
भारत की हजारों साल की सभ्यता ही भारत के इतिहास की झलक पेश करती है. शायद ये ही वजह है हमेशा जब भी आप इतिहास की झलक देखने उसको निकलने का प्रयास करेंगे तब ही आपको नई कहानी सामने देखने को मिलेगी. पुरातत्व विभाग लगातार इस प्रयास में पिछले कुछ साल से है की देश की पौराणिक धरोहर सामने लाई जाए. इतिहास से देश की जनता को रूबरू कराया. चाहे वो सिनौली में 3500 से 4000 साल पुरानी सभ्यता को सामने लाने का प्रयास हो या फिर हरियाणा के रखिगार्ही में हजारों साल के अवशेष हो, ऐसे में अब आर्कोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने देश की 35 जगहों पर नए इतिहास को सामने लाने का फैसला किया है. ये 35 स्थान देश के 15 राज्यों में चिन्हित किए गए हैं.
इस नई खोज में पुरातत्व विभाग की कोशिश है कि अब तक सामने आ चुके अवशेषों के साथ नई सभ्यता को लोगों के सामने लाया जाए. इस नई खोज में बागपत की तिलवारा सकिन गांव में अब तक चांदी के सिक्के और मौर्य काल के सिक्के मिले है , इसके अलावा यहां पर कई मिट्टी के बर्तन भी एक्सकेवेशन में सामने आए जो मौर्य और शिंगू साम्राज्य के समय के बताए गए है.
इसके अलावा दिल्ली के पुराने किले को भी इस नई खोज का हिस्सा बनाया गया है. रखिगार्ही को लेकर केंद्र वहां के अवशेषों के लिए म्यूजियम पहले ही बना जा चुका है. अब यहां पर एक्सकेवेशन में जमीन के नीचे करीब 30 मीटर से ज्यादा के टारगेट को रख कर नई सभ्यता को सामने लाने का प्रयास किया जायेगा.
इन 31 स्थानों की लिस्ट में 3 स्थान महाराष्ट्र में ,3 उत्तर प्रदेश में और 3 मध्य प्रदेश में चिन्हित किए गए हैं। इस बार काफी समय से मध्य प्रदेश के मुरैना के बटेश्वर मंदिरों की खोज को भी इसमें शामिल किया गया है, जो काफी समय लंबित थी और करीब 1000 साल से ज्यादा के इतिहास की झलक अब तक देखने को मिली है. पुरातत्व विभाग के अधिकारियों की मानें तो अभी इन 31 स्थानों को नई खोज के लिए तय किया गया है. इसके अलावा ASI उन स्थानों पर भी आगे एक्सकेवेशन करेगा जहां पर कोई नए अवशेष दर्ज किए जायेंगे.