
बिहार में एक बार फिर जहरीली शराब पीने से मौतें हुईं हैं. बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने छपरा में जहरीली शराब पीने से 100 से ज्यादा लोगों की मौत होने का दावा किया है.
सुशील मोदी ने नीतीश सरकार पर मौतों का आंकड़ा छिपाने का आरोप भी लगाया है. मोदी ने दावा कि बिहार सरकार जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या छिपा रही है. प्रशासन परिजनों पर बिना पोस्टमॉर्टम के ही अंतिम संस्कार करने का दबाव बना रहा है.
मोदी ने NCRB के आंकड़ों का भी हवाला दिया. उन्होंने कहा कि NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, 6 साल में बिहार में जहरीली शराब पीने से 23 लोगों की मौत हुई है, जो हास्यास्पद है. NCRB को राज्य सरकार ही आंकड़े भेजती है.
बिहार में शराबबंदी को लागू हुए साढ़े 6 साल से ज्यादा का समय बीत चुका है. लेकिन, हर साल जहरीली शराब पीने से मौतें होने की खबरें सामने आती रहतीं हैं. हालांकि, सरकारी आंकड़ों में ये नंबर बहुत ही कम है. NCRB के मुताबिक, पिछले साल बिहार में जहरीली शराब पीने से दो लोगों की मौत हुई थी. वहीं, 2016 से 2021 के बीच 23 लोगों की मौत ही हुई.
किन-किन राज्यों में शराबबंदी?
बिहार इकलौता राज्य नहीं है, जहां पूरी तरह से शराबबंदी लागू है. देश के कई राज्यों में शराबबंदी लागू है. गुजरात पहला राज्य था, जिसने शराबबंदी लागू की थी.
1960 में बॉम्बे से अलग होकर जब गुजरात बना, तभी से वहां शराबबंदी लागू है. उसके बावजद भी बीते 6 साल में गुजरात में 54 लोगों की मौत जहरीली शराब पीने से हो गई. इसी साल जुलाई में गुजरात के बाटोद जिले के रोजिद गांव में कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से दर्जनों लोगों की मौत हो गई थी.
मिजोरम, नागालैंड और लक्षद्वीप में भी पूरी तरह से शराबबंदी लागू है. मणिपुर में भी 1991 से शराबबंदी थी, लेकिन अब सरकार ने इसमें थोड़ी छूट दे दी है. सरकार का कहना था कि अवैध शराब पीने से स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को कम करने और रेवेन्यू बढ़ाने के लिए ये फैसला लिया गया है.
कुल मिलाकर देखा जाए तो बिहार, गुजरात, मिजोरम, नागालैंड और लक्षद्वीप में पूरी तरह से शराबबंदी लागू है.
इन राज्यों में हो चुके हैं प्रयोग?
शराबबंदी को लेकर प्रयोग होते रहे हैं. कई राज्यों में भी शराबबंदी को पहले लागू किया गया, लेकिन बाद में उसे हटा दिया गया है.
आंध्र प्रदेश ने भी 1995 में शराबबंदी को लागू किया था. लेकिन इस बीच सत्ता बदली और चंद्रबाबू नायडू सीएम बन गए. उन्होंने 1997 में 16 महीने पहले शराब पर लगाए गए प्रतिबंध को हटा दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन 16 महीनों में सरकार को 1200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था.
हरियाणा ने भी 1996 में शराबबंदी को लागू किया था, लेकिन दो साल बाद ही 1998 में इस प्रतिबंध को हटा लिया.
मणिपुर ने भी अब अपनी एक्साइज पॉलिसी में बदलाव किया है. यहां 1991 से शराबबंदी लागू थी, लेकिन अब इसमें कुछ छूट दी गई है.
शराबबंदी सफल क्यों नहीं होती?
इसके दो बड़े कारण हैं. पहला तो ये शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब की तस्करी होती रहती है और दूसरा सरकार के रेवेन्यू को नुकसान.
अब जैसे गुजरात में ही 1961 से शराबबंदी लागू है, लेकिन पड़ोसी राज्यों से यहां शराब की तस्करी होती है. इसी साल गुजरात के सूरत में पुलिस ने 56 लाख रुपये की अवैध शराब जब्त की थी. वहीं, गुजरात चुनाव के समय चुनाव आयोग ने करीब 15 करोड़ रुपये की शराब जब्त की थी.
इसके अलावा, शराबबंदी करने से राज्य सरकार के रेवेन्यू को अच्छा-खासा नुकसान पहुंचता है. उदाहरण के लिए, शराबबंदी से पहले बिहार को हर साल लगभग 4 हजार करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिलता था.
मणिपुर सरकार ने भी शराबबंदी के नियमों में ढील इसीलिए ही दी है ताकि रेवेन्यू बढ़ सके. सरकार को नियमों में ढील देने से सालाना 600 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है.