
उत्तर प्रदेश के गोंडा के पास गुरुवार दोपहर चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के आठ डिब्बे पटरी से उतर गए. इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई और 20 लोग घायल हो गए. घटना के बाद रेलवे और पुलिस-प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. एक और रेलवे हादसा होने के बाद केंद्र सरकार फिर से विपक्ष के निशाने पर आ गई है. विपक्ष ने एक बार फिर रेलवे कवच सिस्टम का मुद्दा उठाया और इसे जल्द से जल्द लागू करने की मांग की.
गोंडा ट्रेन दुर्घटना के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और रेल मंत्री को भारतीय रेलवे में व्याप्त भारी खामियों की सीधे जिम्मेदारी लेनी चाहिए. हमारी एकमात्र मांग है कि सुरक्षा उपायों को बेहतर बनाने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कवच एंटी-कोलिजन सिस्टम को पूरे भारत में सभी मार्गों पर शीघ्रता से स्थापित किया जाना चाहिए।
अब सवाल उठता है कि आखिर कवच सिस्टम का काम कहां तक पहुंचा है. दरअसल, पिछले महीने पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी में ट्रेन हादसा के बाद रेलवे बोर्ड की CEO और चेयरमैन जया वर्मा सिन्हा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके शेयर करके इस कवच सिस्टम के बारे में जानकारी दी थी. उन्होंने कवच को लेकर बताया था कि कुछ जगह ये सिस्टम बिछाया जा चुका है और कुछ जग इस सिस्टम को लगाने का काम चल रहा है और जल्द ही पूरे भारत में इसको कंप्लीट कर लिया जाएगा.
रेलवे बोर्ड चेयरमैन के मुताबिक पश्चिम बंगाल में इस साल कवच सिस्टम को लगाया जाएगा. कवच सिस्टम को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जा रहा है. डेढ़ हजार किलोमीटर पर अभी यह काम चल रहा है. इस साल 3 हजार किलोमीटर पर कवच सिस्टम को बिछा दिया जाएगा. अगले साल भी और 3 हजार किलोमीटर और को कवर किया जाएगा. पूरे भारत में लगाने के लिए चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहे हैं.
उन्होंने आगे बताया कि कवच सिस्टम के तहत आने वाले इक्वेपमेंट की सप्लाई जैसे-जैसे आती है, उसी के मुताबिक काम भी होता जा रहा है. इसका प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए भी कहा है, ताकि जल्द से जल्द पूरे भारत में कवच नेटवर्क सिस्टम को पूरे भारत में बिछाया जा सके.
जानें क्या है रेलवे कवच सिस्टम
रेलवे का Kavach एक ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जिसे भारतीय रेलवे ने रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन (RDSO) की मदद से डेवलप किया है. इस सिस्टम पर रेलवे ने साल 2012 में काम शुरू किया था. शुरुआत में इस प्रोजेक्ट का नाम Train Collision Avoidance System (TCAS) था. हादसों को रोकने के पीछे भारतीय रेलवे का मकसद जीरो एक्सीटेंड का लक्ष्य हासिल करना है. इसका पहला ट्रायल साल 2016 में शुरू हुआ था और चरणबद्ध तरीके से इस सिस्टम का इंस्टॉलेशन किया जा रहा है.
रेल मंत्रालय के अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (Research Design and Standards Organisation) ने अन्य संगठनों के साथ इस कवच टेक्नोलॉजी पर कुछ समय से काम कर रहा है. पहला परीक्षण अक्टूबर 2012 में हुआ था और यात्री ट्रेनों पर पहला फील्ड परीक्षण फरवरी 2016 में शुरू हुआ था.
ऐसे काम करता है ये सिस्टम Kavach
सिस्टम में कई इलेक्ट्रोनिक्स डिवाइस और सेंसर शामिल हैं. इसमें रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस को ट्रेन, रेलवे ट्रैक, रेलवे सिग्नल और हर स्टेशन पर एक किलोमीटर की दूरी पर इंस्टॉल किया जाता है. यह सिस्टम दूसरे कंपोनेंट्स से अल्ट्रा हाई रेडियो फ्रिक्वेंसी के जरिए कम्युनिकेट करता है. अगर कोई लोको पायलट (ट्रेन चालक) किसी सिग्नल को तोड़ता है, तो कवच एक्टिवेट हो जाता है. इसके बाद यह सिस्टम लोको पायलट को अलर्ट करता है और फिर ट्रेन के ब्रेक्स का कंट्रोल हासिल करता है. इसके बाद सिस्टम को जैसे ही पता चलता है कि ट्रैक पर कोई दूसरी ट्रेन भी आ रही है, तो वह पहली ट्रेन को रोक देता है. यह सिस्टम लगातार ट्रेन की मूमेंट को ट्रैक करता है और आगे सिग्नल शेयर करता है.