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मणिपुर में महिला से छेड़खानी और अभद्रता, आरोपी BSF का जवान सस्पेंड

इंफाल में महिला के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ और अपमानित करने के मामले में बीएसएफ ने सख्त एक्शन लिया है. इस मामले में आरोपी बीएसएफ हेड कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है. आरोपी की पहचान बीएसएफ हेड कांस्टेबल सतीश प्रसाद के रूप में की गई है. ये घटना इम्फाल पश्चिम जिले के खुयाथोंग में हुई थी. एफआईआर दर्ज कर ली गई है. बीएसएफ ने घटना की जांच शुरू कर दी है.

BSF के आरोपी जवान को सीसीटीवी में एक महिला के साथ दुर्व्यवहार करते हुए देखा गया था. (Representative Image) BSF के आरोपी जवान को सीसीटीवी में एक महिला के साथ दुर्व्यवहार करते हुए देखा गया था. (Representative Image)
कमलजीत संधू
  • इम्फाल,
  • 26 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 2:23 PM IST

मणिपुर में दो महीने से ज्यादा वक्त से हिंसा चल रही है. इस बीच, महिला उत्पीड़न की झकझोर देने वाली घटनाएं भी सामने आ रही हैं. मंगलवार को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने अपने एक जवान को निलंबित कर दिया है. इस जवान पर एक स्थानीय महिला से छेड़खानी किए जाने का आरोप था. मामला एक हफ्ते पुराना है.

बीएसएफ ने बताया कि हेड कांस्टेबल सतीश प्रसाद का सीसीटीवी फुटेज सामने आया था. इसमें आरोपी अपनी वर्दी पहने हुए है और हाथ में इंसास राइफल है. आरोपी को एक किराने की दुकान पर कथित तौर पर महिला के साथ दुर्व्यवहार करते हुए देखा जा रहा है. इस घटना का सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ था.

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आरोपी जवान के खिलाफ कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की कार्यवाही

बीएसएफ के एक अधिकारी ने कहा कि घटना 20 जुलाई की है. इंफाल पश्चिम जिले में अर्धसैनिक बल को घटना के संबंध में शिकायत मिली थी, जिसके बाद आरोप की जांच की गई और उसी दिन जवान को निलंबित कर दिया गया. हेड कांस्टेबल के खिलाफ कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की कार्यवाही शुरू की गई है.

बीएसएफ ने कहा- घटना की निष्पक्ष जांच होगी

ये जवान 100वीं बटालियन से संबंधित है. उसे मणिपुर में जातीय हिंसा के मद्देनजर सुरक्षा कर्तव्यों के लिए भेजा गया था. उन्होंने बताया कि बीएसएफ इस तरह के कृत्यों को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा और इस घटना की निष्पक्ष जांच की जाएगी.

मणिपुर में 3 मई से हिंसा

बता दें कि 3 मई को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़की थी, उसके बाद से 160 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है. कई घायल हुए हैं. यहां मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' आयोजित किया गया था.

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