
केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी बीते दिन से ही अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं. किसानों को लेकर दिए गए बयान से इतर जिस अन्य मसले पर विवाद हुआ है, वह डाटा प्रोटेक्शन बिल को लेकर किया गया उनका दावा है. मीनाक्षी लेखी ने दावा किया कि डाटा प्रोटेक्शन बिल को लेकर संसदीय कमेटी की रिपोर्ट आ गई है, जल्द ही इसे संसद में पेश किया जाना है.
लेकिन केंद्रीय मंत्री के इस दावे पर कांग्रेस के दो सांसदों ने सवाल खड़े कर दिए हैं. कांग्रेस नेता जयराम रमेश, मनीष तिवारी ने मीनाक्षी लेखी के दावे को गलत ठहराया है.
मनीष तिवारी और जयराम रमेश ने घेरा
मीनाक्षी लेखी के दावे पर कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने लिखा कि मीनाक्षी लेखी ये दावा कैसा कर सकती हैं कि डाटा प्रोटेक्शन बिल पर संसदीय कमेटी की रिपोर्ट को स्पीकर को दिया जा चुका है. जबकि कमेटी के सदस्यों को ही ये नहीं मिल सकी है. या तो ये रिपोर्ट गलत है या फिर मीनाक्षी लेखी को सफाई देनी चाहिए.
कांग्रेस के अन्य नेता जयराम रमेश ने लिखा कि मैं हैरान हूं. उनके अलावा कमेटी के तीन अन्य सदस्य भी मंत्री बन गए और वो भी इस ड्राफ्ट रिपोर्ट की मांग कर रहे हैं. शायद वो अब चुप हो जाएंगे.
मीनाक्षी लेखी ने क्या दावा किया था?
दरअसल, केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि डाटा प्रोटेक्शन बिल को पास करने से रोकने के लिए पेगासस जैसे मसले को उठाया जा रहा है और संसद को प्रभावित किया जा रहा है. मीनाक्षी लेखी के मुताबिक, पेगासस जासूसी का मामला पूरी तरह से गलत है और सिर्फ सरकार को बदनाम करने की कोशिश है.
मीनाक्षी लेखी ने कहा कि डाटा प्रोटेक्शन बिल जल्द ही कानून का रूप लेगा, जो सर्वोपरि होगा. ऐसे कानून को टालने के लिए विपक्ष संसद में हंगामा कर रहा है. इससे इतर प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीनाक्षी लेखी ने किसानों को मवाली कहकर बुलाया था, जिसपर बवाल हुआ. हालांकि, बाद में मंत्री ने अपने शब्द वापस लिए.