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सीमा विवादः चीन ने फिर बनाया दबाव, सैनिकों को हटाने से पहले चोटी खाली करे भारत

चीनी सेना पहले दक्षिणी किनारे पर स्थिति को हल करने के पक्ष में है, जहां भारतीय सेना ने सामरिक रूप से अपनी स्थिति मजबूत कर ली है. जबकि भारत चाहता है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पूर्वी लद्दाख में सभी जगह से सैनिकों को हटाने का रोडमैप तैयार किया जाए.

लद्दाख में तनाव कम करने को लेकर बातचीत का दौर जारी (फाइळ-पीटीआई) लद्दाख में तनाव कम करने को लेकर बातचीत का दौर जारी (फाइळ-पीटीआई)
अभिषेक भल्ला
  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 12:13 AM IST
  • तनाव खत्म करने को लेकर बातचीत का दौर जारी
  • छठे दौर की वार्ता के बाद दोनों ने साझा बयान जारी किया
  • चीन- पहले पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे को खाली करे भारत
  • भारत- LAC के सभी विवादित क्षेत्रों से हटें चीनी सैनिक

पिछले कई महीनों से लद्दाख में भारत और चीन के बीच बने तनावपूर्ण माहौल को ठंड बढ़ने से पहले खत्म करने की कोशिश जारी है. लेकिन पड़ोसी मुल्क की ओर से कोई न कोई अडंगा इस पर लगा दिया जा रहा है. चीन अब इस बात पर जोर दे रहा है कि भारत को पूर्वी लद्दाख में अन्य जगहों से सैनिकों को हटाने को लेकर चर्चा करने से पहले पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर पहाड़ की चोटी खाली करनी होगी.

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यह वही जगह है जहां पिछले चार महीनों में दोनों पक्षों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है. चीनी सेना पहले दक्षिणी किनारे पर स्थिति को हल करने के पक्ष में है, जहां भारतीय सेना सामरिक रूप से अपनी स्थिति मजबूत कर ली है. जबकि भारत चाहता है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पूर्वी लद्दाख में सभी जगह से सैनिकों को हटाने का रोडमैप तैयार किया जाए.

पूरे विवादित क्षेत्र पर हो चर्चा
सूत्रों ने कहा कि कोर कमांडर स्तर की छठे दौर की वार्ता के दौरान भारत का रुख यही था कि एलएसी से सटे डेसपांग मैदान सहित सभी विवादित इलाकों को लेकर चर्चा की जानी चाहिए. एक अधिकारी ने कहा, "महज एक या दो जगहों के लिए ही चर्चा क्यों होगी जबकि पूरे क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण है.

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पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर भारत के लिए अहम पहाड़ की चोटियां जिसमें रेचिन ला, रेजांग ला, मुकर्पी शामिल हैं जो अब तक मानव रहित थे, कब्जे में आ गए हैं. ये कुछ अन्य चोटियों के साथ भारत को चीनी नियंत्रण के तहत स्पैंगुर गैप पर हावी होने की अनुमति देते हैं, इसके साथ ही चीनी सीमा मोल्डो गैरीसन पर भी.

यही चीज चीनी सेना को आक्रोशित कर रही है, क्योंकि उसकी ओर से यहां से भारतीय सैनिकों को खदेड़ने के कई प्रयास किए गए, इस दौरान चेतावनी के रूप में फायरिंग भी की गई.

भारत ने बदली रणनीति
भारत ने 15 जून को गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद अपनी गतिविधियों के नियमों को बदल दिया जिसमें 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू सहित 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे. चीन ने इस हिंसक झड़प में भारतीय सैनिकों पर मध्यकालीन युग की तरह लोहे से बने हथियारों से हमला किया था.

सूत्रों ने कहा कि तब से भारतीय सेना ने कमांडरों को यह निर्णय लेने के लिए जमीनी स्तर पर अधिकार दे दिया है कि क्या हथियारों का इस्तेमाल किया जाए, अगर उनकी सेना को जानलेवा स्थिति का सामना करना पड़ता है और यह बात चीन को बता भी दी गई है.

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सूत्रों ने कहा कि हाल ही में कोर कमांडर स्तर की हुई बैठक में भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि चूंकि चीन ने शुरुआत की थी तो इसलिए उसे पहले पीछे हटना चाहिए जिसके बाद भारत भी वापस आ जाएगा. दोनों पक्षों में सैन्य स्तर पर 6 दौर की वार्ता हो चुकी है.

हालांकि, चीन पैंगोंग झील, फींगर्स एरिया, हॉट स्प्रिंग्स और डेपसांग में सैनिकों को तत्काल हटाने में थोड़ी दिलचस्पी दिखा रहा है. सूत्रों ने कहा कि भारतीय पक्ष ने कह दिया है कि अगर चीन वापस यथास्थिति में जाने को तैयार नहीं है, तो भारतीय सैनिक लॉन्ग हॉल के लिए तैयार हैं.

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