहाबाद के संभागीय आयुक्त द्वारा की जाएगी, जिन्हें 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का काम सौंपा गया है.

Advertisement

क्या रहा जांच का नतीजा?: प्रारंभिक जांच में पुण्यतिथि समारोह के प्रबंधन और आयोजकों तथा जगद्गुरु कृपालु भक्ति धाम ट्रस्ट के ट्रस्टियों को खराब व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण उपायों के लिए दोषी ठहराया गया. जांच में पाया गया कि आश्रम के प्रवेश द्वार का निर्माण भी अधूरा था, जिसके ढहने के कारण यह त्रासदी हुई.

आयोजकों ने कार्यक्रम के बारे में प्रतापगढ़ के अतिरिक्त एसपी को सूचित किया था, जो 4 मार्च, 2010 को दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित किया जाना था. हालांकि, आयोजकों द्वारा वहां आने वाले लोगों के नियंत्रण के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी और 4 मार्च को सुबह 9 बजे के आसपास आश्रम में भीड़ जमा होनी शुरू हो गई थी. जांच पैनल ने पाया कि वहां कोई भीड़ को काबू में करने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए थे. अगर ऐसा होता तो भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती थी और बाद में भगदड़ से बचा जा सकता था.

क्या हुआ एक्शन: 5 मार्च 2010 को कुंडा पुलिस स्टेशन में आश्रम परिसर के आयोजक और प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन मामले में किसी का नाम नहीं लिया गया था.

क्या भारत भीड़ से होने वाली दुर्घटनाओं का हॉटस्पॉट बन गया है?

Advertisement

वर्ष 2013 में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन में प्रकाशित “धार्मिक उत्सवों के दौरान लोगों की भगदड़” नामक एक स्टडी के अनुसार, भारत में होने वाली 79% भगदड़ धार्मिक सभाओं और तीर्थयात्राओं के कारण होती हैं. इसी स्टडी में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि भारत में धार्मिक सामूहिक समारोह अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित किए जाते हैं, जिससे आयोजन स्थल में कम जगह और बुनियादी ढाँचे की सीमाओं के कारण जोखिम का खतरा बढ़ जाता है.

स्टडी में बताया गया है कि साल 2005, 2008 और 2011 में मंधार देवी मंदिर (महाराष्ट्र), चामुंडा देवी मंदिर (राजस्थान), नैना देवी मंदिर (हिमाचल प्रदेश) और सबरीमाला (केरल) के धार्मिक आयोजनों या उत्सवों में लोगों में मची भगदड़ के कारण 300 से अधिक लोगों के हताहत होने की सूचना मिली थी.

सेफ्टी साइंस में 2023 में प्रकाशित “प्रेस रिपोर्टों के विश्लेषण के आधार पर भीड़ जनित दुर्घटनाओं में रुझान” शीर्षक वाली एक स्टडी के अनुसार, भारत तेजी से भीड़ से होने वाली दुर्घटनाओं का केंद्र बनता जा रहा है, धार्मिक उत्सव इस खतरनाक भगदड़ के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार दिख रहे हैं. स्टडी में पाया गया कि भारत और कुछ हद तक पश्चिमी अफ्रीका भीड़ दुर्घटनाओं के लिए हॉट स्पॉट प्रतीत होते हैं. स्टडी के अनुसार, 2000 से 2019 के बीच भारत में हुई लगभग 70% दुर्घटनाएँ (कुल 48 में से 33) धार्मिक आयोजनों से संबंधित थीं.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement