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2004 के फॉर्मूले से 2024 फतह करने की तैयारी? विपक्ष की महाबैठक में कांग्रेस का प्लान

बीजेपी समर्थित एनडीए हो या कांग्रेस समर्थित यूपीए. दोनों के लिए ही 18 जुलाई का दिन अहम है. जहां बेंगलुरु में विपक्ष की बड़ी बैठक होनी है तो दिल्ली में NDA के भी सभी 38 दल इस बैठक में शामिल होंगे. भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस इस बार 2004 के अपने फॉर्मूले को दोहरा सकती है.

2024 को जीतने के लिए 2004 का फॉर्मूला अपनाएगी कांग्रेस? 2024 को जीतने के लिए 2004 का फॉर्मूला अपनाएगी कांग्रेस?
मौसमी सिंह/हिमांशु मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 17 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 6:45 AM IST

आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने कमर कस ली है. भाजपा समर्थित NDA हो, या कांग्रेस समर्थिक UPA दल. भाजपा के खिलाफ विपक्ष की पूरी रणनीति, ये बैठक ऐसे वक्त में रखी गई है, जब संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने जा रहा है. माना जा रहा है कि संसद के मॉनसून सत्र में विपक्षी एकता की मिसाल देखने को मिल सकती है. विपक्षी दलों के इस महाजुटान को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि पहली बार यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी इस तरह की कवायद में खुद को शामिल कर रही हैं और उसे लीड करने की कोशिश के तौर पर आगे बढ़ी हैं.

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उनके नेतृत्व करने से सहयोगी दलों के भीतर चल रहे मनमुटाव या शंकाओं का समाधान हो सकता है. दूसरी बात, शरद पवार और ममता बनर्जी समेत जो नेता राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करने में असहजता महसूस कर रहे हैं, वो खुलकर सोनिया के साथ कदमताल कर सकते हैं. विपक्षी दलों के कई नेताओं के साथ सोनिया गांधी के अच्छे रिश्ते रहे हैं.

विपक्ष की एकजुटता से सधेगा 2024 का खेल?

2024 की लड़ाई कितनी तगड़ी होने वाली है, बेंगलुरु में जुट रहे विपक्ष की तस्वीरें उसकी गवाही दे रही हैं. लोकसभा चुनाव में अब 8-9 महीने का वक्त बचा है और चुनावी घमासान के लिए पाला तैयार हो चुका है. एक तरफ विपक्ष अपना कुनबा बढ़ा रहा है और बीजेपी भी एनडीए का विस्तार कर रही है. सबसे पहले बेंगलुरु में एक जुट होने वाले विपक्षी दलों की पूरी लिस्ट पर नजर डाल लेते हैं.

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1- कांग्रेस

2- टीएमसी

3- जेडीयू

4- आरजेडी

5- एनसीपी

6- सीपीएम

7- सीपीआई

8- समाजवादी पार्टी

9- डीएमके

10- जेएमएम

11- आम आदमी पार्टी

12- शिवसेना (उद्धव  गुट)

13- नेशनल कॉन्फ्रेंस

14- पीडीपी

15- आरएलडी

16- आईयूएमएल

17- केरल कांग्रेस (एम)

18- एमडीएमके

19- वीसीके

20-  आरएसपी

21- केरल कांग्रेस (जोसेफ)

22- केएमडीके

23- अपना दल कमेरावादी

24- एमएमके

25- सीपीआईएमएल

26- एआईएफबी

कर्नाटक और हिमाचल की जीत से बढ़ा हौसला

हम आपको बता दें कि कांग्रेस तो विपक्षी एकता का प्लान पहले से बनाकर बैठी थी, लेकिन कई दलों में जोश उस वक्त आया, जब कांग्रेस ने कर्नाटक का किला फतेह कर लिया. कर्नाटक विधानसभा चुनाव में 135 सीटें जीतकर ना सिर्फ कांग्रेस का मनोबल बढ़ा है, बल्कि कहीं ना कहीं विपक्ष को भी लगने लगा कि 2024 में मोदी का विजय रथ रोका जा सकता है. कांग्रेस ने 20 मई को कर्नाटक सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में विपक्ष को जोड़ा. 

2004 वाले प्लान से 2024 फतह करने की तैयारी

इस बार कांग्रेस के पास एक प्लान 2004 वाला भी है. आपको बता दें कि रायपुर के अधिवेशन में कांग्रेस ने एक प्लान बनाया था, 2024 में 2004 वाला फॉर्मला. दरअसल 2004 में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए से मुकाबला करने के लिए कांग्रेस चुनाव से पहले पांच राज्यों में समान विचारधारा वाले 6 दलों के साथ गठबंधन करके मैदान में उतरी थी. कांग्रेस ने महाराष्ट्र में एनसीपी, आंध्र प्रदेश में टीआरएस, तमिलनाडु में डीएमके, झारखंड में जेएमएम और बिहार में आरजेडी-एलजेपी जैसे क्षेत्रीय दलों के साथ, मिलकर चुनाव लड़ा था. कांग्रेस को इन 5 राज्यों में बड़ा चुनावी फायदा हुआ था. कांग्रेस इन 5 राज्यों की 188 लोकसभा सीटों में से 114 सीटें जीतने में कामयाब रही थी, जबकि सहयोगी दल 56 सीटें जीतने में सफल रहे.

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कांग्रेस कर्नाटक जीत गई, हिमाचल प्रदेश भी जीत गई और अब आगे मध्य प्रदेश औऱ राजस्थान का चुनाव है. कांग्रेस वहां भी दम भर रही है और 2024 के लोकसभा चुनावों में मोदी को हराने के लिए संपूर्ण विपक्ष के साथ हर समझौता करने की स्थिति में है. इसीलिए खुद सोनिया गांधी भी बेंगलुरु की बैठक में हिस्सा लेने पहुंची हैं.

इस बैठक से पहले एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या विपक्षी दलों के गठजोड़ से 2024 में मोदी का तोड़ निकल पाएगा. क्या विपक्ष का एकता वाला बल 2024 में बीजेपी को पैदल कर देगा. सवाल कई और इन सवालों का जवाब आज बेंगलुरु में चल रहे विपक्षी दलों के मंथन और कल होने वाली NDA की बैठक में छिपा है. 

विपक्षी पार्टियों की कितनी ताकत?

विपक्ष की बैठक के मुद्दे क्या?

टॉप सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बैठक में 2024 चुनाव से पहले विपक्षी दलों को लेकर तैयार हो रहे गठबंधन का नाम क्या होगा, इस पर मंथन हुआ. मीटिंग में 3 से चार नाम पर चर्चा हुई है. अभी मुहर नहीं लगी है. बेंगलुरु की दो दिवसीय बैठक में गठबंधन का नाम तय हो सकता है. 

मंथन का दूसरा बड़ा मुद्दा- 2024 में विपक्षी गठबंधन के लिए जीत का नक्शा क्या होगा. अलग-अलग क्षेत्र से आने वाले दलों एक बड़े लक्ष्य के लिए एक साथ कैसे जोड़े रखा जाए इसपर डिटेल में चर्चा हुई. 

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तीसरा मुद्दा 2024 में मोदी के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान क्या होगा, सभी दल एक कॉमन एजेंडे के तहत अपने-अपने इलाकों में अभियान चलाएंगे या फिर विपक्षी दल मिलकर एक राष्ट्रव्यापी यात्रा निकालेंगे, ऐसे कई विकल्पों पर चर्चा हुई. 

चौथा मुद्दा अभी किसे अपने साथ जोड़ना बाकी हैं, मीटिंग के दौरान BSP और BJD को लेकर चर्चा हुई. इन दलों को साथ लाने की कोशिश की जाएगी, जबकि वाईएसआर और बीआरएस से दूरी बनाए रखने को लेकर चर्चा हुई है. 

पांचवा मुद्दा पटना की बैठक में क्षेत्रीय क्षत्रपों के साथ सीट शेयरिंग को लेकर बात हुई थी, आज की मीटिंग में विनेबिलिटी को आधार बनाकर सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर चर्चा हुई हैं, कई और राउंड की चर्चा के बाद सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तैयार होगा.

BJP भी कर रही ऐसी ही बैठक

विपक्ष के इस गठजोड़ को देखते हुए ही, बीजेपी ने अपने नए और पुराने सहयोगियों को दोबारा गोलबंद करने की तैयारी शुरू कर दी है. ऐसे में सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को 2024 में अपनी सीटों में बड़ी गिरावट की चिंता सता रही है.

इधर BJP ने भी 18 जुलाई को यानी कल NDA की बैठक बुलाई है. दावा यही है कि एनडीए की बैठक में 38 पार्टियां शामिल होंगी. यानी विपक्षी एकता के गुलदस्ते में 26 अलग-अलग फूल हैं तो एनडीए के गुलदस्ते में अलग-अलग 38 फूल हैं. मतलब 2024 से पहले दोनों ही गुट अपना दमखम दिखाने में जुट गए हैं.

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बेंगलुरु में विपक्षी मोर्चे के शक्ति प्रदर्शन के बीच कल दिल्ली में एनडीए का शक्ति प्रदर्शन होगा. मीटिंग से ठीक पहले ओम प्रकाश राजभर की NDA में वापसी हुई, यूपी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी छोड़कर गए दारा सिंह चौहान की वापसी हुई. तो दिल्ली में चिराग पासवान ने भी NDA का दामन थाम लिया. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का दावा यही है कि NDA में आना-जाना दलों पर निर्भर हैं, बीजेपी किसी को न्योता नहीं भेजती.

BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस

BJP ने पुराने दलों को साथ जोड़ा

महाराष्ट्र में एनडीए का कुनबा टूटा, उद्धव एनडीए से आउट हुए तो शिवसेना में बगावत का झंडा उठाने वाले एकनाथ शिंदे दल को तोड़कर बीते साल एनडीए में शामिल हो गए. बता यही नहीं रुकी. बीते दिनों NCP के अजित पवार भी चाचा से बगावत कर एनडीए में शामिल हो गए. मतलब बीजेपी ने महाराष्ट्र में अपनी ताकत बढ़ाई. बिहार में भी एनडीए छोड़कर नीतीश कुमार गए तो चिराग पासवान, जीतनराम मांझी, उपेन्द्र कुशवाह से दूर मिटाने हुए बीजेपी ने एनडीए का कुनबा बढ़ाया.

दरअसल विपक्षी खेमे को काउंटर करने के लिए बीजेपी ने एनडीए की बैठक बुलाकर माहौल बनाने की कोशिश की है. हालांकि बीजेपी की अपने पुराने सहयोगी अकाली दल और टीडीपी से बात नहीं बन पाई है. यानी एनडीए की बैठक में टीडीपी और अकाली दल के शामिल होने की गुंजाइश कम है. अकाली दल से सीट शेयरिंग को लेकर मामला उलझा हुआ है तो जगन रेड्डी के साथ केंद्र सरकार के रिश्ते टीडीपी की राह में रोड़ा है. बीजेपी की मानें तो कोशिश यही है कि दरवाजे सभी के लिए खुले हैं, लेकिन अगर कोई नहीं आता तो भी तमाम दल के गठजोड़ से बना एनडीए ताकतवर है.

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