
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बुधवार को मालदीव के अपने समकक्ष मोहम्मद मुइज्जू के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. दोनों देशों ने पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग सहित 20 प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए, और अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाने की घोषणा की. मुइज्जू ने कहा कि वह चीन की अपनी पहली राजकीय यात्रा करने पर सम्मानित महसूस कर रहे हैं. यह पूरी तरह से दर्शाता है कि दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों के विकास को कितना महत्व दे रहे हैं.
चीन और मालदीव के बीच जिन 20 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं, उनमें ब्लू-इकोनॉमी और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव भी शामिल हैं. चीन-मालदीव द्विपक्षीय व्यापार 2022 में कुल मिलाकर 451.29 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, जिसमें मालदीव से 60,000 अमेरिकी डॉलर के निर्यात के मुकाबले चीन का निर्यात 451.29 मिलियन अमेरिकी डॉलर था. चीन ने गत दिसंबर के दूसरे सप्ताह में दूसरी चाइना-इंडियन ओशन रीजन फोरम मीटिंग का आयोजन किया था, जिसमें उसने हिंद महासागर में अपनी ब्लू-इकोनॉमी स्ट्रेटजी का खाका खींचा था. इस बैठक में मालदीव भी शामिल था.
हम आपको समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि ब्लू-इकोनॉमी क्या होती है और हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की ब्लू-इकोनॉमी स्ट्रेटजी के चलते सुरक्षा और स्थिरता की दृष्टि से भारत के लिए इसके क्या निहितार्थ हैं?
ब्लू-इकोनॉमी क्या है? भारत के लिए इसका महत्व
ब्लू-इकोनॉमी का मतलब समुद्र आधारित अर्थव्यवस्था या समुद्री संसाधनों के उचित उपयोग से है. उदाहरण के लिए, समुद्र और महासागरों में शिपिंग (जहाजों के जरिए समुद्री व्यापार), फिशिंग (मत्स्य या मछली उद्योग), तेल, गैस, खनिज और खनन, बंदरगाह गतिविधियां और पर्यटन जैसे उद्योगों की संभावनाएं हैं. किसी भी देश और उसके तटीय राज्यों के पास ब्लू-इकोनॉमी के जरिए खुद को विकसित करने का एक बड़ा मौका होता है. भारत सरकार द्वारा जारी 'न्यू इंडिया विजन' में ब्लू-इकोनॉमी को 10 प्रमुख आयामों में से एक बताया गया है.
दुनिया भर में समुद्री आधारित अर्थव्यवस्था का मूल्य लगभग 1.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष है. मात्रा के हिसाब से वैश्विक व्यापार का 80 प्रतिशत हिस्सा समुद्र के रास्ते होता है. दुनिया भर में 350 मिलियन (35 करोड़) रोजगार मत्स्य पालन से जुड़ी हुई हैं. अनुमान है कि 2025 तक कच्चे तेल का 34% उत्पादन अपतटीय क्षेत्रों (राष्ट्रीय सीमाओं के बाहर स्थित क्षेत्र. इसमें जल-आधारित और भूमि-आधारित दोनों क्षेत्र आते हैं) से आएगा. एक्वाकल्चर सबसे तेजी से बढ़ने वाला खाद्य क्षेत्र है और मानव उपभोग के लिए लगभग 50% मछली प्रदान करता है.
हिंद महासागर क्षेत्र संसाधनों से प्रचुर है. विशेष रूप से मत्स्य पालन, जलीय कृषि, समुद्री ऊर्जा, समुद्री तल खनन और खनिजों के क्षेत्रों में. साथ ही यह महासागरीय क्षेत्र समुद्री पर्यटन और शिपिंग गतिविधियों को विकसित करने के लिए जबरदस्त आर्थिक अवसर प्रदान करता है. ब्लू-इकोनॉमी भारत के 2032 तक 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के सपने को साकार करने में बहुत बड़ा योगदान कर सकता है. इसके अतिरिक्त, हिंद महासागर क्षेत्र भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए रणनीतिक महत्व का है. क्योंकि देश का अधिकांश तेल यहां से प्राप्त होता है. भारत अपनी जरूरतों के लिए गैस का आयात इसी समुद्र के माध्यम से करता है.
हिंद महासागर में चीन की ब्लू-इकोनॉमी स्ट्रेटजी क्या है?
चीन की हिंद महासागर तक सीधी पहुंच नहीं है, जो कि हिंद-प्रशांत का एक प्रमुख हिस्सा है. यह रणनीतिक भू-राजनीतिक महत्व का क्षेत्र है. भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ, उस क्वाड का हिस्सा है जो क्षेत्र में चीन के आधिपत्य के सामने एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए काम कर रहा है. इंडो-पैसिफिक जापान के पूर्वी तट से अफ्रीका के पूर्वी तट तक फैला हुआ है. चीन विभिन्न मंचों और पहलों के माध्यम से हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ रहा है. दरअसल, इस सक्रियता के पीछे उसकी कोशिश इस क्षेत्र में क्वाड (ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका के बीच एक डिप्लोमेटिक प्लेटफार्म) की काट खोजना है. चाइना-इंडियन ओशन रीजन फोरम ऐसा ही एक मंच है.
हिंद महासागर में स्थित होने के कारण मालदीव भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. भारत के समुद्री सीमा के पड़ोस में स्थित मालदीव में चीन की रणनीतिक पैठ बढ़ी है. मालदीव दक्षिण एशिया में चीन के 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' (एक भू-राजनीतिक परिकल्पना है) में एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में उभरा है. इस तरह मालदीव रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद महासागर क्षेत्र में एशिया की दो प्रमुख शक्तियों भारत और चीन की प्रतिद्वंद्विता के केंद्र में है. भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी स्थिति को लेकर संतुष्ट नहीं रह सकता और उसे मालदीव के साथ चीन की बढ़ती नजदीकियों पर ध्यान देना होगा. क्योंकि बीजिंग की नजर मालदीव के जरिए हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी पैठ जमाने और यहां मौजूद संसाधनों का दोहन करना है.