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सुप्रीम कोर्ट ने ब्रिटनी स्पीयर्स केस का दिया हवाला, लड़की को पैरेंट्स से 'आजाद' कराने की अर्जी खारिज

एक आध्यात्मिक गुरु की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में ब्रिटनी स्पीयर्स (Britney spears) का जिक्र आया. कोर्ट ने आध्यात्मिक गुरु की याचिका भी खारिज की.

सुप्रीम कोर्ट में ब्रिटनी स्पीयर्स का जिक्र सुप्रीम कोर्ट में ब्रिटनी स्पीयर्स का जिक्र
अनीषा माथुर
  • नई दिल्ली,
  • 06 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 3:33 PM IST
  • सुप्रीम कोर्ट में ब्रिटनी स्पीयर्स का जिक्र आया
  • आध्यात्मिक गुरु की याचिका पर हो रही थी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट (Supreme court ) में मंगलवार को सुनवाई के वक्त अमेरिकी गायिका ब्रिटनी स्पीयर्स (Britney spears) का जिक्र आया. 21 साल की लड़की से जुड़े एक मामले की सुनवाई के वक्त ऐसा हुआ. यह याचिका खुद को आध्यात्मिक गुरु कहने वाले शख्स से जुड़ी थी. इसमें उसने 21 साल की एक लड़की को अपना आध्यात्मिक पार्टनर बताकर दावा किया है कि उसके पैरेंट्स ने उसे 'गैरकानूनी तरीके से कैद' किया हुआ है.

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याचिका में कथित आध्यात्मिक गुरु ने कोर्ट से मांग उठाई है कि लड़की बालिग है और इसलिए उसे अपनी मर्जी से कहीं भी रहने की इजाजत कोर्ट दिलवाए. मामला केरल का है. लड़की के माता-पिता का कहना है कि लड़की मानसिक तौर पर अस्थिर है. फिलहाल कोर्ट ने कथित आध्यात्मिक गुरु की याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने भी लड़की की अस्थिर मानसिक हालत का जिक्र किया.  

कोर्ट में आया ब्रिटनी स्पीयर्स का जिक्र

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय ने ब्रिटनी स्पीयर्स से जुड़े मामले का जिक्र करते हुए कहा, 'अमेरिका और भारत में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कानून बहुत अलग हैं. कानून और संस्कृति दोनों ही दोनों देशों की अलग है. अमेरिका में जबतक किसी व्यस्क की हामी ना हो मानसिक दिक्कत का इलाज शुरू नहीं होता. यहां भारत में पुलिस आकर खुद बात करती है. परिवार से भी सवाल किए जाते हैं.'

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कोर्ट ने आगे कहा कि इस केस में माता-पिता ने खुद कहा है कि उनकी बेटी मानसिक तौर पर बीमार है. जबकि भारत में माता-पिता के लिए ऐसा कहना आसान नहीं होता.

कंजरवेटरशिप में हैं ब्रिटनी स्पीयर्स

दरअसल, पिछले दिनों लॉस एंजिल्स कोर्ट ने ब्रिटनी स्पीयर्स को उनके पिता की कंजरवेटरशिप (conservatorship) या गार्जियनशिप को खत्म करने से इनकार कर दिया था. इसमें वह 2008 से रह रही हैं. बता दें कि 2007 में ब्रिटनी पति केविन से अलग होने के बाद परेशान थीं. उन्होंने अपना सिर तक मुंडवा लिया था. उसके बाद से ब्रिटनी कंजरवेटरशिप (Britney spears conservatorship) में थीं. ऐसे में ब्रिटनी उनकी वित्तीय संपत्ति से लेकर अन्य कोई भी फैसला वो खुद नहीं कर सकती थीं.

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल खड़े किए कि जिस शख्स (याचिकाकर्ता) के पास लड़की को इलाज के लिए भेजा गया था, उसी ने उसके साथ अंतरंग संबंध बनाए. यह भरोसा पैदा नहीं होने देता. साथ ही कोर्ट ने कहा कि पिछले कुछ वक्त में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें आध्यात्मिक गुरु या बाबाओं ने युवा लड़कियों को भटकाया है.

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