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साल 2019-20 में BJP को मिले सबसे ज्यादा इलेक्टोरल बॉन्ड, जानिए कांग्रेस, AAP व अन्य का हाल

निर्वाचन आयोग (Election Commission) के 2019-20 के लिए जारी इलेक्टोरल बॉन्ड्स (Electoral Bond) के आंकड़ों में इस बार भी भाजपा (BJP) ढाई हजार करोड़ रूपए पार कर अव्वल दर्जे पर है.

बीजेपी को सबसे ज्यादा इलेक्टोरल बॉन्ड मिले हैं. (प्रतीकात्मक फोटो) बीजेपी को सबसे ज्यादा इलेक्टोरल बॉन्ड मिले हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 10 अगस्त 2021,
  • अपडेटेड 2:09 PM IST
  • कांग्रेस के बॉन्ड्स वाले चंदे में 17 फीसदी की गिरावट
  • बीजेपी को 2019-20 में कुल 3427 करोड़ के बॉन्ड मिले
  • TMC को 100.46 करोड़ रुपये, AAP को 18 करोड़

निर्वाचन आयोग (Election Commission) के 2019-20 के लिए जारी इलेक्टोरल बॉन्ड्स (Electoral Bond) के आंकड़ों में इस बार भी भाजपा (BJP) ढाई हजार करोड़ रूपए पार कर अव्वल दर्जे पर है. अपने पांच प्रमुख प्रतिद्वंद्वी दलों के कुल चंदे के मुकाबले में अकेले बीजेपी को मिले बॉन्ड्स की रकम दोगुने से ज्यादा है.

पिछले कई सालों से बीजेपी को इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए मिल रहे पारदर्शी चंदे में पहला स्थान मिला है. निर्वाचन आयोग के मुताबिक 2019-20 में कुल 3427 करोड़ के बॉन्ड बीजेपी को मिले जबकि नौ फीसदी यानी 318 करोड़ रुपए कांग्रेस की झोली में गए. कांग्रेस के बॉन्ड्स वाले चंदे में 17 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. जबकि बीजेपी को 2018-19 के दौरान 1450 करोड़ रुपए और कांग्रेस को 383 करोड़ रुपए मिले थे.

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टीएमसी, डीएमके व अन्य को मिला इतना चंदा

निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक अन्य विपक्षी पार्टियों में तृणमूल कांग्रेस को 100.46 करोड़ रुपये, डीएमके को 45 करोड़ रुपये, शिवसेना को 41 करोड़ रुपये, एनसीपी को 29.25 करोड़ रुपये और AAP को 18 करोड़ रुपये मिले. जबकि आरजेडी को 2.5 करोड़ रुपए के इलेक्टोरल बॉन्ड्स मिले.

सरकार ने इस दावे के साथ साल 2018 में इस बॉन्ड की शुरुआत की थी कि इससे राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और साफ-सुथरा धन आएगा. इसमें व्यक्ति, कॉरपोरेट और संस्थाएं बॉन्ड खरीदकर राजनीतिक दलों को चंदे के रूप में देती हैं और राजनीतिक दल इस बॉन्ड को बैंक में भुनाकर रकम हासिल करते हैं.

भारतीय स्टेट बैंक की 29 शाखाओं को इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने और उसे भुनाने के लिए अधिकृत किया गया. ये शाखाएं नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, गांधीनगर, चंडीगढ़, पटना, रांची, गुवाहाटी, भोपाल, जयपुर और बेंगलुरु की हैं. चुनावी फंडिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और अन्य सुधार के मकसद से केंद्र सरकार 2 जनवरी, 2018 को इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम की अधिसूचना जारी की थी.

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फाइनेंस एक्ट 2017 के तहत शुरू हुई थी इलेक्टोरल बॉन्ड की सुविधा

इलेक्टोरल बॉन्ड की ये व्यवस्था फाइनेंस एक्ट 2017 के द्वारा लाई गई थी. यह बॉन्ड साल में चार बार जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर में जारी किए जाते हैं. इसके लिए ग्राहक बैंक की शाखा में जाकर या उसकी वेबसाइट पर ऑनलाइन जाकर इसे खरीद सकता है.
कोई भी डोनर अपनी पहचान छुपाते हुए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से एक करोड़ रुपए तक मूल्य के इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीद कर अपनी पसंद के राजनीतिक दल को चंदे के रूप में दे सकता है. ये व्यवस्था दानकर्ताओं की पहचान नहीं उजागर करती और उसे आयकर से भी छूट प्राप्त होती है. आम चुनाव में कम से कम 1 फीसदी वोट हासिल करने वाले राजनीतिक दल ही इस बॉन्ड से चंदा हासिल कर सकते हैं.

केंद्र सरकार ने इस दावे के साथ इस बॉन्ड की शुरुआत की थी कि इससे राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और साफ-सुथरा धन आएगा. तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जनवरी 2018 में लिखा था, 'इलेक्टोरल बॉन्ड की योजना राजनीतिक फंडिंग की व्यवस्था में 'साफ-सुथरा' धन लाने और 'पारदर्श‍िता' बढ़ाने के लिए लाई गई है.'

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