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'AC कोच के चादर को बनाया 'स्ट्रेचर', घायलों को एंबुलेंस तक मशक्कत कर पहुंचाया', गोंडा ट्रेन हादसे के पीड़ित की आपबीती

प्रमोद कुमार ने कहा कि हादसे के बाद लोकल थाने की पुलिस मौके पर आकर रेस्क्यू में जुट गई थी, इसके बाद पूरा रेल प्रशासन का रिलीफ पहुंचाने वाला अमला भी मौके पर पहुंच गया. सब इंस्पेक्टर प्रमोद ने बताया कि घायलों को उठाने के लिए कोई स्ट्रेचर नहीं था, ऐसे में हमने AC कोच के चादर को स्ट्रेचर के रूप में इस्तेमाल कर एंबुलेंस तक पहुंचाया, क्योकि हादसे की साइट पर एंबुलेंस नहीं आ सकती थी.

गोंडा में चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के कई डिब्बे पटरी से उतर गए थे गोंडा में चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के कई डिब्बे पटरी से उतर गए थे
आलोक कुमार जायसवाल
  • गोंडा,
  • 20 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 5:13 PM IST

चंडीगढ़ से असम के डिब्रूगढ़ जाने वाली ट्रेन 18 जुलाई को दोपहर लगभग 2:30 बजे गोंडा जंक्शन से चलकर जैसे ही मोतीगंज और झिलाही स्टेशन के बीच पहुंची, उसी समय ट्रेन के लगभग 18 से भी ज्यादा डिब्बे पटरी से उतर गए. हादसे में कई यात्री घायल हो गए, जबकि 3 यात्रियों की मौत हो गई. 

हादसे के वक्त छपरा जंक्शन RPF पोस्ट के उप निरीक्षक प्रमोद कुमार भी इसी ट्रेन से छपरा आ रहे थे. उन्होंने इस हादसे को न सिर्फ काफी नजदीकी से महसूस किया, बल्कि एक सिपाही की तरह खुद को संभालते हुए यात्रियों की जान बचाने में प्रमुख भूमिका निभाई.

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प्रमोद कुमार ने बताया कि पुराने एक केस के सिलसिले में उनकी गोंडा कोर्ट में गवाही थी.18 जुलाई को न्यायालय में गवाही देकर जैसे ही वह छपरा आने के लिए गोंडा स्टेशन पहुंचे तो ट्रेन नंबर 15904 प्लेटफार्म पर खड़ी थी. वह अपनी पूरी वर्दी में थे, वर्दी बदलने का समय नहीं होने के कारण उन्होंने तुरंत ट्रेन पकड़ ली और ट्रेन की बोगी B-1 में साइड लोअर बर्थ पर बैठ गए. 

ट्रेन गोंडा से चलकर लगभग 20-22 किलोमीटर चली होगी कि अचानक बोगी काफी तेजी से हिलने लगी. जब तक कोई कुछ समझ पाता, तब तक ट्रेन पटरी से उतर गई और जिस तरफ वह बैठे थे. उस ओर ट्रेन झुक गई. प्रमोद कुमार ने कहा कि मैं साइड लोअर बर्थ पर था, मुझ पर कई यात्री गिर पड़े. इसके बाद ट्रेन में औरतों, बच्चों और अन्य यात्रियों के चीखने-चिल्लाने की आवाज आने लगी. पहले मुझे भी कुछ समझ नहीं आया. किसी तरह मैंने खुद को संभालते हुए लोगों को शांत करने की कोशिश की. चूंकि मैं वर्दी में था तो यात्रियों को भी मुझसे आशा हो गई कि ये हमारी मदद करेंगे. उन्होंने लखनऊ मंडल के कुछ अधिकारियों से संपर्क कर हादसे की जानकारी दी और तुरंत सहायता भेजने की बात कही. 

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प्रमोद कुमार ने कहा कि ट्रेन पलटने से बोगी का गेट भी जाम हो गया था. इसके बाद मैंने B-1 कोच में इमरजेंसी एक्जिट वाली खिड़की खोली और वहीं से यात्रियों को बाहर निकाला. उनका कोच करीब 80 डिग्री झुक गया था. हमने 100 से ज्यादा यात्रियों को अलग-अलग बोगियों से बाहर निकाला. 

प्रमोद कुमार ने कहा कि हादसे के बाद लोकल थाने की पुलिस मौके पर आकर रेस्क्यू में जुट गई थी, इसके बाद पूरा रेल प्रशासन का रिलीफ पहुंचाने वाला अमला भी मौके पर पहुंच गया. सब इंस्पेक्टर प्रमोद ने बताया कि घायलों को उठाने के लिए कोई स्ट्रेचर नहीं था, ऐसे में हमने AC कोच के चादर को स्ट्रेचर के रूप में इस्तेमाल कर एंबुलेंस तक पहुंचाया, क्योकि हादसे की साइट पर एंबुलेंस नहीं आ सकती थी. 

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