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सर्वाइकल कैंसर की पहली स्वदेशी वैक्सीन कितनी खास, जानें क्या होगी कीमत, किन्हें लगेगी फ्री?

एक अनुमान के मुताबिक, भारत में हर साल सर्वाइकल कैंसर के 80 हजार से ज्यादा मामले सामने आते हैं, जबकि 35 हजार महिलाओं की इससे मौत हो जाती है. लेकिन अब सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ बनी पहली स्वदेशी वैक्सीन बाजार में आने वाली है. 9 से 14 साल की लड़कियों को ये फ्री में लगाई जाएगी. ये वैक्सीन कितनी असरदार है? क्या कीमत होगी इसकी? सर्वाइकल कैंसर कितना खतरनाक है? जानें...

भारत में इस साल सर्वाइकल कैंसर की स्वदेशी वैक्सीन बाजार में आ जाएगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर- Getty Images) भारत में इस साल सर्वाइकल कैंसर की स्वदेशी वैक्सीन बाजार में आ जाएगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर- Getty Images)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 26 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 1:10 PM IST

सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ बनी पहली स्वदेशी वैक्सीन कुछ महीनों में बाजार में आ जाएगी. इस वैक्सीन को पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ने बनाया है. इसका नाम 'CERVAVAC' रखा गया है. 

इस वैक्सीन को मंगलवार को लॉन्च कर दिया गया है. सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने बुधवार को बताया कि इस साल से ये वैक्सीन बाजार में आ जाएगी. उन्होंने बताया कि अगले साल से वैक्सीन का प्रोडक्शन बढ़ा दिया जाएगा, ताकि देश की जरूरत पूरी हो सके. 

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सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) की वजह से होता है. HPV के 100 से ज्यादा टाइप्स होते हैं, लेकिन सभी कैंसर का कारण नहीं बनते हैं. आमतौर पर HPV के 6, 11, 16 या 18 टाइप की वजह से सर्वाइकल कैंसर होता है. 

सीरम की CERVAVAC इन चारों टाइप्स पर अटैक करती है, इसलिए इसे क्वाड्रिवलेंट ह्यूमन पैपिलोमावायरस वैक्सीन (qHPV) भी कहा जाता है.

ये वैक्सीन कितनी असरदार है? किन महिलाओं को फ्री में लगेगी? कितनी कीमत होगी इसकी? ये सब जानने से पहले समझते हैं कि सर्वाइकल कैंसर क्या होता है?

क्या है सर्वाइकल कैंसर?

- आमतौर पर ऐसा समझा जाता है कि सर्वाइकल कैंसर सिर्फ महिलाओं को ही होता है, लेकिन कई बार ये पुरुषों को भी हो सकता है. 

- सर्वाइकल कैंसर होने पर जननांग में संक्रमण हो जाता है. अगर समय पर ध्यान दिया जाए तो इसका इलाज किया जा सकता है, लेकिन देर होने पर या संक्रमण फैलने पर मौत भी हो सकती है.

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- सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) से होता है. 95 फीसदी से ज्यादा सर्वाइकल कैंसर का कारण HPV ही होता है. आमतौर पर HPV यौन संबंध बनाने से फैलता है. कई लोगों में यौन संबंध बनने के तुरंत बाद HPV फैल जाता है.

ह्यूमन पैपिलोमावायरस की वजह से सर्वाइकल कैंसर होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर- Getty Images)

अब बात सीरम की वैक्सीन की...

- ये देश में बनी सर्वाइकल कैंसर की पहली वैक्सीन है. दावा है कि सीरम इंस्टीट्यूट की CERVAVAC ट्रायल में सभी वर्ग की उम्र के महिलाओं पर असरदार साबित हुई है.

- इस वैक्सीन को ड्रग्स कंट्रोलर (DCGI) और वैक्सीनेशन प्रोग्राम पर बनी एडवाइजरी कमेटी NTAGI से पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम में इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी है.

- इस वैक्सीन को सीरम इंस्टीट्यूट ने डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल के साथ मिलकर बनाया है. बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन भी इसमें पार्टनर है.

- इस वैक्सीन के ट्रायल हो चुके हैं. दावा है कि CERVAVAC ने ट्रायल के दौरान सभी प्रकार के HPV पर असर दिखाया है.

- भारत में हुई कई स्टडीज में सामने आया है कि HPV वैक्सीन की एक ही डोज सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ 95% से ज्यादा असरदार है. 2021 में लैंसेट ने अपनी स्टडी में दावा किया था कि HPV वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर के मामलों में 90 फीसदी तक कमी ला सकती है.

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वैक्सीन कब तक आएगी बाजार में?

- सीरम की इस वैक्सीन को लॉन्च कर दिया है. इस साल जून से ये वैक्सीन बाजार में आने की उम्मीद है. इस वैक्सीन को केंद्र सरकार के टीकाकरण अभियान में शामिल किया गया है.

- टीकाकरण अभियान में CERVAVAC के शामिल होने की वजह से ये वैक्सीन 9 से 14 साल की लड़कियों को फ्री में दी जाएगी. 

- सीरम इंस्टीट्यूट में रेगुलेटरी मामलों के डायरेक्टर डॉ. प्रकाश सिंह ने बताया था कि अभी बाजार में जो इंटरनेशनल ब्रांड्स की HPV वैक्सीन मौजूद हैं, उसकी तुलना में CERVAVAC की कीमत काफी कम होगी.

- फिलहाल भारत में सर्वाइकल कैंसर की दो विदेशी वैक्सीन भारत में मिलती है. इन वैक्सीन की एक डोज की कीमत चार हजार रुपये से ज्यादा है. पिछले साल सितंबर में अदार पूनावाला ने बताया था कि CERVAVAC की एक डोज की कीमत 200 से 400 रुपये के बीच होगी.

भारत में क्या है सर्वाइकल कैंसर की स्थिति?

- दुनिया की कुल महिला आबादी का 16 फीसदी भारत में है, लेकिन दुनिया में सर्वाइकल कैंसर का हर चौथा मामला भारतीय महिलाओं में सामने आता है, जबकि इससे होने वाली एक तिहाई मौतें भारत में ही होती हैं.

- ब्रेस्ट कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर भारतीय महिलाओं को होने वाला दूसरा बड़ा कैंसर है. हाल ही में अनुमान लगाया गया था कि भारत में हर साल करीब 80 हजार महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर होता है और 35 हजार महिलओं की इससे मौत हो जाती है.

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- 15 से 44 साल की उम्र की महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा रहता है. नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामले और इससे होने वाली मौतों के आंकड़े साल दर साल बढ़ते जा रहे हैं.

- 2015 में देश में सर्वाइकल कैंसर के 65,978 मामले सामने आए थे और 29,029 मौतें हुई थीं. वहीं, 2020 में 75, 209 मामले सामने आए थे और 33,095 मौतें हुई थीं. 2020 में सर्वाइकल कैंसर से उत्तर प्रदेश में 4420, महाराष्ट्र में 2952, पश्चिम बंगाल में 2499, बिहार में 2232 और कर्नाटक में 1996 मौतें हुई थीं.

समय पर इलाज हो तो सर्वाइकल कैंसर से ठीक हुआ जा सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर- Getty Images)

कितना खतरनाक है सर्वाइकल कैंसर?

- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, सर्वाइकल कैंसर दुनिया में महिलाओं को होने वाला चौथा आम कैंसर है. 2020 में दुनियाभर में इसके 6 लाख से ज्यादा मामले सामने आए थे और लगभग साढ़े तीन लाख मौतें हुई थीं. 90 फीसदी से ज्यादा मामले कम और मध्यम आय वाले देशों में सामने आए थे.

- WHO के मुताबिक, जो महिला या पुरुष ज्यादा सेक्सुअली एक्टिव होते हैं, वो अपने जीवन में कभी न कभी HPV से संक्रमित हो सकते हैं. कुछ लोग एक से ज्यादा बार भी संक्रमित हो सकते हैं. हालांकि, 90 फीसदी मामलों में संक्रमण अपने आप ही खत्म भी हो जाता है.

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- आमतौर पर एक स्वस्थ महिला में सर्वाइकल कैंसर विकसित होने में 15 से 20 साल का वक्त लग सकता है. अगर किसी महिला का इम्युन सिस्टम कमजोर है या वो HIV से पीड़ित है तो उसमें 5 से 10 साल में ही सर्वाइकल कैंसर विकसित हो सकता है. WHO के मुताबिक, HIV से पीड़ित महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा 6 गुना ज्यादा होता है.

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण और इलाज 

- सर्वाइकल कैंसर होने में सालों का समय लग जाता है. इसलिए शुरुआत में इसके लक्षण नहीं दिखाई देते हैं. सर्वाइकल कैंसर होने पर आमतौर पर जननांग से ब्लीडिंग ज्यादा होती है. 

- सर्वाइकल कैंसर होने पर वजाइनल इन्फेक्शन, यूरिन इन्फेक्शन, यौन संबंध बनाने के बाद ब्लीडिंग, वजाइनल डिस्चार्ज, वजन कम होना, पैरों में सूजन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. 

- शुरुआत में ही अगर बीमारी पकड़ में आ गई, तो इससे पूरी तरह ठीक हुआ जा सकता है. भारत में इसकी वैक्सीन है, लेकिन अभी ये सिर्फ 9 से 26 साल की लड़कियों के लिए है.

 

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