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'धनंजय' ने 'कंजन' को किया परेशान तो गुस्से में तोड़ी बैरिकेडिंग... मैसूर पैलेस के बाहर हाथियों के उत्पात से अफरा-तफरी, VIDEO

घटना के अनुसार, धनंजय हाथी के हमले से घबराकर कंजन महल परिसर से बाहर निकल गया. चौंकाने वाली बात यह रही कि कंजन बिना अपने महावत के ही बाहर चला गया. धनंजय ने भी कंजन का पीछा किया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई. दोनों हाथी जयमार्तंडा गेट और सोमेश्वर मंदिर के पास लगे बैरिकेड्स को तोड़ते हुए बाहर निकल गए और डोड्डाकेरे मैदान के पास की सड़क तक पहुंच गए.

मैसूरु पैलेस में हाथियों ने मचाया उत्पात मैसूरु पैलेस में हाथियों ने मचाया उत्पात
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 21 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 3:10 PM IST

मैसूरु के प्रसिद्ध दशहरा उत्सव के दौरान एक गंभीर घटना सामने आई है. यहां दशहरा उत्सव में शामिल दो हाथी, कंजन और धनंजय, भोजन के समय आपस में भिड़ गए. यह घटना मैसूरु महल परिसर में हुई, जिसने वहां मौजूद लोगों में दहशत पैदा कर दी. महल में अचानक खलबली सी मच गई, जब धनंजय ने आक्रामक रूप से कंजन पर हमला किया, जिससे कंजन ने महल परिसर से बाहर भागने की कोशिश की.

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बैरिकेड्स तोड़कर बाहर निकल गए हाथी
घटना के अनुसार, धनंजय हाथी के हमले से घबराकर कंजन महल परिसर से बाहर निकल गया. चौंकाने वाली बात यह रही कि कंजन बिना अपने महावत के ही बाहर चला गया. धनंजय ने भी कंजन का पीछा किया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई. दोनों हाथी जयमार्तंडा गेट और सोमेश्वर मंदिर के पास लगे बैरिकेड्स को तोड़ते हुए बाहर निकल गए और डोड्डाकेरे मैदान के पास की सड़क तक पहुंच गए.

इस घटना ने महल के अंदर और बाहर मौजूद लोगों को सकते में डाल दिया. इससे भीड़ में भगदड़ की स्थिति बन गई, और लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे. हाथियों की ताकत और उनकी तेज गति के कारण वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर भारी दबाव बन गया था. हालांकि, महल के महावतों और अन्य कर्मचारियों की त्वरित कार्रवाई ने एक बड़ा हादसा होने से रोक लिया. महावतों ने अपनी कुशलता से दोनों हाथियों को शांत किया और काबू में करके उन्हें वापस महल परिसर में ले आए. इस घटना में किसी भी व्यक्ति को चोट नहीं आई, और न ही कोई बड़ा नुकसान हुआ.

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घटना से उत्सव की तैयारियों पर सवाल
मैसूरु का दशहरा उत्सव अपने शाही हाथियों के लिए जाना जाता है, जो इस परंपरा का प्रमुख हिस्सा हैं. ये हाथी हर साल इस उत्सव का मुख्य आकर्षण होते हैं और इनकी सवारी करके शाही जुलूस निकाला जाता है. ऐसे में इस तरह की घटना से उत्सव की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं. इस घटना के बाद महल और उसके आसपास की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं.

दशहरा जैसे बड़े और महत्वपूर्ण आयोजन के दौरान इस तरह की घटना से निपटने के लिए क्या पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम थे, यह एक बड़ा सवाल है. स्थानीय प्रशासन और महल अधिकारियों से अब इस घटना की पूरी जांच की मांग की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके. महल के अधिकारी और महावत अब यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को टाला जा सके और हाथियों के व्यवहार पर कड़ी निगरानी रखी जाए.

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