
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण में क्रीमी लेयर मानदंड लागू करने के किसी भी कदम का कड़ा विरोध किया है. रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के प्रमुख अठावले का यह बयान सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की पृष्ठभूमि में आया है जिसमें उसने एससी/एसटी की सब-कैटेगरी में आरक्षण को मंजूरी दी है.
रामदास अठावले ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'रिपब्लिकन पार्टी अनुसूचित जाति जनजातियों के आरक्षण के लिए क्रिमिलियर आर्थिक मानदंडों का कड़ा विरोध करती है. ओबीसी और ओपन वर्ग में उपवर्गीकरण के साथ ही अनुसूचित जाति में उपवर्गीकरण किया जाए. उप-वर्गीकरण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सभी अनुसूचित जातियों को न्याय मिलेगा.'
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ये फैसला
गुरुवार को ही सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात जजों की संविधान पीठ ने गुरुवार को 6:1 के बहुमत से फैसला सुनाया कि राज्यों द्वारा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति में सब-कैटेगरी को भी आरक्षण दिया जा सकता है ताकि उनमें अधिक पिछड़ी जातियों के लिए कोटा सुनिश्चित किया जा सके.
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सुप्रीम कोर्ट ने कोटे के अंदर कोटे की अनुमति राज्य सरकारों को दे दी है. हालांकि, अपने फैसले में उसने ये भी साफ किया है कि राज्य अपनी मर्जी और राजनीतिक महत्वाकांक्षा के आधार पर फैसला नहीं ले सकते. अगर ऐसा होता है तो उनके फैसले की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है.
महाराष्ट्र सरकार को दिया सुझाव
अठावले ने कहा कि देश में 1,200 अनुसूचित जातियां हैं, जिनमें से 59 महाराष्ट्र में हैं. उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार को अनुसूचित जातियों का अध्ययन करने और उन्हें ए, बी, सी, डी श्रेणियों में उपवर्गीकृत करने के लिए एक आयोग बनाना चाहिए. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इससे एससी श्रेणी में आने वाली सभी जातियों को न्याय मिलेगा.