
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गोवा में कथित कैश फॉर जॉब्स घोटाले के संबंध में पीड़ितों के बयान दर्ज किए हैं जो मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई कार्रवाई का हिस्सा हैं.
ED ने इस घोटाले की जांच के लिए एक प्रवर्तन केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) भी दर्ज की है और गोवा पुलिस से विस्तृत जानकारी मांगी है, जिसने उत्तरी और दक्षिणी गोवा के कई इलाकों में 33 से ज्यादा मामले दर्ज किए हैं. इसमें 20 से ज्यादा FIR उत्तरी गोवा में और 13 FIR दक्षिण गोवा में शामिल हैं.
'सरकारी नौकरियों दिलाने के नाम पर ऐंठे पैसे'
पुलिस को जांच में पता चला कि आरोपियों ने लोगों को सरकारी नौकरियों का झांसा देकर 2014-15 तक धोखा दिया. हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस मामले में अभी तक किसी भी राजनीतिक कनेक्शन का पता नहीं चला है. लेकिन इस मामले में 21 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है.
पुलिस ने बताया कि गोवा के 12 तालुकाओं में से छह तालुकाओं बिचोलिम, बार्देम, तिसावाड़ी, पोण्डा, मोरमुगांव और कनाकोना में भी मामले दर्ज हैं.
'300 से ज्यादा लोगों को बनाया शिकार'
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने 300 से ज्यादा लोगों को विभिन्न निर्माण, जल संसाधन, शिक्षा, परिवहन, पुलिस और स्वास्थ्य जैसे सरकारी विभागों में नौकरी देने का वादा कर धोखा दिया. पीड़ितों में से कई ने अपनी जीवनभर की बचत गंवा दी, जबकि आरोपियों ने इस पैसे को शानदार लाइफ स्टाइल पर खर्च किया था.
ये घोटाला अक्टूबर में उस वक्त सामने आया, जब पुरानी गोवा की रहने वाली पूजा नाइक पर राज्यभर में कई लोगों को सरकारी नौकरी दिलवाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोप लगाया था. इसके बाद दीपाश्री गावस, प्रिय यादव, सुनीता पावस्कर, श्रुति प्रभुगांवकर और उमा पाटिल जैसे आरोपियों के खिलाफ भी मामले दर्ज किए गए थे.
विपक्षी नेताओं ने की न्यायिक जांच की मांग
वहीं, ED इस घोटाले की पूरी सच्चाई को उजागर करने के लिए वित्तीय जांच पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, आलोचकों ने जांच की ईमानदारी पर सवाल उठाए हैं. विपक्षी नेताओं ने न्यायिक जांच की मांग की है.
उनका कहना है कि यह कदम इस घोटाले के संभावित राजनीतिक कनेक्शन को उजागर करने के लिए जरूरी है जो सालों तक घोटाले को जारी रखने में मदद कर सकते थे. उनका तर्क है कि इस तरह की जांच से गोवा के सैकड़ों युवाओं को न्याय मिलेगा और राज्य सरकार के प्रति जनता में विश्वास बढ़ेगा.