
भोपाल गैस त्रासदी को 40 साल हो गए, लेकिन आज भी भोपाल के सीने पर इसके घावों के निशान ताजा हैं. इस त्रासदी के मौके पर 30 से अधिक जन्मजात विकलांग बच्चों ने रविवार को श्रद्धांजलि अर्पित की. ये बच्चे यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के सामने खड़े थे, जो 1984 में गैस रिसाव का केंद्र बनी थी. इन बच्चों में मस्तिष्क पक्षाघात, डाउन सिंड्रोम, मांसपेशी विकार और मानसिक विकलांगता जैसी बीमारियां हैं.
'हमारा क्या दोष था'
चिंगारी ट्रस्ट के तहत इकट्ठा हुआ इन बच्चों ने हाथ में मोमबत्तियां और तख्तियां थाम रखी थीं. इन पर लिखा था “हमारा क्या दोष था?” और "न्याय चाहिए." इन बच्चों का कहना था कि वे जन्म से विकलांग नहीं हैं, बल्कि यूनियन कार्बाइड के कारण हुए गैस रिसाव से प्रभावित हुए हैं. उनका उद्देश्य दुनिया को यह बताना था कि ऐसी त्रासदी से हमें शिक्षा लेनी चाहिए ताकि भविष्य में यह न हो.
यूनियन कार्बाइड से बच्चों पर पड़ा है असर
चिंगारी ट्रस्ट की स्पीच थैरेपिस्ट नौशीन खान ने ने कहा, "ये बच्चे प्राकृतिक विकलांगता से नहीं, बल्कि यूनियन कार्बाइड के जहर के कारण विकलांग हुए हैं. हम इस श्रद्धांजलि के जरिए उस दर्द और त्रासदी को याद करना चाहते हैं." चिंगारी ट्रस्ट की प्रबंध ट्रस्टी राशीदा बी ने बताया कि ट्रस्ट पिछले 18 वर्षों से उन बच्चों की मदद कर रहा है, जो गैस त्रासदी और पानी के प्रदूषण से प्रभावित परिवारों में जन्मे हैं. फिलहाल ट्रस्ट में 1,333 ऐसे बच्चे रजिस्टर्ड हैं, लेकिन वित्तीय समस्या के कारण केवल 300 बच्चों को ही मुफ्त में इलाज और सेवाएं दी जा रही हैं. इनमें फिजियोथेरेपी, स्पीच थैरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और विशेष शिक्षा शामिल हैं.
इन बच्चों ने इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया कि गैस त्रासदी से प्रभावित परिवारों के बच्चों को न्याय मिलना चाहिए और इस त्रासदी को कभी भूलना नहीं चाहिए.