
मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. ठीक 40 साल पहले यानी 1984 में यूनियन कार्बाइड कारखाने में खतरनाक गैस मिथाइल आइसोनेटे लीक होने से 8 हजार से अधिक लोगों की जान चली गई थी, जबकि हजारों लोग प्रभावित होकर अपंगता और अंधेपन के शिकार हुए थे.
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर यूनियन कार्बाइड के खतरनाक कचरे को पीथमपुर में जलाने पर रोक लगाने की गुहार लगाई गई है. याचिका में कहा गया है कि यूनियन कार्बाइड के खतरनाक कचरे को भोपाल से पीथमपुर ले जाने का फैसला लेते समय पीथमपुर के लोगों से कोई सलाह या सहमति नहीं ली गई.
पीथमपुर में रहने वालों को रेडिएशन का खतरा हो सकता है, अगर वहां एसा होता है, तो पीथमपुर में उचित मेडिकल फैसिलिटी भी मौजूद नहीं हैं, इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा.
वहीं, पीथमपुर इंडस्ट्रियल एरिया में यूनियन कार्बाइड से जुड़े जहरीले कचरे के निपटान लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है. कई लोग आत्मदाह तक की कोशिशें कर चुके हैं, इसके बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, चीफ सेक्रेटरी अनुराग जैन, एडवोकेट जनरल और लॉ सेक्रेटरी मौजूद थे.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जनता को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनके हितों और सुरक्षा को प्राथमिकता देती है और इसलिए निर्णय लिया गया है कि जनभावना को कोर्ट के सामने रखेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत का आदेश आने तक पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का कचरा नहीं जलाया जाएगा. उन्होंने कहा कि यूनियन कार्बाइड के कचरे पर फैलाए जा रहे भ्रम को लेकर पीथमपुर में एक जरूरी बैठक हुई. बैठक में उपस्थित सभी सदस्य इस बात पर एकमत हैं कि हमारा निर्णय न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप है और हम यह सुनिश्चित करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं कि जनता को कोई नुकसान न हो.