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बिश्नोई ही नहीं, D कंपनी से लेकर गवली गैंग ने भी मुंबई की धरती को किया है लाल, गैंगवार में मारे गये हैं ये दिग्गज नेता!

25 अगस्त 1994 को, बीजेपी के शहर अध्यक्ष रामदास नायक की उनके घर के बाहर सुबह 10 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई. जांच के दौरान पता चला कि नायक की हत्या की साजिश दाऊद इब्राहिम के करीबी छोटा शकील ने रची थी. यह हमला मुंबई की राजनीति में अपराधियों की घुसपैठ का प्रमाण था, और डी-कंपनी द्वारा राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा था.

लॉरेंस बिश्नोई, दाऊद इब्राहिम और अरुण गवली (फाइल फोटो) लॉरेंस बिश्नोई, दाऊद इब्राहिम और अरुण गवली (फाइल फोटो)
बिजय कुमार
  • नई दिल्ली,
  • 14 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 2:20 PM IST

12 अक्टूबर 2024 को, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता और तीन बार के पूर्व बांद्रा वेस्ट विधायक की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस हत्या की जांच कर रही पुलिस लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से संभावित संबंधों की भी पड़ताल कर रही है, जो वर्तमान में जेल में है. बाबा सिद्दीकी की हत्या ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मुंबई दहशत के साये से कभी दूर नहीं रही. अभी तक यहां दाऊद की दाद गिरी चलती थी और अब यहां बिश्नोई गैंग दहशत फैलाने की कोशिश में जुटा है. बाबा सिद्दीकी की हत्या ऐसा पहला मामला नहीं है, जब किसी नेता की हत्या से मुंबई दहली है, बल्कि मायानगरी में राजनेताओं की हत्या का सिलसिला आम रहा है. 

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इन हत्याओं में दाऊद, छोटा राजन, अरुण गवली और अलग-अलग गैंगस्टर्स के नाम सामने आए हैं. मुंबई में राजनेताओं के हत्याकांड पर डालते हैं एक नजर

डॉ. दत्ता सामंत की हत्या: ट्रेड यूनियन की प्रतिद्वंद्विता का नतीजा
16 जनवरी 1997 की सुबह जब मुलुंड के पूर्व विधायक और मशहूर मजदूर नेता डॉ. दत्ता सामंत अपने पवई स्थित घर से घाटकोपर ऑफिस के लिए निकले, तभी उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई. पुलिस ने जांच में इसे ट्रेड यूनियन के झगड़ों से जोड़ते हुए प्रीमियम ऑटोमोबाइल्स लिमिटेड में यूनियनों के बीच टकराव को हत्या की वजह बताया. तीन शूटरों को सन् 2000 में दोषी ठहराया गया, जबकि गैंगस्टर छोटा राजन को हत्या के आरोप से 2023 में बरी कर दिया गया था.

रामदास नायक की हत्या: डी-कंपनी का नाम आया था सामने
25 अगस्त 1994 को, बीजेपी के शहर अध्यक्ष रामदास नायक की उनके घर के बाहर सुबह 10 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई. जांच के दौरान पता चला कि नायक की हत्या की साजिश दाऊद इब्राहिम के करीबी छोटा शकील ने रची थी. यह हमला मुंबई की राजनीति में अपराधियों की घुसपैठ का प्रमाण था, और डी-कंपनी द्वारा राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा था.

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जियाउद्दीन बुखारी: अरुण गवली गैंग पर लगा था हत्या का आरोप
अप्रैल 1994 में, मुस्लिम लीग के पूर्व विधायक जियाउद्दीन बुखारी की बायकुला में हत्या कर दी गई थी. पुलिस ने इस हत्या का आरोप अरुण गवली के गैंग पर लगाया, हालांकि अदालत में सुनवाई के दौरान कई आरोपियों को बरी कर दिया गया. बुखारी एक प्रभावशाली सामुदायिक नेता थे और उनकी हत्या ने मुंबई की राजनीतिक हिंसा के काल अध्याय को सामने ला दिया था.

प्रेम कुमार शर्मा की हत्या: दाऊद के भरोसेमंद साथी का हाथ
3 जून 1993 को, भाजपा के दो बार के विधायक प्रेम कुमार शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उस दिन उनकी बेटी के एग्जाम का रिजल्ट आया था. इसलिए वह परिवार के साथ जश्न मनाने निकले थे तभी ग्रांट रोड पर शूटर्स ने उन पर हमला कर दिया. पुलिस जांच में पाया गया कि यह हमला दाऊद इब्राहिम के करीबी एजाज पठान ने करवाया था. पठान उन आरोपियों में से एक था, जिसने 1993 के मुंबई बम धमाकों में भी भूमिका निभाई थी.

रमेश मोरे की हत्या: अरुण गवली गैंग पर आरोप
29 मई 1993 को, शिवसेना नेता और ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता रमेश मोरे की अंधेरी में उनके घर के पास चार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी. इस हत्या को अरुण गवली गैंग से जोड़ा गया, जो उस वक्त मुंबई के अंडरवर्ल्ड में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा था. मोरे की हत्या ने मुंबई की अपराध और राजनीति की गहरी साठ-गांठ को और उजागर कर दिया.

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विठ्ठल चव्हाण की हत्या: पैसों का विवाद बताई गई थी वजह
शिवसेना विधायक विठ्ठल चव्हाण की 1992 में गुरु सतम गैंग के सदस्यों द्वारा हत्या कर दी गई थी. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हत्या पैसों के लेन-देन से जुड़े विवाद के कारण की गई थी. हालांकि, इस हत्या के मामले में किसी को भी दोषी नहीं ठहराया गया, और यह हत्या भी उन कई घटनाओं में से एक बन गई, जहां राजनीतिक हत्याओं में अपराधियों की पहचान के बावजूद न्याय अधूरा रह गया.

कृष्ण देसाई की हत्या: शिवसेना और सीपीआई के बीच टकराव का नतीजा
5 जून 1970 को, परेल से सीपीआई के विधायक कृष्ण देसाई की लालबाग में कुछ अज्ञात हमलावरों ने चाकू मारकर हत्या कर दी. पुलिस ने शुरुआती जांच में इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से जोड़ते हुए शिवसेना पर उंगली उठाई, क्योंकि उस समय शिवसेना और सीपीआई के बीच तनावपूर्ण संबंध थे. देसाई की हत्या मुंबई में राजनीतिक हिंसा की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है.

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