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तमिलनाडु मूर्ति विंग सीआईडी पुलिस ने शनिवार को एक न्यूज एजेंसी को बताया कि चोल युग की भगवान विष्णु की मूर्ति चुराने के आरोप में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है. साथ ही आरोपियों के पास से दो करोड़ रुपये की कीमत की प्राचीन मूर्ति भी बरामद की गई है. 8 अगस्त को एक गुप्त सूचना के बाद पुलिस निरीक्षक के नेतृत्व में तंजावुर रेंज मूर्ति विंग सीआईडी टीम ने मेलाथिरुविझापट्टी में तंजावुर-तिरुचिरापल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक वाहन की जांच शुरू की थी. इसी दौरान एक कार में ढाई फीट की धातु की पेरुमल (विष्णु) मूर्ति बरामद की गई.
थोझुवुर नदी में मूर्ति मिलने का किया दावा
सीआईडी विंग की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि पूछताछ करने पर कार में सवार पांच लोगों में से एक ने बताया कि मूर्ति उसके पिता को 12 साल पहले थोझुवुर नदी में मिली थी. लेकिन उसके पिता ने तहसीलदार या ग्राम प्रशासनिक अधिकारी (वीएओ) को इसके बारे में सूचित नहीं किया था. वहीं, उसके पिता ने मूर्ति को अपने मवेशी शेड में छिपा कर रख दिया था.
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मूर्ति कहां से चोरी हुई इसको लेकर जांच कर रही है पुलिस
विज्ञप्ति में कहा गया है कि दिनेश ने पुलिस को बताया कि उसके पिता की मृत्यु के बाद उसने और उसके सहयोगियों ने मूर्ति को 2 करोड़ रुपये में बेचने का फैसला किया. हालांकि, सातों मूर्ति की खरीद के संबंध में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकें, इसलिए बीएनएसएस व बीएनएस अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. सभी 7 लोगों को 9 अगस्त को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया गया. साथ ही उनके वाहन भी जब्त कर लिए गए.
इसके बाद प्राचीन मूर्ति को कुंभकोणम न्यायालय में पेश किया गया. विज्ञप्ति में कहा गया है कि शुरुआती जांच से पता चला है कि मूर्ति 15वीं या 16वीं शताब्दी की है और इसे चोल काल के दौरान बनाया गया होगा. यह भी प्रबल संदेह है कि यह मूर्ति तमिलनाडु के किसी अज्ञात मंदिर से चुराई गई होगी. हालांकि, इस बात की जांच के लिए आगे की जांच की जा रही है.