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यूपी विधानसभा में लव जिहाद बिल पास, कोई भी कर सकेगा शिकायत, उम्रकैद तक की होगी सजा

यूपी विधानसभा में मंगलवार को लव जिहाद से जुड़ा बिल पास हो गया है. इस बिल में अब आरोपियों को उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है. इस कानून में कई अपराधों की सजा बढ़ाकर दोगुनी कर दी गई है. लव जिहाद के तहत कई नए अपराध भी इसमें जोड़े गए हैं.

विधानसभा में बोलते हुए सीएम योगी (फाइल फोटो) विधानसभा में बोलते हुए सीएम योगी (फाइल फोटो)
शिल्पी सेन
  • नई दिल्ली,
  • 30 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 5:38 PM IST

यूपी विधानसभा में मंगलवार को लव जिहाज से जुड़ा बिल पास हो गया है. इस बिल में अब आरोपियों को उम्र कैद की सजा का प्रावधान है.इस कानून में कई अपराधों की सजा बढ़ाकर दोगुनी कर दी गई है.लव जिहाद के तहत कई नए अपराध भी इसमें जोड़े गए हैं. बता दें कि इससे जुड़ा विधेयक योगी सरकार ने सोमवार को सदन में पेश किया था. 

जानें नए बिल में क्या है प्रावधान

1. नए कानून में दोषी पाए जाने पर 20 साल की कैद या आजीवन कारावास का प्रावधान है. 
2. अब कोई भी व्यक्ति धर्मांतरण के मामलों में एफआईआर दर्ज करा सकता है. 
3. पहले मामले में सूचना या शिकायत देने के लिए पीड़ित, माता-पिता या भाई-बहन की मौजूदगी जरूरी थी.
4. लव जिहाद के मामलों की सुनवाई सत्र न्यायालय से नीचे की कोई अदालत नहीं करेगी. 
5. लव जिहाद के मामले में सरकारी वकील को मौका दिए बिना जमानत याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा. 
6. इसमें सभी अपराधों को गैर-जमानती बनाया गया है. 

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यह भी पढ़ें: 'सरकार के पास विकास का कोई प्लान नहीं", यूपी में 'लव जिहाद' कानून पर बोले अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद

2020 में बनाया गया था पहला कानून 

बता दें कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लव जिहाद के खिलाफ पहला कानून 2020 में बनाया था. इसके बाद यूपी सरकार ने विधानसभा में धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2021 पारित किया. इस विधेयक में 1 से 10 साल तक की सजा का प्रावधान था. इस विधेयक में यह प्रावधान था कि सिर्फ शादी के लिए किया गया धर्म परिवर्तन अमान्य माना जाएगा. 

पहले 10 साल की सजा का था प्रावधान यूपी में बने पुराने कानून के मुताबिक झूठ बोलकर, धोखा देकर धर्म परिवर्तन कराना अपराध माना जाएगा. अगर कोई स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसे 2 महीने पहले मजिस्ट्रेट को बताना होगा. विधेयक के मुताबिक जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने पर 15 हजार रुपए जुर्माने के साथ 1-5 साल की जेल की सजा का प्रावधान था. इस मामले में भी यदि केस दलित लड़की से जुड़ा होता था तो उस मामले में 25 हजार रुपए जुर्माने के साथ 3 से लेकर 10 साल तक की जेल का प्रावधान था.

दरअसल, केंद्र सरकार की तरफ से धर्म परिवर्तन कानून बनाने को लेकर पहले ही कहा गया है कि यह राज्य सरकारों का मामला है और यह सूबे की सरकारों को ही तय करना है. 

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