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'लालू यादव के ऑफर पर नीतीश कुमार खामोश क्यों?' प्रशांत किशोर ने उठाया सवाल

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा, "Every dog has its Day, नीतीश कुमार को पता नहीं है कि उनको सत्ता तभी मिलेगी, जब उन्हें BPSC अभ्यर्थी और उनके परिवार वाले वोट करेंगे. नीतीश जानते हैं कि इस साल उनकी विदाई है."

प्रशांत किशोर प्रशांत किशोर
रोहित कुमार सिंह
  • पटना,
  • 03 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 10:16 AM IST

बिहार (Bihar) की राजधानी पटना में बीपीएससी छात्रों का प्रोटेस्ट चल रहा है. अब छात्रों के समर्थन में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर भी आ गए हैं. एक हफ्ते पहले इस आंदोलन में शामिल हुए प्रशांत किशोर अब अनशन पर बैठ गए हैं. प्रशांत किशोर ने आजतक के साथ बातचीत में कहा, "बिहार में पिछले 10 साल से किसी की कोई सुनवाई नहीं हो रही है. सत्ता के अहंकार में नीतीश कुमार की बुद्धि मर गई है."

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प्रशांत किशोर कहते हैं, "2020 विधानसभा चुनाव में बिहार की जनता ने कोरोना के दौरान नीतीश कुमार को सबक सिखाया था और उनकी पार्टी 43 सीट पर आ गई थी. अभी तक नीतीश कुमार कराह रहे हैं. 2025 में जनता नीतीश कुमार का सही से दवाई करेगी. मेरा आमरण अनशन जारी रहेगा."

'बादशाह बनकर घूम रहे नीतीश...'

प्रशांत किशोर ने कहा, "बीपीएससी अभ्यर्थियों के ऊपर लाठी का चोट तो 5 दिन में ठीक हो जाएगा, लेकिन नीतीश कुमार को जब वोट की चोट लगेगी, तो वह कम से कम 5 साल रहेगी. इस बार नीतीश कुमार की राजनीति का खात्मा तय है. नीतीश कुमार आज बादशाह बनकर घूम रहे हैं."

उन्होंने आगे कहा, "Every dog has its Day, नीतीश कुमार को पता नहीं है कि उनको सत्ता तभी मिलेगी, जब उन्हें बीपीएससी अभ्यर्थी और उनके परिवार वाले वोट करेंगे. नीतीश कुमार जानते हैं कि इस साल उनकी विदाई है, इसीलिए वह अहंकार में हैं. आज उन्हें कोई नहीं पूछ रहा है."

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'नाक रगड़ कर आ गए...'

प्रशांत आगे कहते हैं कि INDIA ब्लॉक में मीडिया ने ही नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री उम्मीदवार या उसका संयोजक बना दिया था लेकिन जब उन्हें कुछ नहीं मिला तो वह नाक रगड़ कर आ गए.

प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि पिछले दो दिनों से नीतीश कुमार ने शिगूफा छोड़ा है क्योंकि विधानसभा चुनाव है और बीजेपी को डराने के लिए यह सब हो रहा है कि अगर बीजेपी उनकी सीट कम करेगी तो हम उधर (महागठबंधन) भी जा सकते हैं.
नीतीश कुमार अपना सर कब घुमाते हैं और हाथ कब और क्यों उठाते है, मुझे सब पता है.

उन्होंने आगे कहा कि जब लालू ने नीतीश कुमार को ऑफर दिया, तो देखिए नीतीश कुमार किस तरह से कोई जवाब नहीं दिया. नीतीश अगर लालू का ऑफर स्वीकार कर लेते या मना कर देते तो बात कुछ और होती लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. मामले को लटका कर रखा क्योंकि वह बीजेपी से विधानसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीट लेना चाहते हैं.

'बीजेपी पर दबाव बना रहे नीतीश...'

प्रशांत किशोर ने कहा, "लालू यादव के ऑफर का जवाब नहीं देकर नीतीश कुमार बीजेपी पर दबाव बना रहे हैं. नीतीश के पास 43 विधायक हैं और उनकी चिंता यह है कि बीजेपी से करीब 100 सीट कैसे लिया जाए. नीतीश कुमार को बीजेपी से ज्यादा सीट लड़ने के लिए जीवन में नहीं मिलेगी. 2020 में मैंने नेगोशिएट किया था, तो बीजेपी और नीतीश कुमार बराबर सीट पर लोकसभा चुनाव लड़े थे."

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उन्होंने आगे कहा कि नीतीश कुमार बीजेपी के बराबर की सीट लड़ने के लिए ही नाक रगड़ रहे हैं. वो ऊल-जलूल बोलते हैं. विधानसभा में जो उन्होंने बोला उसे उन्होंने पूरे समाज को शर्मसार किया. नीतीश के ऊपर अब उम्र का असर दिख रहा है. उनको आज भी मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा है. 

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'अपने दम पर चुनाव नहीं लड़ सकते नीतीश...'

प्रशांत किशोर ने कहा, "नीतीश कुमार की राजनीति का अंतिम दौर चल रहा है और इसीलिए वह चाहते हैं कि जितना लंबा समय काट लिया जाए अच्छा है. लालू प्रसाद भी जानते हैं कि अगर नीतीश कुमार उनके साथ नहीं रहेंगे, तो वह लोग चुनाव हार जाएंगे. नीतीश कुमार, लालू के साथ केवल एक ही चुनाव लड़े थे, जो मैंने 2015 में लड़वाया था."

उन्होंने आगे कहा कि नीतीश कुमार अपने दम पर लालू के साथ चुनाव लड़ ही नहीं सकते हैं. वो बीजेपी के साथ ही केवल चुनाव लड़ सकते हैं क्योंकि उन्हें बीजेपी के कैडर और संगठन का फायदा मिलता है. नीतीश इतने बेवकूफ नहीं हैं कि लालू के साथ मिलकर चुनाव लड़ें.

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