
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 जुलाई को सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों को उनकी साहस और वीरता के लिए कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र से सम्मानित किया. इस दौरान शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह को अदम्य साहस दिखाने और कर्तव्य के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने के लिए मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया. उनका वीरता पुरस्कार पत्नी स्मृति सिंह ने ग्रहण किया. साथ में अंशुमान सिंह की मां भी मौजूद रहीं. अंशुमान सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया के निवासी थे.
सम्मान पाने के बाद कैप्टन अंशुमान सिंह की विधवा पत्नी स्मृति सिंह ने पुराने दिनों को याद किया. उन्होंने कहा, '18 जुलाई को हमारी लंबी बातचीत हुई और 19 जुलाई को हमें पता चला कि वह अब नहीं रहे.' अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए स्मृति सिंह ने कहा, 'यह पहली नजर का प्यार था.'
पत्नी स्मृति सिंह ने बताई कैसे शुरू हुई प्रेम कहानी
स्मृति सिंह ने अपनी प्रेम कहानी को याद करते हुए कहा, 'हम कॉलेज के पहले दिन मिले थे. मैं नाटकीय नहीं होना चाहुंगी, लेकिन यह पहली नजर का प्यार था. एक महीने बाद, उनका चयन सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय (AFMC) में हो गया. हम एक इंजीनियरिंग कॉलेज में मिले और उनका चयन एक मेडिकल कॉलेज में हुआ. वह समझदार थे. मिलने के सिर्फ एक महीने बाद हमने आठ साल तक लॉन्ग डिस्टेंस का सफर तय किया और बाद में हमने सोचा कि अब हमें शादी कर लेनी चाहिए, फिर हमने शादी कर ली.'
अपनी प्रेम कहानी बताते हुए स्मृति सिंह काफी भावुक हो गईं. आखिरी बातचीत को याद करते हुए स्मृति सिंह ने कहा, '18 जुलाई को हमने इस बारे में लंबी बातचीत की कि अगले 50 सालों में हमारा जीवन कैसा होगा. हम घर बनाने जा रहे हैं, हमारे बच्चे होंगे, और क्या-क्या. 19 तारीख की सुबह, जब मैं उठी, तो मुझे फोन आया कि वह अब नहीं रहे.' ये बताते हुए स्मृति सिंह की आवाज भारी हो गई और उनकी आंखों में आंसू आ गए.
'अंशुमान सिंह हीरो हैं'
उस मनहूस दिन का जिक्र करते हुए स्मृति ने कहा, 'शुरुआती 7-8 घंटों तक, हम यह भरोसा नहीं कर पाए कि ऐसा कुछ हुआ है. आज तक मैं इससे उबर नहीं पाई हूं. बस यह सोचने की कोशिश कर रही थी कि शायद यह सच नहीं है. लेकिन अब जब मेरे हाथ में कीर्ति चक्र है, तो मुझे एहसास हुआ कि यह सच है. लेकिन कोई बात नहीं, वह एक हीरो हैं. हम अपने जीवन का थोड़ा मैनेज कर सकते हैं क्योंकि उन्होंने बहुत कुछ मैनेज किया है. उन्होंने अपना जीवन और परिवार त्याग दिया ताकि अन्य तीन सैन्य परिवारों को बचाया जा सके.'
दूसरों को बचाने में चली गई जान
अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना कैप्टन सिंह ने सियाचिन में एक बड़ी आग की घटना में कई लोगों को बचाने के लिए असाधारण बहादुरी और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया. जुलाई 2023 में सुबह के समय सियाचिन में भारतीय सेना के गोला-बारूद के भंडार में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई. अफरा-तफरी के बीच, कैप्टन सिंह ने हिम्मत दिखाते हुए फाइबर-ग्लास की झोपड़ी में फंसे साथी सैनिकों को बचाया.
जब आग पास के मेडिकल इन्वेस्टीगेशन सेंटर में फैल गई, तो कैप्टन सिंह ने जीवन रक्षक दवाइयों को निकालने का बहादुरी भरा प्रयास किया. दुर्भाग्य से वे गंभीर रूप से जल गए और बाद में उनकी जान चली गई. कैप्टन अंशुमान सिंह को उनके वीरतापूर्ण काम के लिए मरणोपरांत सम्मानित किया गया.