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बंगालः आरजी कर केस में प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं पर पुलिस अत्याचार की जांच करेगी SIT

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा दिए गए सीबीआई जांच के आदेश को रद्द कर दिया. दरअसल, राज्य सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

आरजी कर केस में डॉक्टरों ने बड़ा प्रदर्शन किया था (फाइल फोटो) आरजी कर केस में डॉक्टरों ने बड़ा प्रदर्शन किया था (फाइल फोटो)
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 26 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 7:01 AM IST

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के रेप और मर्डर के खिलाफ प्रदर्शन करने वाली 2 महिलाओं को राज्य पुलिस द्वारा टॉर्चर करने के आरोपों की जांच एसआईटी करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर से रेप और हत्या के खिलाफ प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाली 2 महिलाओं की कथित पुलिस कस्टडी के दौरान की गई यातना की जांच के लिए SIT का गठन किया है. 

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सुप्रीम कोर्ट ने SIT जांच की मॉनिटरिंग के लिए हाईकोर्ट से एक बेंच गठित करने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIT हाईकोर्ट द्वारा पहले की गई टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना जांच करे.

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा दिए गए सीबीआई जांच के आदेश को रद्द कर दिया. दरअसल, राज्य सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. दोनों महिलाओं ने हाईकोर्ट को बताया था कि जब एक प्रदर्शनकारी ने टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी की बेटी के खिलाफ टिप्पणी की, तो उन्हें उन आरोपों में बेवजह गिरफ्तार किया गया था.

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कलकत्ता हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के निर्देश देने वाले आदेश को खारिज कर दिया. कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल जज पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि सुपरिटेंडेंट डायमंड हार्बर उप-सुधार गृह, दक्षिण 24 परगना द्वारा पेश की गई मेडिकल रिपोर्ट मे ये साफ है पुलिस हिरासत में रहते हुए शारीरिक यातना दी गई थी.

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हाईकोर्ट की एकल जज पीठ के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने चीफ जस्टिस की अगुआई वाली बेंच के समक्ष चुनौती दी थी, खंडपीठ ने 6 नवंबर को राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी थी. बता दें कि पीड़िता को 7 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था, वह 8 से 11 सितंबर तक पुलिस हिरासत में थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करना जरूरी नहीं है, उस आदेश से इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने से न केवल प्रमुख जांच एजेंसी पर बोझ पड़ता है, बल्कि राज्य पुलिस अधिकारियों का मनोबल भी गिराने वाला प्रभाव भी पड़ता है, ये मानना ठीक नहीं होगा कि पश्चिम बंगाल कैडर के सीनियर अधिकारी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच करने में अक्षम हैं, इसलिए हमने पश्चिम बंगाल सरकार से कुछ ऐसे सीनियर अधिकारियों की लिस्ट मांगी थी जो राज्य से संबंधित नहीं हैं. राज्य सरकार ने 7 अधिकारियों की लिस्ट भेजी है, एसआईटी को तत्काल जांच का जिम्मा लेना चाहिए. एसआईटी को कलकत्ता हाईकोर्ट में हर सप्ताह स्टेटस रिपोर्ट देनी चाहिए. हम हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध करते हैं कि वे एक पीठ का गठन करें जिसके समक्ष एसआईटी अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी. साथ ही हाईकोर्ट की पूर्व टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना एसआईटी जांच करे. अपनी दिक्कतों को लेकर पीड़िता तुरंत SIT से सम्पर्क कर सकती है.

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